57 करोड़ का प्रस्ताव अटका, मुंगेर-जमुई एनएच-333 पर गड्ढों से जूझ रहे राहगीर, आखिर कब सुधरेगी सड़क की हालत
मुंगेर-जमुई को जोड़ने वाले NH-333 पर गहरे गड्ढों के कारण राहगीर दुर्घटनाओं का सामना कर रहे हैं, खासकर बरियारपुर से सोतीपुल तक का 2 किमी हिस्सा बेहद खराब है।

जमुई मार्ग पर एनएच-333 की बदहाल स्थिति और गड्ढों।
HighLights
NH-333 पर गहरे गड्ढों से दुर्घटनाओं का खतरा।
57 करोड़ का मरम्मत प्रस्ताव राशि के अभाव में अटका।
बरियारपुर से सोतीपुल तक 2 किमी सड़क बदहाल।
संवाद सहयोगी, जागरण, मुंगेर। सड़क पर गहरे गड्ढे हैं, गड्ढों में भरा पानी और उन्हीं के बीच से अपनी जान जोखिम में डालकर गुजरती जिंदगी। कहीं वाहन हिचकोले खा रहे हैं तो कहीं गड्ढों में फंसते भारी ट्रकों के कारण लंबा जाम लग रहा है।
यह किसी दूरदराज के ग्रामीण संपर्क पथ की तस्वीर नहीं, बल्कि मुंगेर को जमुई जिला से सीधे जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-333 (NH-333) का वीभत्स हाल है। बरियारपुर से सोतीपुल के आगे फोरलेन तक करीब दो किलोमीटर के हिस्से में सड़क पर गड्ढों का ऐसा जाल बिछा है कि वाहन चालकों को हर कदम पर दुर्घटना का गंभीर खतरा उठाना पड़ रहा है।
विडंबना यह है कि इस सड़क की बदहाली दूर करने के लिए प्राक्कलन तो तैयार किए जा चुके हैं और फाइलें भी भेजी गई हैं, लेकिन राशि आवंटन के अभाव में मरम्मत की गाड़ी आगे नहीं बढ़ पा रही है। नतीजा यह है कि प्रतिदिन 600 से अधिक छोटे-बड़े वाहन इस जर्जर सड़क से गुजरने को विवश हैं।
दो किलोमीटर की बदहाली बना बड़ा नासूर
बरियारपुर से सोतीपुल के आगे फोरलेन तक का करीब दो किलोमीटर का दायरा इस समय सबसे अधिक दयनीय और खतरनाक स्थिति में है। बड़े-बड़े और गहरे गड्ढों के कारण चौबीसों घंटे वाहनों की रफ्तार पूरी तरह थम जाती है। भारी ट्रकों और ओवरलोडेड वाहनों के अत्यधिक दबाव तथा बारिश के मौसम में इस सड़क की हालत और भी भयावह हो जाती है।
जरा सी बारिश होते ही गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे चालकों को गड्ढों की गहराई का सही अंदाजा नहीं मिल पाता और गाड़ियां दुर्घटनाग्रस्त हो जाती हैं। राहगीर और स्थानीय लोग आए दिन इन हादसों का शिकार बन रहे हैं, जिससे इस मार्ग पर सफर करना किसी आफत से कम नहीं रह गया है।
57 करोड़ का प्राक्कलन तैयार, मंजूरी का इंतजार
मुंगेर से जमुई तक राष्ट्रीय राजमार्ग-333 के कुल 87 किलोमीटर हिस्से को मोटरेबल और मजबूत बनाने के लिए एनएच कार्यालय द्वारा शॉर्ट टर्म मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (STMC) के तहत विस्तृत योजना बनाई गई है। इसके लिए तीन चरणों में कुल 57 करोड़ रुपये का प्राक्कलन तैयार कर सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय को भेजा गया है।
पहले चरण में मुंगेर जिले के बरियारपुर से गंगटा (0 से 28.34 किमी) तक की सड़क शामिल है। दूसरे चरण में जमुई जिले के कोहरवा से कटौना (38.84 से 59 किमी) और तीसरे चरण में बनधुलिया से बान्दा (75.25 से 114 किमी) तक का हिस्सा शामिल है। हालांकि, करीब दो महीने पहले भेजे गए इस महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर अब तक राशि का आवंटन नहीं हो सका है, जिससे पूरी योजना अधर में लटकी हुई है।
मेंटेनेंस अवधि खत्म होने से बढ़ी मुश्किलें
इस सड़क की अंतिम बार बड़ी मरम्मत वर्ष 2019 में कराई गई थी। नियम के अनुसार संवेदक को पांच वर्षों तक इसका रखरखाव करना था, जिसकी मेंटेनेंस अवधि और डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड मई 2026 में पूरी तरह समाप्त हो चुका है। इसके बाद नई व्यवस्था के तहत ही सड़क का सुदृढ़ीकरण संभव था।
दूसरी तरफ, अगस्त माह में अत्यधिक वर्षा के बाद सोतीपुल के समीप जब बड़े गड्ढों में ट्रक फंसने से भीषण जाम लगा था, तब प्रशासन के निर्देश पर संवेदक से दबाव बनाकर आपातकालीन मेटल भरवाया गया था।
इसके लिए महज सात लाख रुपये का प्राक्कलन बनाकर विभाग को भेजा गया, लेकिन इस छोटी सी राशि का भुगतान भी आज तक अटका हुआ है। बकाए भुगतान के चलते अब संवेदक भी सड़क को दोबारा चलने योग्य बनाने में कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं।
रोजाना 600 से अधिक वाहनों की आवाजाही
मुंगेर और जमुई के बीच यह सड़क व्यापारिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। हर दिन इस मार्ग से 600 से अधिक छोटे-बड़े वाहन, यात्री बसें और मालवाहक ट्रक गुजरते हैं।
इसके बावजूद प्रशासनिक सुस्ती और फंड आवंटन में हो रही देरी के कारण आम जनता को खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। कार्यपालक अभियंता साकेत कुमार रोशन का कहना है कि बरियारपुर से सोतीपुल के 2 किमी हिस्से के लिए अलग से 5 करोड़ और समूचे 87 किमी के लिए 57 करोड़ का प्राक्कलन भेजा जा चुका है। जैसे ही केंद्र सरकार से वित्तीय स्वीकृति और राशि आवंटन की हरी झंडी मिलेगी, तुरंत मरम्मत कार्य शुरू करा दिया जाएगा।
"बरियारपुर से सोतीपुल के आगे फोरलेन तक 2 किलोमीटर एनएच-333 की मरम्मत के लिए पांच करोड़ का प्राक्कलन बनाकर भेजा गया है। इसके अलावा समूचे एनएच-333 के 87 किलोमीटर के एसटीएमसी वर्क के लिए 57 करोड़ का प्राक्कलन बनाकर विभाग को प्रस्ताव भेजा गया है। आवंटन मिलने पर एनएच-333 का मरम्मत कराया जाएगा।"
