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बैलगाड़ी से हुई दुल्हन की विदाई, कार्ड में छपी थी महात्मा गांधी की तस्वीर; नवादा में मुस्लिम कपल की अनोखी शादी

Published: Sat, 17 Oct 2026 04:14 PM (IST)

नवादा के मरुई गांव में एक मुस्लिम जोड़े ने महात्मा गांधी से प्रेरित होकर अपनी दुल्हन को बैलगाड़ी से घर ...और पढ़ें

बैलगाड़ी में दूल्हा-दुल्हन। फोटो जागरण

बैलगाड़ी में दूल्हा-दुल्हन। फोटो जागरण

HighLights

  1. दुल्हन बैलगाड़ी से घर पहुंची, बनी चर्चा का विषय।

  2. दूल्हा महात्मा गांधी के आदर्शों से था प्रेरित।

  3. सादगी और पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश।

संवाद सूत्र, रोह (नवादा)। जिले के रोह प्रखंड के मरुई गांव में शुक्रवार की संध्या जब माथे पर पारंपरिक पगड़ी व उजले रंग की शेरवानी पहने एक युवक अपनी नई नवेली दुल्हन के साथ फूलों से सजी बैलगाड़ी पर सवार होकर गांव पहुंचा, तो देखने वालों की भीड़ उमड़ गई।

हर कोई बैलगाड़ी पर आने वाली दुल्हन को देखने के लिए उत्सुक नजर आए। हर कोई उनकी तस्वीर को अपने कमरे में कैद करने की जुगत में लग गए।

गांव की सीमा में प्रवेश करते ही हिंदू-मुस्लिम सैंकड़ों महिला-पुरुष व बच्चे बैलगाड़ी के पीछे-पीछे चलते हुए दुल्हे के घर दरवाजे तक पहुंचे। इसके बाद दुल्हन का दीदार किया।

गांधीजी के जीवन से प्रभावित 

मरुई गांव निवासी व पेशे से प्राइवेट शिक्षक दुल्हा एहतेशाम रजा राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जीवन से काफी प्रभावित हैं।

उन्होंने अपने शादी के कार्ड पर दूल्हा-दुल्हन के नाम की जगह बापू और कस्तूरबा लिखा कर बापू के आदर्श व उनके प्रति प्रेम को दर्शाया।

आज के आधुनिक युग में जहां महंगी-महंगी लग्जरी गाड़ियों से बरात जाने व दुल्हन को लाने को अपनी शान समझते हैं।

वहीं इलाके में इआरबी सर के नाम से चर्चित युवक एहतेशाम रजा ज़ब अपनी दुल्हन जाकरा अकील को घूंघट में लेकर बैलगाड़ी से गांव पहुंचे तो हर धर्म समुदाय के लोगों ने उनकी इस सोच की खूब सराहना की।

दिखावे के जमाने में सादगी की मिशाल

बैलगाड़ी चालक मरुई पंचायत के मानपुर गांव निवासी हरिराम यादव भी अपने को धन्य समझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं वर्षों से बैलगाड़ी चलाने का काम कर रहा हूं। लेकिन आज जो मुझे गर्व महसूस हो रहा है ऐसा जीवन में कभी महसूस नहीं हुआ था।

दूल्हा एहतेशाम रजा ने बताया कि आज दिखावे के कारण लोग महंगी-महंगी शादियां कर रहे हैं। परंतु मैं शांति और सादगी के प्रतीक महात्मा गांधी से प्रेरित होने के कारण बैलगाड़ी से अपनी दुल्हनिया को लेकर गांव आया।

उद्देश्य बेफिजूल के दिखावे को कम करना और पर्यावरण को दूषित होने से भी बचाना है। साथ ही पुरानी पारंपरिक सवारी को जीवंत करने का प्रयास किया। यह शादी जिला मुख्यालय नवादा के मुस्लिम रोड में बीते 16 अक्टूबर को हुई थी।

इस तरह की शादी और बैलगाड़ी पर दुल्हन का आना क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। हर कोई दुल्हा-दुल्हन के परिवार वालों की सराहना कर रहे हैं। छोटे-छोटे बच्चे भी यह सब देखने के लिए जुटे थे। युवक के अनुसार उनकी दुल्हन स्नातक पास हैं। यह शादी एरेंज मैरेज हुई है।

आज के दौर में जहां शादी समारोह में महंगी गाड़ियों और भव्य सजावट का चलन बढ़ रहा है, वहीं मरूई गांव के नई नवेले जोड़े ने पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति को अपनाकर एक अलग पहचान बनाई है।

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