Muzaffarpur News: जेपी के सबसे करीबी जगन्नाथ पांडे नहीं रहे, नक्सल प्रभावित इलाकों में जगाई थी बदलाव की अलख
लोकनायक जयप्रकाश नारायण के करीबी सहयोगी और वरिष्ठ सर्वोदय नेता जगन्नाथ पांडे का निधन हो गया है। उन्होंने मुशहरी में ...और पढ़ें

जगन्नाथ पांडे की फाइल फोटो।
HighLights
जेपी के करीबी सहयोगी और वरिष्ठ सर्वोदय नेता थे।
मुशहरी में 117 ग्राम सभाओं की स्थापना में योगदान दिया।
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अहिंसा का संदेश फैलाया।
अमरेन्द्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। जब मुशहरी में नक्सलवाद का खौफ था, गोलियों की गूंज और धमकियों के बीच लोग सहमे रहते थे, तब एक शख्स अहिंसा, ग्राम स्वराज और सामाजिक बदलाव की अलख जगा रहा था।
लोकनायक जयप्रकाश नारायण के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले वरिष्ठ सर्वोदय नेता जगन्नाथ पांडे उन्हीं लोगों में शामिल थे। जेपी के मुशहरी अभियान को गांव-गांव तक पहुंचाने और 117 ग्राम सभाओं की स्थापना में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। उनके निधन से मुजफ्फरपुर के सर्वोदय परिवार और सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है।
जेपी के सबसे करीबी सहयोगियों में थे शामिल
जगन्नाथ पांडे जिला सर्वोदय मंडल के अध्यक्ष और लोकनायक जयप्रकाश नारायण द्वारा स्थापित मुजफ्फरपुर विकास मंडल के अध्यक्ष रहे। गांधीवादी कार्यकर्ता संजीव साहू के अनुसार, जब जेपी पहली बार मुजफ्फरपुर आए थे, तब जंक्शन पर उनका स्वागत करने वाली टीम में जगन्नाथ पांडे भी शामिल थे। वे ही जेपी को स्वतंत्रता सेनानी ध्वजा प्रसाद साहू के आवास तक लेकर गए थे। मुजफ्फरपुर प्रवास के दौरान वे लगातार उनके साथ रहे।
117 ग्राम सभाओं की स्थापना में योगदान
मुशहरी में जेपी के अभियान को सफल बनाने में जगन्नाथ पांडे की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही। जेपी ने यहां करीब 10 महीने तक रहकर ग्राम स्वराज और सामाजिक बदलाव का संदेश दिया।
इस दौरान लगभग 117 ग्राम सभाओं की स्थापना कराई गई। मादापुर चौबे ग्राम सभा भी उनकी परिकल्पना का परिणाम है, जो आज भी सक्रिय है।
नक्सलवाद के खौफ के बीच अहिंसा की अलख
1965-66 के दौरान मुशहरी में नक्सली आंदोलन चरम पर था। जेपी हृदय परिवर्तन और अहिंसा का संदेश लेकर यहां पहुंचे थे। मई 1970 में उन्हें सूचना मिली कि दो सर्वोदय कार्यकर्ता बद्री नारायण सिंह और गोपालजी मिश्र को नक्सलियों ने हत्या की धमकी दी है। कुछ समय बाद गोपालजी को गोली मार दी गई। इससे व्यथित होकर जेपी 5 जून 1970 को मुजफ्फरपुर पहुंचे और सलहा मध्य विद्यालय को अपना कार्यस्थल बनाया।
धमकियों के बाद भी नहीं डिगे जेपी
जेपी के आने के बाद नक्सलियों ने पर्चे गिराकर धमकी दी। इसी दौरान जमालाबाद में बेचू राय और बाद में मुखिया राजदेव शाही की हत्या कर दी गई। इसके बावजूद जेपी ने अपना अभियान जारी रखा।
उन्होंने रोजगार, स्वास्थ्य और शिक्षा को लेकर काम किया। वर्ष 1971 में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए एक नक्सली की बेटी की शादी के लिए आर्थिक मदद भी की। इससे नक्सलियों के बीच सकारात्मक संदेश गया और कई युवा नक्सलवाद छोड़कर सर्वोदय आंदोलन से जुड़ गए।
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दी श्रद्धांजलि
जगन्नाथ पांडे के निधन पर मंडलेश्वर तिवारी, सुरेंद्र कुमार, संजीव साहू, सौरभ कुमार, अरविंद कुमार और पूर्व जिला पार्षद मुक्तेश्वर सिंह समेत कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शोक जताया और श्रद्धांजलि अर्पित की।
यह भी पढ़ें- मुजफ्फरपुर में DM-SSP का आदेश बेअसर, पहले चोरी-छिपे अब खुलेआम खुलीं पटाखे की दुकानें
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।