'स्पेशल' के नाम पर दोगुना तक किराया, सवारी ट्रेन से भी खराब हाल; यात्री हो रहे परेशान
रेलवे की 'स्पेशल' ट्रेनें यात्रियों से अधिक किराया वसूल रही हैं, लेकिन समय पर पहुंचने की गारंटी नहीं दे रही ...और पढ़ें

स्पेशल ट्रेनों में दोगुना किराया, फिर भी घंटों देरी से सफर
HighLights
स्पेशल ट्रेनों में अधिक किराया, घंटों की देरी से यात्री परेशान।
नियमित ट्रेनें भी विलंब से, मुजफ्फरपुर जंक्शन पर बढ़ी मुश्किलें।
रेलवे को अतिरिक्त किराये के बदले बेहतर सेवा देनी चाहिए।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। नाम स्पेशल, किराया ज्यादा और सफर में घंटों की देरी। रेलवे यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को संभालने के लिए स्पेशल ट्रेनें चला रही है, लेकिन इन ट्रेनों में सफर करने वालों को अधिक किराया देने के बाद भी समय पर पहुंचने की गारंटी नहीं।
मुजफ्फरपुर जंक्शन पर स्पेशल ट्रेनों के साथ नियमित ट्रेनों की लेटलतीफी ने यात्रियों की परेशानी बढ़ा दी है। एक तरफ अतिरिक्त किराये का बोझ, दूसरी तरफ सवारी ट्रेन से भी खराब सर्विस। ऐसे में सवाल उठ रहा कि स्पेशल ट्रेन के नाम पर यात्रियों को अतिरिक्त क्या मिल रहा है?
स्पेशल ट्रेनें, चार से सात घंटे तक विलंब
ट्रेन संख्या 04652 अमृतसर-जयनगर स्पेशल करीब सात घंटे विलंब से पहुंची। ट्रेन संख्या 01482 मुजफ्फरपुर-हड़पसर स्पेशल चार घंटे लेट रही।
वहीं, ट्रेन संख्या 22554 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-रक्सौल अंत्योदय एक्सप्रेस छह घंटे विलंब से पहुंची। स्पेशल ट्रेनों का उद्देश्य अतिरिक्त भीड़ के समय यात्रियों को राहत देना है, लेकिन जब ट्रेनें घंटों विलंब से पहुंचती हैं, तो यात्रियों की यात्रा योजना बिगड़ जाती है।
लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को कनेक्टिंग ट्रेन, कामकाज और अन्य जरूरी कार्यक्रमों को लेकर भी परेशानी होती है।
नियमित ट्रेनें, मौर्य, छपरा-टाटा, वैशाली और आम्रपाली भी रही लेट:
बीच में नियमित ट्रेनों की स्थिति काफी बेहतर हो गई थी, लेकिन पिछले दो दिनों से परिचालन की स्थिति सही नहीं होने पर यात्रियों के बीच कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।
ट्रेन संख्या 15028 मौर्य एक्सप्रेस (गोरखपुर से हटिया) करीब तीन घंटे, ट्रेन संख्या 15566 वैशाली एक्सप्रेस (नई दिल्ली से ललितग्राम) दो घंटे और ट्रेन संख्या 15708 आम्रपाली एक्सप्रेस (अमृतसर से कटिहार) तीन घंटे तथा छपरा-टाटा एक घंटे की विलंब से पहुंची।
स्पष्ट है कि परेशानी केवल स्पेशल ट्रेनों तक सीमित नहीं है। नियमित ट्रेनों की लेटलतीफी भी यात्रियों का समय बर्बाद कर रही है। हालांकि, इन ट्रेनों की देरी अलग-अलग परिचालन कारणों से हो सकती है।
स्लीपर में 185 रुपये अधिक, एसी में भी भारी अंतर:
स्पेशल ट्रेन के नाम पर अधिक किराया वसूले जाने का उदाहरण समस्तीपुर होकर चलने वाली पूर्णिया कोर्ट-पाटलिपुत्र स्पेशल (03215) है।
समस्तीपुर से पाटलिपुत्र तक नियमित ट्रेनों में स्लीपर का किराया 165 रुपये, जबकि इस स्पेशल ट्रेन में 350 रुपये है। यानी 185 रुपये अधिक, करीब 112 प्रतिशत की वृद्धि।
अतिरिक्त किराये के बदले जवाबदेही कहां?
स्पेशल ट्रेन चलाना रेलवे की जरूरत हो सकती है, लेकिन यात्रियों की सुविधा और समयपालन की जवाबदेही भी उतनी ही जरूरी है।
नियमित ट्रेनों की तुलना में अधिक किराया लेने पर यात्रियों के मन में स्वाभाविक रूप से सवाल उठता है कि अतिरिक्त राशि के बदले उन्हें क्या सुविधा मिल रही है।
रेलवे को स्पेशल ट्रेनों के किराये, विलंब के कारणों और यात्रियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं के बारे में स्पष्ट जानकारी देनी चाहिए। यात्रियों को केवल ट्रेन के नाम में 'स्पेशल' नहीं, बल्कि सफर में भी राहत महसूस होनी चाहिए।
| श्रेणी | नियमित ट्रेन | स्पेशल ट्रेन |
|---|---|---|
| स्लीपर | 165 | 350 |
| थर्ड एसी | 535 | 930 |
| सेकंड एसी | 750 | 1,255 |
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