मुजफ्फरपुर की चार रेल परियोजनाओं का क्या होगा, रेलवे की नई गाइडलाइन से तय होगा भविष्य
रेलवे बोर्ड की नई नीति से मुजफ्फरपुर की चार लंबित रेल परियोजनाओं का भविष्य अधर में है। नई गाइडलाइन के ...और पढ़ें

यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।
HighLights
रेलवे की नई नीति से मुजफ्फरपुर की चार परियोजनाएं प्रभावित।
लंबित या अप्रासंगिक परियोजनाएं हो सकती हैं निरस्त।
बुनियादी ढांचे के विकास पर रहेगा रेलवे का जोर।
अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। रेलवे बोर्ड की नई नीति से मुजफ्फरपुर से जुड़ी चार रेल परियोजनाओं के भविष्य पर सवाल खड़े हो सकते हैं। वित्तीय वर्ष 2027-28 की वार्षिक प्रशासनिक और वित्तीय योजना को लेकर रेलवे बोर्ड ने सभी क्षेत्रीय रेल महाप्रबंधकों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
इसके तहत लंबे समय से लंबित, काम शुरू नहीं होने वाले या अप्रासंगिक हो चुके प्रोजेक्ट की समीक्षा की जाएगी। ऐसी योजनाओं को निरस्त किया जा सकता है।
नई व्यवस्था के अनुसार, समान प्रकृति के कार्यों को एक साथ जोड़कर स्वीकृति दी जाएगी। नई योजनाओं के लिए दो वर्ष की समय-सीमा निर्धारित की गई है। इस अवधि में जरूरी प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर योजना स्वतः निरस्त मानी जाएगी। किसी मद में नया काम शामिल करने के लिए समान लागत का पुराना या कम प्राथमिकता वाला कार्य हटाना होगा।
चार परियोजनाओं पर पड़ सकता है असर
मुजफ्फरपुर-छपरा, मुजफ्फरपुर-दरभंगा और मुजफ्फरपुर-जनकपुर नई रेल लाइन की चर्चा कई वर्षों से हो रही है, लेकिन ये परियोजनाएं अब तक धरातल पर नहीं उतर सकी हैं।
इसी तरह कपरपुरा में न्यू मुजफ्फरपुर जंक्शन बनाने की योजना भी लंबे समय से लंबित है। नई नीति के तहत इन परियोजनाओं की स्थिति और प्राथमिकता की समीक्षा हो सकती है।
जमीन अधिग्रहण सहित अन्य जरूरी प्रक्रियाओं में देरी होने पर इनके निरस्त होने का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, इन परियोजनाओं को रद करने के संबंध में अभी अंतिम निर्णय की पुष्टि नहीं हुई है।
बुनियादी ढांचे के विकास पर रहेगा जोर
रेलवे बोर्ड के निदेशक, सिविल इंजीनियरिंग की ओर से जारी निर्देश का उद्देश्य वित्तीय अनुशासन मजबूत करना और बुनियादी ढांचे के विकास को समयबद्ध बनाना है।
इसके तहत बजट का उपयोग ट्रैक दोहरीकरण, तीसरी और चौथी रेल लाइन बिछाने, कवच सुरक्षा प्रणाली तथा स्टेशनों के आधुनिकीकरण जैसी प्राथमिकता वाली योजनाओं पर केंद्रित करने की बात कही गई है।
यह जारी की गई गाइड लाइन
- लंबे समय बाद भी जिन परियोजनाओं में काम शुरू नहीं, सरेंडर होंगी
- सभी पुराने स्वीकृत प्रोजेक्ट की समीक्षा की जाएगी
- एक जैसे कार्यों को एक साथ जोड़कर ही स्वीकृति दी जाएगी
- नई परियोजनाओं को शुरू करने के लिए तय हुई दो साल की समय-सीमा
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