दीपावली पर स्वाति नक्षत्र और आयुष्मान योग का अद्भुत संयोग, सिंह लग्न की पूजा से बरसेगी मां लक्ष्मी की कृपा
Deepawali 2026 Lakshmi Puja: दीपावली का महापर्व स्वाति नक्षत्र और आयुष्मान योग के अद्भुत संयोग में मनाया जाएगा। स्थिर लग्न ...और पढ़ें

स्वाति नक्षत्र और आयुष्मान योग के विशेष संयोग में मां लक्ष्मी और गणेश जी का पूजन होगा।
गोपाल तिवारी, मुजफ्फरपुर। Diwali Puja Subh Muhurat: ग्रहों के अद्भुत संयोग में 8 नवंबर रविवार को दीपावली का महापर्व मनाया जाएगा।
कार्तिक अमावस्या तिथि रविवार को दिन में 10:50 बजे से शुरू होकर सोमवार दिन में 11:20 बजे तक रहेगी। इस दिन स्वाति नक्षत्र और आयुष्मान योग के विशेष संयोग में मां लक्ष्मी और गणेश जी का पूजन होगा।
स्थिर लग्न में लक्ष्मी पूजन
पंडित प्रभात मिश्र के अनुसार स्थिर लग्न में महालक्ष्मी का पूजन करने से घर में धन की स्थिरता बनी रहती है।
पूजा के लिए कुंभ लग्न दिन में 1:12 से 2:53 और वृष लग्न शाम 5:58 से 7:54 बजे तक रहेगा। मध्य रात्रि 12:05 से 2:19 बजे तक सिंह लग्न का विशेष मुहूर्त रहेगा।

सिंह लग्न का विशेष महत्व
अमावस्या की घनी रात्रि में सिंह लग्न का मिलना महालक्ष्मी पूजन के लिए सोने पर सुहागा माना जाता है। इस दौरान लक्ष्मी-गणेश के साथ इंद्र, सरस्वती, कुबेर और मां काली की पूजा से मांगलिक कार्यों की सिद्धि होती है। भक्त अपनी राशि और ग्रहों की अनुकूलता के अनुसार सुख-समृद्धि के लिए अर्चना करेंगे।
श्रीयंत्र स्थापना का फलदायी विधान
दीपावली के दिन स्फटिक या पारद श्रीयंत्र की स्थापना और षोडशोपचार पूजन अत्यंत लाभकारी होता है। केसरयुक्त गोदुग्ध से श्रीयंत्र का अभिषेक करते हुए श्रीमंत्र का जाप करना चाहिए। जिस घर या प्रतिष्ठान में श्रीयंत्र का नित्य पूजन होता है, वहां कभी धन का अभाव नहीं रहता।
पूजा की सरल तैयारी विधि
पूजा के लिए चौकी को गंगाजल से पवित्र कर लक्ष्मी-गणेश, कुबेर और श्रीयंत्र स्थापित करें। तांबे या मिट्टी के कलश पर स्वास्तिक बनाकर आम के पल्लव, सुपारी, सिक्का और नारियल रखें। मां लक्ष्मी को धान का लावा, बताशा, मेवा, मिष्ठान और प्रिय कमल का फूल या कमलगट्टा अर्पित करें।
अयोध्या वापसी की पावन स्मृति
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीराम रावण वध के बाद जब अयोध्या लौटे थे, तब नगरवासियों ने दीप जलाकर स्वागत किया था।
तभी से इस पर्व को असत्य पर सत्य की जीत के रूप में मनाया जाता है। दीपावली की रात तिजोरी, गल्ले और बहीखातों की पूजा से व्यापार में संपन्नता आती है।
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