SSC परीक्षा में अतिरिक्त समय के लिए बड़ा फर्जीवाड़ा! मुंगेर के डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर से बने दिव्यांग सर्टिफिकेट
Munger SSC Disability Certificate Scam: मुंगेर में एसएससी परीक्षा में अतिरिक्त समय पाने के लिए 20 अभ्यर्थियों ने डॉक्टरों के ...और पढ़ें

Munger SSC Disability Certificate Scam: मुंगेर सदर अस्पताल के डॉक्टरों के फर्जी दस्तखत से बना दिव्यांग प्रमाणपत्र
HighLights
एसएससी परीक्षा में अतिरिक्त समय के लिए फर्जीवाड़ा उजागर।
मुंगेर के डॉक्टरों के जाली हस्ताक्षर से बने प्रमाणपत्र।
लगभग 20 अभ्यर्थियों ने फर्जी प्रमाणपत्रों का उपयोग किया।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। Munger SSC Disability Certificate Scam: प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित लाभ हासिल करने के लिए दिव्यांगता प्रमाणपत्रों में बड़े फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) की परीक्षा में अतिरिक्त समय पाने के लिए करीब 20 अभ्यर्थियों ने मुंगेर सदर अस्पताल के दिव्यांग मेडिकल बोर्ड में शामिल चिकित्सकों के जाली हस्ताक्षर कर प्रमाणपत्र तैयार कर लिए। इस खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग से लेकर परीक्षा आयोजित करने वाले आयोग और संबंधित नियुक्ति विभागों में हड़कंप मच गया है।
20 से 30 मिनट अतिरिक्त समय पाने के लिए रची गई साजिश
नियमों के मुताबिक दिव्यांग श्रेणी के अभ्यर्थियों को परीक्षा में प्रति घंटे के हिसाब से 20 से 30 मिनट का अतिरिक्त समय दिया जाता है। इसी रियायत का गैरकानूनी फायदा उठाने के लिए अभ्यर्थियों ने एक संगठित सिंडिकेट के जरिए मुंगेर सदर अस्पताल के मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षर और मुहर का इस्तेमाल किया। इन जाली प्रमाणपत्रों के आधार पर अभ्यर्थियों ने पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश के विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर एसएससी की परीक्षा दी।
सत्यापन के लिए अस्पताल आए दस्तावेज तो उड़े डॉक्टरों के होश
इस पूरे रैकेट की पोल तब खुली जब संबंधित परीक्षा केंद्रों और एसएससी के क्षेत्रीय कार्यालयों ने इन प्रमाणपत्रों की सत्यता जांचने के लिए इन्हें मुंगेर सदर अस्पताल भेजा। दस्तावेजों पर अपने नाम के आगे किए गए फर्जी हस्ताक्षर देखकर संबंधित चिकित्सक दंग रह गए।
मेडिकल बोर्ड के डॉक्टरों ने तत्काल पुष्टि की कि उन्होंने इन अभ्यर्थियों की कभी जांच नहीं की और न ही इन प्रमाणपत्रों पर उनके असली हस्ताक्षर हैं। चिकित्सकों ने बिना देर किए अपनी लिखित रिपोर्ट उच्चाधिकारियों और संबंधित विभागों को सौंप दी है।
सक्रिय सिंडिकेट की भूमिका, नौकरी पा चुके अभ्यर्थियों पर लटकी तलवार
अब इस जांच का सबसे गंभीर पहलू यह है कि इस सिंडिकेट के जरिए फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र लेकर कितने अभ्यर्थी विभिन्न सरकारी विभागों में अंतिम रूप से नौकरी हासिल कर चुके हैं।
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि यदि अंतिम चयन या नियुक्ति में फर्जी प्रमाणपत्र का इस्तेमाल साबित होता है, तो संबंधित अभ्यर्थियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के साथ ही उनकी सेवाएं तत्काल प्रभाव से रद्द कर दी जाएंगी।
प्रभारी उपाधीक्षक बोले- 20 मामले सामने आए, बढ़ सकता है दायरा
सदर अस्पताल, मुंगेर के प्रभारी उपाधीक्षक डॉ. रमन कुमार ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि एसएससी परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के प्रमाणपत्रों के सत्यापन के दौरान अब तक लगभग 20 मामलों में चिकित्सकों के हस्ताक्षर पूरी तरह फर्जी पाए गए हैं।
संबंधित डॉक्टरों की रिपोर्ट विभाग को भेज दी गई है। आगे की कानूनी व विभागीय कार्रवाई संबंधित परीक्षा और नियुक्ति विभागों द्वारा की जा रही है। जांच आगे बढ़ने पर ऐसे फर्जी प्रमाणपत्रों की संख्या और बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
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