विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

तिरहुत शिक्षक निर्वाचन: पहले राउंड से आखिरी तक बढ़त, दो हार के बाद नरेंद्र प्रसाद सिंह ने ऐसे की वापसी

Published: Tue, 27 Oct 2026 11:05 PM (IST)

Muzaffarpur election results : डा. नरेंद्र प्रसाद सिंह ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार दो हार के बाद शानदार ...और पढ़ें

तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए उम्मीदवार की जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओ के साथ विजयी मुद्रा में डा.नरेंद्र प्रसाद सिंह । जागरण

तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से एनडीए उम्मीदवार की जीत के बाद भाजपा कार्यकर्ताओ के साथ विजयी मुद्रा में डा.नरेंद्र प्रसाद सिंह । जागरण

प्रेम शंकर मिश्रा, मुजफ्फरपुर । तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से लगातार तीन बार विधान परिषद सदस्य रहे डा. नरेंद्र प्रसाद के लिए पिछला दो चुनाव अच्छा नहीं रहा था। वर्ष 2014 के चुनाव में जदयू से अलग होकर लड़ी भाजपा ने यह सीट गंवा दी थी।

डा. नरेंद्र प्रसाद सिंह लगातार तीन बार निर्वाचित होने के बाद हार का स्वाद चखे। पिछले चुनाव में जदयू के साथ रहने के बाद भी वह तीसरे स्थान पर चले गए। बढ़ती उम्र के बीच भाजपा ने उनपर फिर विश्वास जताया।

दो हार और चुनाव प्रचार के लिए मिले कम समय को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही थीं। यूजीसी और एसआइआर विवाद के बीच उनकी वापसी को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे, मगर लंबे समय से शिक्षकाें के बीच रहने का उनका अनुभव अंत में काम आया।

जबरदस्त वापसी करते हुए उन्होंने जीत दर्ज की। मतगणना के पहले चरण से ही उन्होंने लगातार बढ़त बनाई जो अंत तक कायम रही। डा. सिंह इस जीत का श्रेय पार्टी के शीर्ष नेताओं को देते हैं।

परिणाम की घोषणा के बाद उन्होंने कहा, यह जीत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, सीएम सम्राट चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी की जीत है। उनकी जीत में पार्टी के नेताओं की भूमिका इसलिए भी मानी जा रही है कि एनडीए के सभी घटक दलों ने एकजुटता भी दिखाई। यही कारण रहा कि भाजपा ने इस सीट पर वापसी की।

नामांकन सभा से लेकर अंतिम दिन तक प्रयास : डा. नरेंद्र प्रसाद सिंह की नामांकन सभा से लेकर चुनाव प्रचार के अंतिम दिन तक एनडीए के घटक दल के नेता लगे रहे। बैठकों का दौर चलता रहा।

मंत्रियों, विधायकों, पूर्व सांसद, पूर्व विधायकों को विधानसभावार का प्रभार दिया गया। एक-एक वोट को सहेजने की रणनीति बनी। जिस तरह से शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से चतुष्कोणीय मुकाबला हुआ, इसमें थोड़ी सी चूक फिर भारी पड़ सकती थी।

जनसुराज फैक्टर ने भी डाला असर

तिरहुत शिक्षक निर्वाचन में पहली बार जनसुराज की इंट्री हुई थी। दो साल पहले तिरहुत स्नातक उपचुनाव में जनसुराज के उम्मीदवार डा. विनायक गौतम दूसरे नंबर पर रहे थे। इसलिए पार्टी ने इस बार दोनों क्षेत्रों से उम्मीदवार दिए।

शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से पार्टी ने पहले भूषण कुमार झा को उम्मीदवार घोषित किया। बाद में किसी कारण से उनका नाम वापस ले लिया गया। कारगिल के बलिदानी प्रमोद कुमार के भाई श्यामनंदन कुमार यादव को अंतिम समय में उम्मीदवार बनाया।

यह फैक्टर चुनाव को प्रभावित किया। यह इसलिए कि श्यामनंदन ने प्रथम वरीयता के 13 सौ से अधिक पाए। इससे मुकाबला सीधी लड़ाई का नहीं रहा। इसमें सीपीआइ समर्थित उम्मीदवार डा. संजय कुमार सिंह और निर्दलीय भूषण झा के भी वोट कटे। अगर जनुसराज या कहें कि श्यामनंदन की उम्मीदवारी नहीं होती तो परिणाम बदल भी सकता था।

वोट का अंतिम परिणाम

उम्मीदवार मिले कुल वोट

  • डा. नरेंद्र प्रसाद सिंह, भाजपा समर्थित 3662
  • भूषण कुमार झा, निर्दलीय 2351
  • डा. संजय कुमार सिंह, सीपीआइ समर्थित 1967
  • श्यामनंदन कुमार यादव, जनसुराज समर्थित 1458
  • अमित कुमार, निर्दलीय 282
  • प्रेम कुमार यादवख्, निर्दलीय 98
  • राजेश कुमार,निर्दलीय 24
  • कृष्ण नंदन त्रिवेदी, निर्दलीय 19
  • डा. अभय नाथ सिंह, निर्दलीय 18
  • कुमारी रूपम, निर्दलीय नौ
  • पूर्णिमा मिश्रा, निर्दलीय चार

कुल मतदाता 8760
कुल पड़े वोट 7271
अवैध वोट 254
कुल वैध मत 7017

यह भी पढ़ें- Bihar MLC Election: तिरहुत शिक्षक निर्वाचन से भाजपा के डा. नरेंद्र सिंह की शानदार जीत

यह भी पढ़ें- दरभंगा शिक्षक चुनाव: सुरेश प्रसाद राय की बढ़त से मुकाबला हुआ रोमांचक