बिहार में दाखिल-खारिज के नए प्रावधान, कोर्ट में केस का आवेदन देने मात्र से नहीं होगा आवेदन अस्वीकृत
Bihar Land Mutation Rules : मुजफ्फरपुर में दाखिल-खारिज आवेदनों को सक्षम अदालत में मामला लंबित होने के आधार पर अस्वीकृत करने के संबंध में सरकार ने नए प्रावधान किए हैं।

Bihar Land Mutation Process : इसमें प्रतीकात्मक तस्वीर लगाई गई है।
HighLights
दाखिल-खारिज अस्वीकृति पर सरकार ने नए नियम बनाए।
केवल आवेदन या आपत्ति लंबित मामला नहीं माना जाएगा।
सिविल, हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट ही सक्षम न्यायालय होंगे।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Land Dispute Case Application : सक्षम अदालत में मामला लंबित होने का कारण बताते हुए अंचलाधिकारी द्वारा दाखिल-खारिज के आवेदन अस्वीकृत किए जा रहे हैं। इस तरह से बड़ी संख्या में आवेदनों के अस्वीकृत होने की स्थिति को देखते हुए सरकार ने इसके लिए नए सिरे से प्रविधान किया है।
इसमें सक्षम न्यायालय में मामला लंबित होने को लेकर स्थिति स्पष्ट भी की गई है। इसके अनुसार ही सभी अंचलाधिकारियों को दाखिल-खारिज के आवेदन को स्वीकृत या अस्वीकृत करने के निर्देश दिए गए हैं।
विदित हो कि दाखिल-खारिज के मामलों के निष्पादन के दौरान अंचलाधिकारी के स्तर से बड़ी संख्या में मामले इसलिए अस्वीकृत कर दिए जाते है कि मामला सक्षम न्यायालय में लंबित है। इससे आगे भी आवेदक के इन मामलों पर विचार नहीं हो पाता।
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने पत्र जारी कर कहा कि मामलों में "सक्षम न्यायालय" शब्द की विभिन्न अंचलों में अलग-अलग व्याख्या किए जाने से वादों के निष्पादन में अनावश्यक विलंब होता है। इससे संशय की स्थिति उत्पन्न होती है।
दिवानी अदालतमें भी "लंबित" शब्द की कोई परिभाषा उपलब्ध नहीं है। साथ ही, साधारण खंड अधिनियम, 1897 में भी "लंबित" शब्द परिभाषित नहीं है। इसे देखते हुए "सक्षम न्यायालय" एवं "लंबित" मामलों को निर्धारित किया गया है। सचिव ने इसके आधार पर ही सभी अंचलाधिकारियों को दाखिल-खारिज वाद पर निर्णय लेने को कहा है।
इन बिंदुओं पर होगा तय
- "सक्षम न्यायालय" का अभिप्राय दिवानी, व्यवहार न्यायालय, पटना उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय से है।
- लंबित की स्थिति यानी एडमिशन एवं नोटिस, स्थगन आदेश
या यथास्थिति होगा।- केवल आवेदन, आपत्ति या अभ्यावेदन के किसी न्यायालय में लंबित होना "सक्षम न्यायालय में लंबित" नहीं माना जाएगा।
- सक्षम न्यायालय में दायर वाद की अभिप्रमाणित प्रति, जिसमें स्पष्ट रूप से यदि स्वीकारण या एडमिशन
अंकित नहीं हो, "लंबित" नहीं माना जाए।
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