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एसकेएमसीएच मुजफ्फरपुर में नीट पीजी काउंसलिंग, पीडियाट्रिक्स और मेडिसिन बनीं युवा डॉक्टरों की पहली पसंद

Published: Sun, 01 Nov 2026 05:00 AM (IST)

Bihar Neet Pg Counseling Update: मुजफ्फरपुर के एसकेएमसीएच में नीट पीजी काउंसलिंग के दौरान युवा डॉक्टरों में पीडियाट्रिक्स और जनरल ...और पढ़ें

टॉप रैंकर्स मुजफ्फरपुर में मेडिसिन की सीट को तरजीह दे रहे हैं।

टॉप रैंकर्स मुजफ्फरपुर में मेडिसिन की सीट को तरजीह दे रहे हैं।

केशव कुमार, मुजफ्फरपुर। Skmch Muzaffarpur Neet Pg Counseling:नीट पीजी की कठिन परीक्षा पास करने के बाद काउंसलिंग में पहुंचे युवा डॉक्टर क्लिनिकल ब्रांचेज के लिए जबरदस्त होड़ लगाए हुए हैं।

ऑल इंडिया काउंसलिंग के पहले राउंड के आंकड़ों में डॉक्टर्स का रुख साफ दिख रहा है। श्री कृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय में पीडियाट्रिक्स और जनरल मेडिसिन सबसे ज्यादा पसंदीदा ब्रांचेस बनकर उभरी हैं।

मेडिसिन की मांग

मेधावी छात्रों ने रेडियोलॉजी जैसी ब्रांचेस छोड़कर कोर क्लिनिकल विषयों पर भरोसा जताया है। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) कैटेगरी के लिए एसकेएमसीएच में एमडी जनरल मेडिसिन की क्लोजिंग रैंक महज 5032 रही। यह आंकड़ा दर्शाता है कि टॉप रैंकर्स मुजफ्फरपुर में मेडिसिन की सीट को तरजीह दे रहे हैं।

पीडियाट्रिक्स का क्रेज

बच्चों के इलाज से जुड़ी एमडी पीडियाट्रिक्स (बाल रोग) का क्रेज एसकेएमसीएच में चरम पर देखा जा रहा है। ओबीसी कैटेगरी के लिए यह सीट महज 7,677 की ऑल इंडिया रैंक पर ही फुल हो गई।

कॉलेज की सर्जरी जैसी अन्य सीटों की तुलना में यह सबसे कठिन क्लोजिंग रैंक रही।

मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर

मुजफ्फरपुर और आसपास के क्षेत्रों में चमकी बुखार व गंभीर बीमारियों को देखते हुए एसकेएमसीएच में पीडियाट्रिक्स का इंफ्रास्ट्रक्चर काफी मजबूत हुआ है।

यहां एक बड़ा पीडियाट्रिक क्रिटिकल केयर सेटअप है। पीजी छात्रों को गंभीर नवजात शिशुओं की देखभाल का बेहतरीन क्लिनिकल अनुभव मिलता है।

क्लीनिक की संभावना

छात्रों के इस आकर्षण के पीछे व्यावहारिक कारण और मिलने वाला बेहतर स्टाइपेंड भी प्रमुख वजह है। डॉक्टरों का मानना है कि पीडियाट्रिक्स कोर क्लिनिकल ब्रांच है। पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टर बहुत कम लागत में अपना निजी बाल रोग क्लिनिक भी स्थापित कर सकते हैं।

दूसरे राउंड रणनीति

देशभर में 5000 से अधिक पीजी सीटें बढ़ने के बावजूद प्रतिष्ठित सरकारी मेडिकल कॉलेजों में मुकाबला कड़ा है। जो छात्र मामूली रैंक से एसकेएमसीएच में पसंदीदा सीट पाने से चूक गए हैं, वे अब राउंड-2 और मॉप-अप राउंड के लिए अपनी चॉइस फिलिंग की रणनीति बेहद सावधानी से बना रहे हैं।

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