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Success Story: तीसरे प्रयास में राजू ने क्रैक किया NEET, मुजफ्फरपुर के किसान का बेटा SKMCH में पढ़ेगा MBBS

Published: Tue, 29 Sep 2026 06:00 AM (IST)

Bihar Neet ug Success Story: मुजफ्फरपुर के एक साधारण किसान के बेटे राजू कुमार ने आर्थिक चुनौतियों और शुरुआती असफलताओं ...और पढ़ें

राजू कुमार(बाएं) अपने पिता हरिचंद्र राय के साथ काउंसिलिंग के लिए पहुंचे थे।

राजू कुमार(बाएं) अपने पिता हरिचंद्र राय के साथ काउंसिलिंग के लिए पहुंचे थे।

HighLights

  1. किसान के बेटे राजू ने तीसरे प्रयास में NEET परीक्षा पास की।

  2. आर्थिक अभावों के बावजूद पिता के अटूट समर्थन से सपना साकार।

  3. मुजफ्फरपुर के SKMCH में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए चयन हुआ।

केशव कुमार, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Farmer Son Neet Success Story: साफ लेकिन बिना आइरन का सफेद कुर्ता, गले में लिपटा गमछा और आंखों पर मोटा चश्मा।

सोमवार को जब एक अधेड़ पिता श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय (SKMCH)की काउंसलिंग बिल्डिंग की सीढ़ियां चढ़ रहे थे तो उनका सीना गर्व से चौड़ा था।

आंखों के कोरों में खुशी के आंसू चमक रहे थे। यह कहानी है औराई प्रखंड के बेदौल गांव निवासी साधारण किसान हरिचंद्र राय और उनके सबसे छोटे बेटे राजू कुमार की, जिसने अभावों की बेड़ियों को तोड़कर डॉक्टर बनने का सपना साकार कर दिखाया है।

पिता बने सबसे बड़ी ढाल

हरिचंद्र राय के पास जीविकोपार्जन का एकमात्र साधन महज चार एकड़ कृषि योग्य भूमि है। इसी छोटी सी खेती के बल पर उन्होंने चार बेटियों और दो बेटों समेत आठ सदस्यों के बड़े परिवार का पेट पाला। घर के बड़े बेटे ने परिवार का हाथ बंटाने के लिए पढ़ाई के बाद एक निजी कंपनी में नौकरी पकड़ ली।

घर में सबसे छोटे राजू का मन हमेशा पढ़ाई में लगता था। परिवार पर आर्थिक तंगी का भारी बोझ होने के बावजूद पिता ने कभी राजू के हौसले को टूटने नहीं दिया।

विफलता से न टूटने का मिला पाठ

गांव के स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही राजू के मन में डॉक्टर बनने की अलख जगी थी। संत प्रेम भिक्षु महाविद्यालय से मैट्रिक और इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी से पास करने के बाद राजू ने नीट की तैयारी के लिए कोटा जाने की जिद की।

पिता ने खेतों में दिन-रात पसीना बहाकर बेटे को कोटा भेजा, लेकिन शुरुआती दो प्रयासों में राजू को असफलता का सामना करना पड़ा। दो बार की नाकामी से राजू पर दबाव बढ़ा, लेकिन पिता चट्टान की तरह उसके पीछे खड़े रहे और हौसला बढ़ाते रहे।

तीसरे प्रयास में रचा इतिहास

आर्थिक तंगी के कारण राजू कोटा से वापस गांव लौट आए, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। घर पर रहकर ही उन्होंने पूरी लगन के साथ ऑनलाइन माध्यम से अपनी तैयारी दोगुनी रफ्तार से शुरू की। अपनी मेहनत और परिवार के अटूट विश्वास के दम पर राजू ने तीसरे प्रयास में नीट परीक्षा क्रैक कर ली।

सेकंड राउंड की काउंसलिंग के तहत राजू का चयन श्रीकृष्ण चिकित्सा महाविद्यालय (SKMCH) में एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए हो गया।

काउंसलिंग प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब पिता हरिचंद्र राय हॉल की कुर्सी पर बैठे, तो उनके चेहरे पर अपने बेटे की इस ऐतिहासिक सफलता का सुकून और गर्व साफ झलक रहा था।

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