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खादी ग्रामोद्योग संघ की संपत्ति में भ्रष्टाचार की होगी जांच, मुजफ्फरपुर के प्रमंडलीय आयुक्त ने दिए आदेश

Published: Fri, 09 Oct 2026 06:46 AM (GMT+05:30)

Bihar Khadi Gramodyog Corruption: मुजफ्फरपुर खादी ग्रामोद्योग संघ में अनियमितता और भ्रष्टाचार के मामले में प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ...और पढ़ें

प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह। फाइल फोटो

प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह। फाइल फोटो

जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Khadi Gramodyog: बिहार खादी ग्रामोद्योग संघ में अनियिमितता और भ्रष्टाचार के मामले में प्रमंडलीय आयुक्त गिरिवर दयाल सिंह ने कड़ा संज्ञान लिया है।

आयुक्त ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच का आदेश एसडीओ पूर्वी और मुशहरी के अंचलाधिकारी को दिया है। दोनों अधिकारियों को 12 अक्टूबर तक जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

अवैध निर्माण को लेकर सवाल

बिना वैध बोर्ड के अवैध निर्माण बिहार खादी ग्रामोद्योग की जमीन पर हो रहे अवैध निर्माण को लेकर पूर्व में खादी और ग्रामोद्योग आयोग ने भी सवाल उठाया था।

आयोग के अनुसार वर्तमान में बिहार खादी ग्रामोद्योग का कोई वैध नियामक मंडल (बोर्ड) अस्तित्व में नहीं है। इसके बावजूद जमीन पर विवाह भवन और व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स बनाए जा रहे हैं।

निर्माण पर रोक की मांग

निजी स्कूल और मैरिज हॉल पर सवाल मुशहरी के मुक्तेश्वर प्रसाद सिंह ने आयुक्त को आवेदन देकर खादी संघ की जमीन पर अवैध सेलिब्रेशन हॉल और मैरिज हॉल के निर्माण पर रोक लगाने की मांग की थी।

आवेदन में परिसर के भीतर एक निजी स्कूल के अवैध संचालन का भी आरोप लगाया गया था। इन्हीं शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की गई है।

बिना नक्शा चल रहा निर्माण कार्य पूर्व में नगर निगम अमीन की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि खादी संघ की जमीन पर बिना पास नक्शे के निर्माण कार्य चल रहा है।

गोदाम का निर्माण

यहां लगभग 24 दुकानों और 4600 वर्ग फीट में गोदाम का निर्माण किया जा रहा है। नगर निगम की ऑफलाइन व ऑनलाइन जांच में किसी भी निर्माण का स्वीकृत नक्शा नहीं पाया गया।

अवैध निर्माण पर चलेगा बुलडोजर प्रमंडलीय आयुक्त ने स्पष्ट किया कि खादी की जमीन पर केवल खादी से जुड़े कार्य ही किए जा सकते हैं।

उन्होंने कहा कि यदि जमीन पर व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स या अन्य गैर-कानूनी निर्माण पाए गए, तो उन्हें ध्वस्त कराया जाएगा। इसके साथ ही यह भी पता लगाया जाएगा कि इस निर्माण के लिए किसने सहमति दी थी।

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