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आलू की खेती में बंगाल ज्योति, पोखराज और चंद्रमुखी किसानों की पसंद; मगर मुनाफे की भी सता रही चिंता

Published: Tue, 27 Oct 2026 03:28 PM (IST)

नारदीगंज के किसान धान की फसल के बाद अब आलू की खेती की तैयारी में जुट गए हैं, जिसमें बंगाल ...और पढ़ें

आलू की खेती में बंगाल ज्योति, पोखराज और चंद्रमुखी किसानों की पसंद; मगर मुनाफे की भी सता रही चिंता

आलू की खेती में बंगाल ज्योति, पोखराज और चंद्रमुखी किसानों की पसंद; मगर मुनाफे की भी सता रही चिंता

HighLights

  1. नारदीगंज में आलू की खेती की तैयारी शुरू, किसान उत्साहित।

  2. बंगाल ज्योति, पोखराज, चंद्रमुखी आलू किस्में किसानों की पसंद।

  3. उच्च लागत और कम दाम से किसान आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे।

संवाद सूत्र, नारदीगंज (नवादा)। नारदीगंज क्षेत्र के किसानों ने खेती-बारी के अगले चक्र की तैयारी शुरू कर दी है। एक ओर जहां खेतों में धान की फसल लहलहा रही है। वहीं उनमें बालियां आने से किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद है।

दूसरी ओर जिन खेतों में धान की रोपनी नहीं हो पाई थी, वहां अब आलू की खेती की तैयारी की जा रही है। किसान अपने खेतों की अच्छी तरह जुताई कर उन्हें तैयार करने के बाद पंक्तिबद्ध तरीके से आलू का रोपण कर रहे हैं।

इधर, नारदीगंज बाजार में आलू के बीजों की दुकानें सज चुकी हैं, जहां किसान अपनी पसंद के अनुसार बीजों की खरीदारी कर रहे हैं।

स्थानीय बीज विक्रेता सरफराज आलम (बाबा) ने बताया कि बाजार में कई बेहतरीन प्रजातियों के बीज उपलब्ध हैं। सफेद किस्मों में एसवन, पोखराज और बंगाल ज्योति 400 रुपये प्रति बैग (45 किलोग्राम) की दर से बिक रहे हैं, जबकि चंद्रमुखी आलू 500 रुपये प्रति बैग मिल रहा है।

इसके अलावा, लाल गुलाल आलू का बीज 550 रुपये प्रति बैग की दर पर बिक रहा है। फिलहाल किसानों की सबसे ज्यादा पसंद एसवन, बंगाल ज्योति, पोखराज और चंद्रमुखी बने हुए हैं।

स्थानीय किसान पसई निवासी कृष्ण कुमार,अजय कुमार, ओड़ो के अर्जुन यादव, हरनारायणपुर के श्रवण कुमार कुशवाहा, गोतरायन के मनोज शर्मा, वलवा पर के बैजू कुशवाहा समेत अन्य किसान ने बताया कि इस समय मौसम आलू की बुआई के लिए पूरी तरह अनुकूल है।

आलू के आकार पर निर्भर करते हुए एक कट्ठा जमीन में लगभग 45 किलोग्राम बीज लग जाता है। बुआई के वक्त ही खेतों में यूरिया, पोटाश और डीएपी जैसे जरूरी खाद डाले जाते हैं।

वर्तमान में एक कट्ठा खेत में आलू लगाने पर 1,000 से 1,200 रुपये तक की लागत आ रही है, और आने वाले दिनों में कीमतों में और बढ़ोतरी की आशंका भी जताई जा रही है।

सब्जियों का राजा कहलाता आलू, नारदीगंज के कई गांवों में होती अच्छी उपज

नारदीगंज प्रखंड क्षेत्र में आलू की खेती ओड़ो, बस्ती बिगहा, कहुआरा, हड़िया, बलवापर, बरिया, गोतरायन समेत कई गांवों में आलू की खेती होती है।

सब्जियों के राजा कहे जाने वाले आलू के बिना आम आदमी की रसोई नहीं चल पाती। लेकिन इस खेती से जुड़ी किसानों की अपनी चिंताएं भी हैं।

किसानों का दर्द है कि आलू के उत्पादन में भारी लागत और मेहनत लगती है, लेकिन फसल तैयार होने पर बाजार में उचित दाम नहीं मिल पाते, जिससे उनकी आर्थिक नुकसान होता है।

इन तमाम आर्थिक चुनौतियों के बावजूद, अन्नदाता अपनी जीविका और लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए पूरे उत्साह के साथ आलू की खेती में जुटे हुए हैं।

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