मुंगेर में 16 वर्ष बाद फिर शुरू होगा पत्थर उत्खनन, भीमबांध आश्रयणी से 5 स्टोन ब्लॉक बाहर; ₹20 करोड़ राजस्व व रोजगार
Munger Stone Mining Restart: मुंगेर में 16 साल बाद पारंपरिक पत्थर उत्खनन उद्योग फिर से शुरू होगा, जिससे सालाना 20 ...और पढ़ें

Munger Stone Mining Restart: भीमबांध सेंचुरी से बाहर हुए 5 स्टोन ब्लॉक, मुंगेर में लौटेगा पत्थर उद्योग
HighLights
16 साल बाद मुंगेर में पत्थर उत्खनन फिर शुरू होगा।
भीमबांध आश्रयणी से पांच स्टोन ब्लॉक बाहर किए गए।
सरकार को 20 करोड़ राजस्व, हजारों को रोजगार मिलेगा।
संवाद सूत्र, मुंगेर। Munger Stone Mining Restart: मुंगेर जिले में पिछले 16 वर्षों से ठप पड़ा पारंपरिक पत्थर उत्खनन उद्योग एक बार फिर गुलजार होने जा रहा है। वन एवं पर्यावरण विभाग की आपत्तियों के कारण वर्ष 2010 से बंद पड़े इस उद्योग को पुनर्जीवित करने की प्रशासनिक और विभागीय कवायद रंग लाई है।
खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव और मुंगेर जिला प्रशासन की संयुक्त पहल के बाद वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने भीमबांध वन्य जीव आश्रयणी (वाइल्डलाइफ सेंचुरी) क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले पांच स्टोन ब्लॉकों को सेंचुरी के दायरे से आधिकारिक रूप से बाहर कर दिया है।
वन विभाग द्वारा पांच स्टोन ब्लॉकों के कुल 20 हेक्टेयर पहाड़ी भूभाग को वन क्षेत्र से विमुक्त कर दिया गया है। इसकी आधिकारिक सूचना जिला खनन कार्यालय द्वारा खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव को भेज दी गई है। इस निर्णय के बाद जिला खनन कार्यालय अब जिला सर्वेक्षण प्रतिवेदन (डीएसआर) तैयार कर रहा है, जिसके बाद जनवरी तक खनन पट्टे की ई-नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
बंद पड़े 20 हेक्टेयर क्षेत्र में फिर से पत्थर उत्खनन शुरू होने से सरकार को सालाना 20 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होगा, साथ ही बंद पड़े दर्जनों क्रशर चालू होंगे और हजारों स्थानीय कामगारों को अपने ही जिले में रोजगार मिल सकेगा। गौरतलब है कि पत्थर उद्योग को दोबारा चालू कराने के लिए ‘दैनिक जागरण’ ने लगातार प्रमुखता से खबरें प्रकाशित कर अभियान चलाया था।
शंकरपुर व नौवागढ़ी सहित पांच ब्लॉक वन क्षेत्र से हुए मुक्त
मामले की जानकारी देते हुए जिला खनन पदाधिकारी (डीएमओ) गोपाल कुमार ने बताया कि वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने विस्तृत पुनर्सर्वेक्षण के बाद पांच स्टोन ब्लॉकों को संरक्षित वन क्षेत्र से बाहर करने की स्वीकृति दी है। इसमें शंकरपुर स्टोन ब्लॉक, बाकरपुर स्टोन ब्लॉक, सिकंदरपुर स्टोन ब्लॉक, शीतलपुर स्टोन ब्लॉक और नौवागढ़ी स्टोन ब्लॉक शामिल हैं।
खनन पदाधिकारी ने बताया कि इन पांचों ब्लॉकों के लिए वर्तमान में डीएसआर (डिस्ट्रिक्ट सर्वे रिपोर्ट) तैयार की जा रही है। रिपोर्ट को अंतिम रूप मिलते ही पारदर्शी नीलामी प्रक्रिया के जरिए पात्र एजेंसियों को खनन पट्टा आवंटित किया जाएगा।
आठ ब्लॉकों की थी अनुशंसा, जमालपुर की बाउंड्री रिवीजन का प्रस्ताव
खनन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, सोलह वर्ष पूर्व जिले के कुल आठ स्टोन ब्लॉकों में नियमित पत्थर उत्खनन होता था। इनमें जमालपुर, शंकरपुर, बाकरपुर, सिकंदरपुर, शीतलपुर, नौवागढ़ी, पाटम और पासिया ऋषिकुंड ब्लॉक शामिल थे। जिला प्रशासन की ओर से इन सभी आठों ब्लॉकों को वन सीमा से बाहर करने की अनुशंसा भेजी गई थी।
इनमें से फिलहाल पांच ब्लॉकों को पूर्ण अनापत्ति मिल गई है, जबकि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जमालपुर ब्लॉक को वन क्षेत्र से अलग करने के लिए वाइल्डलाइफ सेंचुरी की सीमा (बाउंड्री) को रिवाइज करने की तकनीकी अनुशंसा विभाग को भेजी गई है।
2010 में पर्यावरण नियमों के चलते बंद हो गया था उद्योग
उल्लेखनीय है कि पर्यावरण संरक्षण और वन संरक्षण अधिनियम की सख्ती का हवाला देते हुए वर्ष 2010 में वन क्षेत्र की परिधि में पड़ने वाली पहाड़ियों से पत्थर उत्खनन पर पूर्ण रोक लगा दी गई थी। इस रोक के बाद जिले में संचालित दर्जनों क्रशर प्लांट बंद हो गए और निर्माण सामग्री (गिट्टी/पत्थर) के लिए मुंगेर पूरी तरह बाहरी जिलों पर निर्भर हो गया।
सबसे बड़ा झटका स्थानीय अर्थव्यवस्था को लगा, जहां पत्थर खनन से जुड़े हजारों दैनिक मजदूरों की रोजी-रोटी छिन गई थी और वे पलायन को विवश हो गए थे। विगत दिनों खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव अवनीश कुमार सिंह ने मुंगेर दौरे के क्रम में डीएम को वन क्षेत्र का पुनर्सर्वेक्षण कराने का स्पष्ट निर्देश दिया था, जिसके बाद यह बड़ी कामयाबी मिली है।
"पूरे राज्य में बंद पड़े वैध पत्थर उद्योग को नियमों के तहत पुनः सक्रिय करने के लिए सरकार गंभीर और प्रयत्नशील है। मुंगेर के संदर्भ में जिला प्रशासन को तेजी से प्रक्रिया पूरी करने को कहा गया था। पांच स्टोन ब्लॉक बाहर हो चुके हैं। जमालपुर सहित अन्य शेष ब्लॉकों में भी खनन आरंभ कराने के लिए विभागीय स्तर पर आवश्यक औपचारिकताओं का निष्पादन किया जा रहा है।"
— अवनीश कुमार सिंह, सचिव, खान एवं भूतत्व विभाग, बिहार
"जिले में बंद पड़े पत्थर उद्योग को चालू कराने के लिए खान एवं भूतत्व विभाग के सचिव के निर्देशानुसार वन क्षेत्र का पुनर्सर्वेक्षण कराकर पांच स्टोन ब्लॉक को सेंचुरी क्षेत्र से बाहर कराया गया है। अब नियमानुसार डीएसआर बनाकर जनवरी माह तक खनन पट्टे की नीलामी प्रक्रिया आरंभ कर दी जाएगी। शेष बचे तीन ब्लॉकों की सीमा को रिवाइज कराने का प्रयास भी जारी है।"
— निखिल धनराज निपणणीकर, जिलाधिकारी, मुंगेर
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