मुंगेर में झींगा मछली का सफल उत्पादन, भागलपुर के बाद अब दार्जिलिंग तक पहुंची सप्लाई, किसानों को फायदा
मुंगेर के धरहरा प्रखंड में किसानों ने सरकारी सहयोग से वैज्ञानिक पद्धति से झींगा मछली का सफल उत्पादन किया है। ...और पढ़ें

तालाब में उत्पादित झींगा मछली दिखाते किसान और अवलोकन करते मत्स्य पदाधिकारी। सौजन्य : किसान
HighLights
मुंगेर में किसानों ने वैज्ञानिक विधि से झींगा मछली उगाई।
उत्पादित झींगा अब दार्जिलिंग के थोक बाजारों में बिक रहा।
मत्स्य विभाग के सहयोग से किसानों को मिला शानदार मुनाफा।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। आदिवासी बहुल धरहरा प्रखंड के मेहनती किसानों ने अपनी लगन और सरकारी सहयोग से नीली क्रांति की नई इबारत लिख दी है। प्रखंड के किसानों द्वारा तालाब में वैज्ञानिक पद्धति से तैयार की गई झींगा मछली अब भागलपुर के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध पर्यटक स्थल दार्जिलिंग के थोक बाजारों तक अपनी पहचान बना चुकी है।
अब तक क्षेत्र के लोग नदियों या बंगाल से आने वाली झींगा मछली पर निर्भर थे, लेकिन अब मुंगेर के तालाबों में उत्पादित ताजी और स्वादिष्ट झींगा का स्वाद लोग चख रहे हैं।
मत्स्य विभाग, मुंगेर के सहयोग से धरहरा प्रखंड के दो अग्रणी किसानों ने जिले में पहली बार झींगा मछली का व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया। दोनों किसानों ने मार्च 2026 में 0.5 एकड़ के तालाब से इसकी शुरुआत की थी।
विभाग की ओर से किसानों को 8,000 झींगा मछली के बीज (लार्वा), उच्च गुणवत्ता वाला दाना और आवश्यक दवाएं शत-प्रतिशत तकनीकी मार्गदर्शन के साथ उपलब्ध कराई गईं। विभागीय अधिकारियों की देखरेख में मात्र चार महीनों के भीतर 40 से 45 ग्राम वजन की झींगा मछली तैयार हो चुकी है।
दार्जिलिंग की मंडी में मिल रहा 800 प्रति किलो का थोक भाव
मछली उत्पादकों ने बताया कि पहली बार जब उन्होंने उत्पादित झींगा को भागलपुर के थोक बाजार में बेचा, तो उन्हें ₹600 प्रति किलोग्राम की दर से कीमत मिली। इससे उत्साहित होकर दूसरी बार वे अपनी उपज को दार्जिलिंग के बाजार ले गए। दार्जिलिंग की बड़ी मंडी में मुंगेर के झींगे को ₹800 प्रति किलोग्राम का शानदार रेट मिल रहा है। अधिक मुनाफा मिलने के कारण किसान अब अधिकांश माल दार्जिलिंग भेजने को ही प्राथमिकता दे रहे हैं।
120 दिनों में तैयार होती है 50 ग्राम की झींगा
धरहरा के भलार गांव निवासी किसान अशोक कुमार और महरना निवासी उषा देवी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि महज 120 दिनों के भीतर झींगा मछली 45 से 50 ग्राम तक की हो जाती है। दोनों किसान अब तक दो बार में कुल 300 किलोग्राम झींगा भागलपुर और दार्जिलिंग के बाजारों में बेचकर बेहतरीन आमदनी हासिल कर चुके हैं।
"पारंपरिक मत्स्य पालन से आगे बढ़कर किसानों को अधिक मुनाफा देने वाली व्यावसायिक प्रजातियों की ओर प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से धरहरा में झींगा पालन शुरू कराया गया है। सबसे पहले किसानों को वैज्ञानिक प्रशिक्षण दिया गया, फिर अनुदान पर लार्वा, दाना, बीज और दवाएं उपलब्ध कराई गईं। विभागीय स्तर पर लगातार तकनीकी निगरानी रखी जा रही है। मैंने खुद दो बार तालाब का स्थल निरीक्षण किया है। झींगा उत्पादन से किसान बेहद खुशहाल हैं और जिले के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं।"
