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त्योहार से पहले बिहार में 5 दिन बंद रहेंगे बैंक, 28-30 सितंबर तक हड़ताल; कैश-चेक समेत ये काम प्रभावित

Published: Wed, 16 Sep 2026 01:55 AM (IST)

त्योहारों से पहले मुजफ्फरपुर में बैंक लगातार पांच दिनों तक बंद रहेंगे, जिससे ग्राहकों और व्यापारियों को परेशानी होगी। यह ...और पढ़ें

एआई जेनेरेटेड इमेज।

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HighLights

  1. मुजफ्फरपुर में 26 से 30 सितंबर तक बैंक बंद रहेंगे।

  2. चौथा शनिवार, रविवार और तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल कारण है।

  3. त्योहारों से पहले बैंकिंग सेवाओं पर बड़ा असर पड़ेगा।

गोपाल तिवारी, मुजफ्फरपुर। त्योहारों से पहले खरीदारी और कारोबार के लिए पैसे की जरूरत बढ़ने वाली है, लेकिन इसी बीच बैंक पांच दिनों के लिए ग्राहकों से दूर हो जाएंगे। 26 से 30 सितंबर तक बैंक शाखाओं में कामकाज नहीं होगा।

26 सितंबर को चौथा शनिवार और 27 को रविवार की छुट्टी है। इसके बाद 28, 29 और 30 सितंबर को यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के आह्वान पर तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी हड़ताल होगी। यानी लगातार पांच दिन शाखाओं पर ताला रहेगा। ऐसे में त्योहार से पहले खरीदारी करने वाले आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक की परेशानी बढ़ सकती है।

मुजफ्फरपुर में बैंकिंग कारोबार का आकार भी छोटा नहीं है। आरबीआइ के आंकड़ों पर आधारित उपलब्ध जिला स्तर के आंकड़ों के अनुसार जिले में करीब 202 बैंक हैं। बैंकों में जमा राशि करीब 10,363 करोड़ और बैंक ऋण करीब 5,272 करोड़ है।

ऐसे में पांच दिन शाखा आधारित बैंकिंग प्रभावित होने का असर सिर्फ ग्राहकों की कतार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बाजार में भुगतान, व्यापारिक लेनदेन, चेक क्लियरेंस और ऋण से जुड़े काम भी प्रभावित हो सकते हैं।

पांच दिन बैंक बंद, बाजार में पैसे के लेनदेन पर ब्रेक

लगातार छुट्टी और हड़ताल के कारण नकदी जमा-निकासी, चेक से जुड़े काम, पासबुक अपडेट, केवाईसी, ड्राफ्ट, ऋण संबंधी प्रक्रिया और अन्य शाखा आधारित सेवाएं अटकेंगी।

खासकर छोटे कारोबारी, थोक विक्रेता, दुकानदार और ऐसे ग्राहक जिन्हें बैंक शाखा जाकर काम कराना जरूरी है, उन्हें अतिरिक्त इंतजार करना पड़ सकता है। हाल की बैंक हड़ताल में भी शाखा आधारित नकदी और चेक संबंधी सेवाएं प्रभावित हुई थीं, जबकि यूपीआइ, मोबाइल और इंटरनेट बैंकिंग जैसी डिजिटल सेवाएं सामान्य रूप से चलती रहीं।

त्योहारी सीजन में बाजार में खरीदारी बढ़ने के साथ कारोबारियों को रोजाना भुगतान और नकदी की जरूरत होती है। लगातार पांच दिन शाखा बंद रहने से कई भुगतान आगे खिसक सकते हैं।

चेक क्लियरेंस में देरी होने से कारोबारियों की कार्यशील पूंजी भी प्रभावित होने की आशंका है। एटीएम और डिजिटल सेवाएं विकल्प जरूर रहेंगी, लेकिन लंबी बैंक बंदी में नकदी की मांग बढ़ने से एटीएम पर भी दबाव बढ़ सकता है।

दो साल से पांच दिवसीय बैंकिंग का मामला अटका

यूनाइटेड फोरम आफ बैंक यूनियन के संयोजक मनोरंजनम और उप संयोजक पंकज ठाकुर ने कहा कि 12वें द्विपक्षीय समझौते के तहत प्रतिदिन 40 मिनट कार्य अवधि बढ़ाकर पांच दिवसीय बैंकिंग लागू करने पर आरबीआइ की सहमति के बावजूद केंद्र सरकार के स्तर पर मामला पिछले दो वर्षों से लंबित है।

बैंककर्मी शनिवार और रविवार को नियमित अवकाश घोषित करने की मांग कर रहे हैं। हाल में भी इसी मांग को लेकर देशभर में बैंक कर्मचारियों ने हड़ताल की थी।

अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी

फोरम नेताओं ने वित्त मंत्रालय की पीएलआइ नीति को लेकर भी नाराजगी जताई। उनका कहना है कि स्केल-चार और उससे ऊपर के अधिकारियों को 365 दिनों तक के मूल वेतन के बराबर पीएलआइ दिया जा रहा है, जबकि स्केल-थ्री तक के अन्य कर्मियों को मात्र 15 दिनों का पीएलआइ मिल रहा है। इसे कर्मचारियों के मनोबल के विपरीत बताते हुए इसमें बदलाव की मांग की गई है।

बैंक यूनियनों ने चेतावनी दी है कि मांगें नहीं मानी गईं तो 28, 29 और 30 सितंबर की हड़ताल के बाद 26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जाएगी। ऐसे में सितंबर के पांच दिन की बंदी के बाद अक्टूबर में भी बैंकिंग व्यवस्था पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।

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