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'मां और भैंस दोनों का दूध पिया है', बिहार में कैसे रुकी आडवाणी की रथ यात्रा? लालू के सीक्रेट ऑपरेशन की पूरी कहानी

Published: Sat, 17 Oct 2026 03:55 PM (IST)

Ram Mandir Rath Yatra Bihar History: लालकृष्ण आडवाणी की राम मंदिर रथ यात्रा को 1990 में बिहार में लालू प्रसाद ...और पढ़ें

लालू यादव और आडवाणी के टशन की कहानी। फोटो जागरण

लालू यादव और आडवाणी के टशन की कहानी। फोटो जागरण

HighLights

  1. आडवाणी की रथ यात्रा 1990 में बिहार में रोकी गई।

  2. लालू यादव ने समस्तीपुर में गुप्त ऑपरेशन से गिरफ्तार किया।

  3. गिरफ्तारी के बाद केंद्र की वीपी सिंह सरकार गिर गई।

डिजिटल डेस्क, पटना। भारतीय जनता पार्टी आज देश की सबसे बड़ी है, लेकिन BJP को इस मंजिल तक पहुंचाने में लालकृष्ण आडवाणी और राम मंदिर रथ यात्रा का बड़ा योगदान रहा है। ये यात्रा गुजरात के सोमनाथ से अयोध्या तक 25 सितंबर 1990 को शुरू की गई थी।

इस रथ यात्रा को 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचना था, लेकिन इसे बिहार में ही रोक दिया गया था और 22 और 23 अक्टूबर 1990 की देर रात समस्तीपुर के सर्किट हाउस से आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया।

लालू के इस कदम का जिक्र आज भी होता है, क्योंकि उस वक्त लालू यादव और लालकृष्ण आडवाणी केंद्र में एक ही सरकार का हिस्सा थे और आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद सरकार गिर गई थी।

लालू यादव पर लिखी गई किताब 'गोपालगंज टू रायसीना' के मुताबिक इस गिरफ्तारी से पहले 2 और प्रयास किए गए थे, जो फेल रहे। इस स्टोरी में लालकृष्ण आडवाणी के गिरफ्तारी के पूरे घटनाक्रम को जानेंगे।

गिरफ्तारी से पहले हॉट टॉक

लालू यादव अपनी किताब गोपालगंज टू रायसीना में बताते हैं कि बिहार में रामशिला पूजन (अक्टूबर 1989) के दौरान हिंदू-मुस्लिम के दंगे हुए थे, जिसमें भागलपुर में सैकड़ों लोगों की जान गई थी।

इसके बाद भी कई झड़पें हिंदू-मुस्लिम के बीच हुई थीं। काफी मेहनत के बाद प्रदेश में शांति स्थापित हुई थी, लेकिन आडवाणी की यात्रा से इसके खत्म होने का खतरा था।

यात्रा रोकने के लिए बिहार के तात्कालीन सीएम लालू यादव आडवाणी से दिल्ली में जाकर व्यक्तिगत रूप से मिले थे। इस दौरान उन्होंने तथाकथित 'दंगा फैलाने वाली' रथयात्रा रोकने की अपील की थी और कहा था कि अगर ये नहीं रुकी तो छोड़ेंगे नहीं।

इस पर आडवाणी ने कहा- "देखता हूं कौन माई का दूध पिया है, जो मेरी रथयात्रा रोकेगा।" इसके बाद लालू ने जवाब दिया था, "मैंने मां और भैंस दोनों का दूध पिया है, आइए बिहार में देखता हूं।"

कई राज्यों से होते हुए लालकृष्ण आडवाणी की यात्रा अक्टूबर 1990 में मध्यप्रदेश से धनबाद (उस वक्त बिहार का हिस्सा था) में प्रवेश कर गई।

इस दौरान लालू यादव ने प्रधानमंत्री वीपी सिंह से दो बार बात की और आडवाणी की गिरफ्तारी की इजाजत मांगी, लेकिन उनकी तरफ से कोई जवाब नहीं आया, क्योंकि सरकार बीजेपी के सहयोग से चल रही थी।

दो बार फेल हुई गिरफ्तारी की प्लानिंग

बिहार में सांप्रदायिक दंगे भड़कने की आशंका के चलते लालू यादव हर हाल में इस यात्रा को रोकना चाहते थे। इस लिए उन्होंने दृढ़ निश्चय कर लिया कि आडवाणी को गिरफ्तार करना है।

इसके चलते उन्होंने धनबाद के DCP और एसपी को गिरफ्तारी का आदेश दिया, लेकिन उन्होने शांति भंग होने की आशंका के चलते ऐसा करने से मना कर दिया।

इसके बाद दूसरा प्रयास सासाराम में किया गया। तब लालू यादव ने अपने बेडरूम से प्रिंसिपल सिक्रेटरी मुकुंद प्रसाद को फोन लगाया और कहा कि यात्रा रुकनी चाहिए और आडवाणी और संघ परिवार के दूसरे नेताओं को गिरफ्तार किया जाना चाहिए।

सबसे पहले केवल आडवाणी को गिरफ्तार करने की योजना बनाई गई। इस योजना को गुप्त रखने के लिए कहा गया था, लेकिन ये योजना लीक हो गई और आडवाणी ने अपने रूट को बदल लिया और इस बार भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

तीसरी प्लानिंग: लालू यादव ने खुद संभाला मोर्चा

जब आडवाणी की रथ यात्रा बिहार के समस्तीपुर पहुंची, तो एक बार फिर गिरफ्तारी की गुप्त योजना बनी। ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए लालू यादव ने बेहद चुनिंदा और भरोसेमंद अधिकारियों को लगाया था, जिनमें तत्कालीन आईएएस अधिकारी RK सिंह (राजकुमार सिंह) शामिल थे, जो बाद में बीजेपी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी रहे।

चीफ सेक्रेटरी, होम सेक्रेटरी और अन्य अधिकारियों को लालू यादव के आवास में ही रुकने के निर्देश दिए गए थे और निश्चित हुआ कि कोई भी फोन का इस्तेमाल नहीं करेगा। गिरफ्तारी के लिए सुबह का समय तय हुआ था और हेलीकॉप्टर के पायलट को जानकारी दे दी गई थी।

आडवाणी समस्तीपुर के सर्किट हाउस में रुके थे। किताब के मुताबिक, 23 अक्टूबर 1990 की आधी रात (करीब 2 बजे) लालू प्रसाद यादव ने 'आज न्यूज पेपर' के पत्रकार बनकर सर्किट हाउस के लैंडलाइन नंबर पर फोन लगाया।

लालू यादव ने कुक से पूछा कि आडवाणी क्या कर रहे हैं और उनके पासे कितने समर्थक हैं? वहां तैनात कुक ने उन्हें बताया कि समर्थक जा चुके हैं और आडवाणी जी आराम कर रहे हैं।

माहौल पूरी तरह शांत देखकर, सुरक्षा बल और अधिकारी तुरंत एक्शन में आए। लालू यादव ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए थे कि गिरफ्तारी के वक्त कोई भी ढिलाई न बरती जाए।

उन्होंने यहां तक आदेश दे दिया था कि यदि इस गिरफ्तारी में कोई भी बाधा डालने की कोशिश करे, तो उसे गोली मार दी जाए। 23 अक्टूबर 1990 की रात करीब 1:30 से 2:00 बजे के बीच लालकृष्ण आडवाणी को समस्तीपुर सर्किट हाउस से गिरफ्तार कर लिया गया।

गेस्ट हाउस में टाइट सिक्योरिटी में थे आडवाणी

गिरफ्तारी के बाद आडवाणी को तुरंत हेलीकॉप्टर से दुमका (अब झारखंड में) के मसानजोर डैड/डिफेंस नहर के किनारे स्थित मसानजोर गेस्ट हाउस ले जाया गया। यहां टाइट सिक्योरिटी थी।

आडवाणी की गिरफ्तारी की खबर आग की तरह फैली और समर्थक सड़कों पर आ गए, लेकिन लालू यादव ने कानून की उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की आदेश दिए थे।

इसके अलावा आडवाणी को केवल पत्नी से बात करने की इजाजत दी गई थी, लेकिन अधिकारी को बातचीत के दौरान उनके रूम में रुकने का निर्देश दिया गया था। आडवाणी की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी ने जनता दल से नाता तोड़ लिया था और सरकार गिर गई थी।

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