Bihar News : किसानों के अनाज का पहरेदार बनेगा AI, खराब होने से पहले मोबाइल पर मिलेगी चेतावनी
AI Grain Storage : डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा ने एआई, आईओटी और स्मार्ट सेंसर आधारित एक नई ...और पढ़ें

Farmers Technology : एग्रो प्रोसेसिंग रिसर्च शेड का निरीक्षण करते विज्ञानी। सौ.विश्वविद्यालय
HighLights
पूसा कृषि विश्वविद्यालय ने एआई-आईओटी आधारित भंडारण तकनीक विकसित की।
यह तकनीक अनाज खराब होने से पहले मोबाइल पर चेतावनी देगी।
छोटे डिब्बे से बड़े गोदाम तक अनाज सुरक्षित रहेगा।
अमरेंद्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। Farmers Mobile Alert : खेती-किसानी में मशीनों के इस्तेमाल के बाद अब अनाज के सुरक्षित भंडारण में भी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद ली जाएगी।
डा. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा के विज्ञानियों ने एआई, इंटरनेट आफ थिंग्स (आइओटी) व स्मार्ट सेंसर आधारित ऐसी तकनीक विकसित की है, जो गोदाम के अंदर के वातावरण की लगातार निगरानी करेगी।
अनाज खराब होने, नमी बढ़ने या कीड़ा लगने जैसी स्थिति बनने से पहले ही गोदाम प्रभारी और किसान के मोबाइल पर चेतावनी पहुंच जाएगी।
कुलपति डा.पीएस पांडेय के मार्गदर्शन में विज्ञानियों की बहुविषयक टीम ने इस तकनीक का विकास किया है। कृषि अभियंत्रण एवं प्रौद्योगिकी महाविद्यालय के अधिष्ठाता डा.आर.सुब्बैया के नेतृत्व में एसोसिएट विज्ञानी डा.विशाल कुमार, प्राध्यापक डा.संजय कुमार पटेल, सहायक प्राध्यापक डा. दिव्यांशु सक्सेना व डा.अभिषेक युगल ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिछले दो वर्षों से चल रहे शोध के दौरान गेहूं के भंडारण पर इसका सफल परीक्षण किया गया है। अब इसके विस्तार की तैयारी है।
10 किलो के डिब्बे से बड़े सरकारी गोदाम तक कारगर
विज्ञानियों के अनुसार यह तकनीक घर में रखे करीब 10 किलो के अनाज के डिब्बे से लेकर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआइ) व राज्य के बड़े सरकारी गोदामों तक में उपयोग की जा सकती है।
गोदाम के अलग-अलग हिस्सों में स्मार्ट सेंसर लगाए जाएंगे। ये सेंसर तापमान, सापेक्ष आर्द्रता व कार्बन डाइआक्साइड समेत अन्य महत्वपूर्ण मानकों की 24 घंटे निगरानी करेंगे।
सेंसर से प्राप्त आंकड़े वाई-फाई से मोबाइल एप पर भेजे जाएंगे। जरूरत पड़ने पर छोटे स्वचालित वेंटिलेशन उपकरण भी लगाए जा सकेंगे, जो स्थिति बिगड़ने पर स्वत: सक्रिय हो जाएंगे।
हेंडरसन माडल से तय होगी सुरक्षित नमी
तापमान व सापेक्ष आर्द्रता के आधार पर संतुलन नमी की मात्रा का आकलन स्थापित हेंडरसन माडल से किया जाएगा। एआइ प्रणाली तापमान, आर्द्रता, कार्बन डाइआक्साइड व संतुलन नमी के आंकड़ों का विश्लेषण कर अनाज की भंडारण स्थिति और संभावित गुणवत्ता ह्रास का अनुमान लगाएगी।
निर्धारित सुरक्षित सीमा पार होने पर मोबाइल पर तत्काल अलर्ट मिलेगा। इससे समय रहते कार्रवाई कर अनाज को खराब होने से बचाया जा सकेगा।
पुराने गोदामों में भी आसानी से लगेगी
तकनीक को पोर्टेबल बनाया जा रहा है ताकि दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों में बने पुराने व पारंपरिक गोदामों में भी इसे लगाया जा सके। विश्वविद्यालय की ओर से किसानों, गोदाम संचालकों और तकनीकी कर्मियों को प्रशिक्षण देने की भी तैयारी है।
विज्ञानियों के अनुसार समय रहते जोखिम की पहचान होने से भंडारण के दौरान होने वाले खाद्यान्न नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
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