विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब ने कराया था निर्माण, छठ पर हिलसा सूर्य मंदिर में लगेगा चार दिवसीय मेला

Published: Wed, 04 Nov 2026 02:52 PM (IST)

बिहार के नालंदा स्थित हिलसा सूर्य मंदिर छठ महापर्व पर आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। भगवान श्रीकृष्ण के ...और पढ़ें

भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब ने कराया था निर्माण

भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र साम्ब ने कराया था निर्माण

HighLights

  1. राजा साम्ब ने कराया था हिलसा सूर्य मंदिर का निर्माण।

  2. छठ महापर्व पर मंदिर में लगता है चार दिवसीय मेला।

  3. छठ व्रतियों के लिए नगर परिषद कर रहा विशेष व्यवस्था।

उपेंद्र कुमार, हिलसा (नालंदा)। बिहार के प्राचीन सूर्य उपासना केंद्रों में शामिल हिलसा का सूर्य मंदिर छठ महापर्व पर आस्था का प्रमुख केंद्र बन जाता है। विशाल सरोवर के पूर्वी किनारे स्थित इस मंदिर में चैत और कार्तिक छठ के मौके पर स्थानीय श्रद्धालुओं के साथ पटना, बिहारशरीफ, राजगीर, गया और जहानाबाद समेत दूर-दराज के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में व्रती अर्घ्य अर्पित करने पहुंचते हैं। 

मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर की स्थापना द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण के पुत्र राजा साम्ब ने कराई थी। यही वजह है कि धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से इसका विशेष महत्व माना जाता है।

दीपावली के साथ छठ की तैयारी शुरू

हिलसा नगर परिषद प्रशासन द्वारा दीपावली के साथ यहां छठ की तैयारी शुरू हो जाती है। लेकिन इन दिनों मंदिर परिसर और सरोवर के घाटों की साफ-सफाई का काम प्रारंभ नहीं हुआ है। 

पहले सरोवर के केवल पूर्वी हिस्से में पत्थर की सीढ़ियां थीं, लेकिन अब दक्षिण दिशा के कुछ अंश भाग को छोड़ कर चारों तरफ पक्की सीढ़ियां बन चुकी हैं। छठ के दौरान यहां चार दिनों तक मेला लगता है और पूरा परिसर भक्तिमय हो जाता है।

राजा साम्ब से जुड़ी है मंदिर की मान्यता

मंदिर के पुजारी अंजनी पांडेय बताते हैं कि यह मंदिर कई हजार वर्ष पुराना माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कुष्ठ रोग से मुक्ति के लिए राजा साम्ब ने बड़गांव सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना की थी। स्वस्थ होने के बाद पुरोहितों की सलाह पर उन्होंने विभिन्न स्थानों पर सूर्य मंदिरों का निर्माण कराया, जिनमें हिलसा का सूर्य मंदिर भी शामिल बताया जाता है। 

मंदिर के गर्भगृह में सात घोड़ों के रथ पर सवार भगवान भास्कर सारथी अरुण देव के साथ विराजमान हैं। यहां भगवान विष्णु, शिव, माता पार्वती, गणेश और हनुमान की प्रतिमाएं भी काले पत्थरों से निर्मित हैं। मंदिर के सामने स्थित विशाल सरोवर में स्नान कर भगवान सूर्य की पूजा करने की विशेष मान्यता है। श्रद्धालु यहां मनोकामना पूर्ति और रोगों से मुक्ति की कामना करते हैं।

प्रत्येक रविवार को होती है विशेष पूजा

पुजारी सौरभ पांडेय के अनुसार, मंदिर में सालों भर प्रत्येक रविवार को विशेष पूजा और गाय के दूध से भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। मार्गशीर्ष मास के अगहनी रविवार को श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ उमड़ती है। 

इसी दिन से रविवार व्रत का आरंभ होता है, जिसकी पूर्णाहुति वैशाख मास में होती है। इस दौरान व्रती नमक का सेवन भी नहीं करते। कुंडली में बुध ग्रह से संबंधित दोषों के निवारण के लिए भी यहां विशेष पूजा की मान्यता है।

1990 के दशक में हुआ जीर्णोद्धार

पुजारी अंजनी पांडेय बताते हैं कि समय के साथ मंदिर की स्थिति जर्जर हो गई थी। 1990 के दशक में हिलसा के व्यवसायी एवं इंजीनियर हरिनंदन प्रसाद ने इसका जीर्णोद्धार कराया था। 

परिसर में शिव, ग्राम देवी, विश्वकर्मा, नवग्रह, चित्रगुप्त, संतोषी माता, गायत्री और हनुमान सहित कई देवी-देवताओं के मंदिर भी स्थापित हैं। यहां पटना हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश संजय करोल, पटना उच्च न्यायालय के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशुतोष कुमार, पटना उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति अनिल कुमार सिन्हा भी यहां पहुंचकर भगवान सूर्य की पूजा-अर्चना की थी।

छठ व्रतियों के लिए होंगी विशेष व्यवस्थाएं

मुख्य पार्षद धनंजय कुमार ने बताया कि छठ व्रतियों की सुविधा के लिए साफ-सफाई, मेडिकल कैंप, चेंजिंग रूम, चलंत शौचालय, स्नानघर, शुद्ध पेयजल, रोशनी और वाच टावर की व्यवस्था की जाएगी । इसकी तैयारी को लेकर बैठक और योजना बन गई है। 

सरोवर में गहरे पानी की ओर जाने से रोकने के लिए बांस-बल्ले से बैरिकेडिंग कराई जाएगी। अर्घ्य के दौरान नाव के साथ तैराक भी तैनात रहेंगे। मेले में सीसी कैमरे से नजर रखी जाएगी।

यह भी पढ़ें- 23 साल पहले नीतीश कुमार ने किया था उद्घाटन, फिर भी हिलसा स्टेशन पर सुविधाओं का टोटा


देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।