बिहार के 3 प्रमुख विश्वविद्यालयों में वित्त पदाधिकारियों के पदस्थापन पर रोक, राजभवन का रुख सख्त
Bihar University Finance Officer Appointment: राजभवन ने बिहार के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों में वित्त पदाधिकारियों की नियुक्ति पर रोक लगा ...और पढ़ें

राज्यपाल के अपर सचिव ने इस पत्र की प्रति उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के साथ-साथ तीनों संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भी भेज दी है।
HighLights
राजभवन ने तीन बिहार विश्वविद्यालयों में नियुक्ति रोकी।
वित्त विभाग के पदस्थापन आदेश को स्थगित किया गया।
कुलाधिपति के नियमों का उल्लंघन बताया गया।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Bihar University News: राजभवन ने राज्य के तीन प्रमुख विश्वविद्यालयों में वित्त पदाधिकारियों की नियुक्ति को लेकर कड़ा रुख अपनाया है।
वित्त विभाग की ओर से जारी पदस्थापन आदेश को तत्काल प्रभाव से स्थगित रखने का निर्देश दिया गया है। इसके तहत बीआरए बिहार विश्वविद्यालय, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय और पटना विश्वविद्यालय में नए वित्त पदाधिकारियों की तैनाती पर रोक लगा दी गई है।
कुलाधिपति के नियमों का हवाला
राज्यपाल के अपर सचिव संजय कुमार ने वित्त विभाग के प्रधान सचिव को पत्र भेजकर 30 अक्टूबर को जारी पदस्थापन आदेश को रोकने का निर्देश दिया है।
पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि विश्वविद्यालयों में वित्त पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए कुलाधिपति द्वारा पहले ही नया परिनियम अधिसूचित किया जा चुका है।
ऐसे में उस निर्धारित व्यवस्था को दरकिनार कर वित्त विभाग की ओर से सीधे अधिकारियों का पदस्थापन किया जाना उचित नहीं है।
कुलपतियों को भेजा गया निर्देश
राजभवन की ओर से जारी निर्देश में कहा गया है कि विश्वविद्यालयों में महत्वपूर्ण प्रशासनिक एवं वित्तीय पदों पर तैनाती वैधानिक प्रावधानों के अनुसार ही होनी चाहिए।
राज्यपाल के अपर सचिव ने इस पत्र की प्रति उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के साथ-साथ तीनों संबंधित विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को भी भेज दी है।
30 अक्टूबर को जारी हुआ था आदेश
गौरतलब है कि वित्त विभाग ने 30 अक्टूबर को बिहार वित्तीय प्रशासन सेवा के अधिकारियों का पदस्थापन किया था। इसके तहत बीआरए बिहार विश्वविद्यालय में नंद किशोर सिंह, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय में जयंत कुमार और पटना विश्वविद्यालय में चंदन कुमार को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
अब राजभवन के हस्तक्षेप के बाद इन नियुक्तियों पर रोक लग गई है और कुलाधिपति द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार ही आगे की प्रक्रिया पूरी होगी।
यह भी पढ़ें- BRABU के नए पीजी पाठ्यक्रम में शोध प्रकाशन पर मिलेंगे 100 अंक और दो क्रेडिट, व्यवस्था अगले साल से