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ऑक्सीजन पर मासूम... डॉक्टर ऑन कॉल! मुंगेर सदर अस्पताल में 7 वार्डों का जिम्मा एक डॉक्टर पर, रात की व्यवस्था बदहाल

Published: Tue, 06 Oct 2026 07:43 PM (IST)

मुंगेर सदर अस्पताल में रात के समय स्वास्थ्य व्यवस्था चरमराई हुई पाई गई, जहां गंभीर मरीज बिना डॉक्टर के और ...और पढ़ें

मुंगेर सदर अस्पताल के इमरजेंसी में मरीजो की भीड़ , जागरण

मुंगेर सदर अस्पताल के इमरजेंसी में मरीजो की भीड़ , जागरण

HighLights

  1. पीकू वार्ड में 4 वर्षीय बच्चा ऑक्सीजन पर, डॉक्टर अनुपस्थित।

  2. एसएनसीयू में 10 नवजात, 3 गंभीर, कोई डॉक्टर मौके पर नहीं।

  3. इमरजेंसी में एक डॉक्टर पर 7 वार्डों का भारी दबाव।

हैदर अली, मुंगेर। Munger Sadar Hospital Night Reality Check: मुंगेर के सदर अस्पताल में रात ढलते ही स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक मुस्तैदी के दावों की हवा निकल जाती है। दैनिक जागरण की विशेष पड़ताल ‘रात का रिपोर्टर’ के तहत सोमवार की रात जब टीम ने सदर अस्पताल का जायजा लिया, तो रात बढ़ने के साथ स्वास्थ्य व्यवस्था की परतें खुलती चली गईं।

रात के 10:30 बजे पीकू (PICU) वार्ड में सन्नाटे के बीच परहम निवासी मेहराज का 4 वर्षीय पुत्र मिहिर ऑक्सीजन के सहारे जिंदगी की जंग लड़ रहा था। परिजनों के अनुसार, सोमवार सुबह के बाद रात तक कोई डॉक्टर बच्चे को देखने नहीं पहुंचा।

Munger Sadar Hospital Night Healthcare Crisis Exposed (3)

मरीजों को दवा-सुई लगाने का पूरा काम प्रशिक्षु छात्रों (इन्टर्न) के भरोसे था और नर्सिंग स्टाफ आराम फरमाता दिखा। अस्पताल की यह तस्वीर बताती है कि रात के समय गंभीर मरीजों की सांसें यहां कितनी असुरक्षित और प्रशासनिक दावों से दूर हैं।

10 नवजात और 9 प्रसूताएं 'ऑन कॉल' डॉक्टर के भरोसे, इमरजेंसी में मची अफरा-तफरी

रात के 10:50 बजे एसएनसीयू (SNCU) वार्ड में 10 नवजात भर्ती थे, जिनमें हवेली खड़गपुर की गुंजन कुमारी व कल्पना देवी की बच्चियों समेत 3 नवजात अत्यंत गंभीर थे, लेकिन मौके पर कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था।

रात 11:30 बजे इमरजेंसी वार्ड पूरी तरह हाउसफुल था। सड़क हादसे में घायल शंकरपुर के शैलेश राज, रुचि कुमारी और मोहली महादेवपुर के सोनू कुमार व दीपक कुमार इलाज के लिए तड़प रहे थे।

Munger Sadar Hospital Night Healthcare Crisis Exposed (1)

इन तमाम घायलों के बीच ड्यूटी पर तैनात डॉ. रूपेश अकेले मोर्चा संभाले हुए थे। उन्होंने बताया कि उन पर इमरजेंसी के अलावा अस्पताल के 7 अन्य वार्डों की भी जिम्मेदारी है। वहीं, प्रसव वार्ड में भर्ती 9 प्रसूताओं का इलाज भी 'ऑन कॉल' व्यवस्था के सहारे चल रहा था।

मुंगेर सदर अस्पताल: 'रात का रिपोर्टर' रियलिटी चेक रिपोर्ट:

निरीक्षण समय एवं वार्ड विवरण भर्ती मरीजों की स्थिति एवं जमीनी हकीकत
10:30 PM - पीकू (PICU) वार्ड
मरीजों की स्थिति: 4 वर्ष का मासूम मिहिर (ऑक्सीजन पर भर्ती)।


व्यवस्था का हाल: सुबह के बाद रात तक कोई डॉक्टर नहीं पहुंचे, प्रशिक्षु छात्र (इन्टर्न) ही लगा रहे थे दवा और सुई।
10:50 PM - एसएनसीयू (SNCU) वार्ड
मरीजों की स्थिति: 10 नवजात भर्ती (जिनमें 3 की हालत अत्यंत गंभीर)।


व्यवस्था का हाल: डॉक्टर मौके पर अनुपस्थित, केवल बेहद गंभीर स्थिति होने पर ही 'ऑन कॉल' फोन कर बुलाने की मजबूरी।
11:30 PM - इमरजेंसी वार्ड
मरीजों की स्थिति: सड़क हादसे में घायल 4-5 गंभीर मरीज पहुंचे।


व्यवस्था का हाल: ड्यूटी पर तैनात अकेले 1 डॉक्टर (डॉ. रूपेश) पर इमरजेंसी समेत अस्पताल के 7 अन्य वार्डों का भारी दबाव।
12:20 AM - प्रसव व अन्य वार्ड
मरीजों की स्थिति: 9 प्रसूताएं और कई अन्य मरीज भर्ती।


व्यवस्था का हाल: प्रसव वार्ड 'ऑन कॉल' डॉक्टर के भरोसे, जबकि पुरुष एवं महिला वार्ड में प्रशिक्षु छात्र ही तैनात दिखे।

Munger Sadar Hospital Night Healthcare Crisis Exposed (2)

सिविल सर्जन ने मानी व्यवस्था की खामी, नए सिरे से रोस्टर तैयार करने का निर्देश

अस्पताल से बाहर निकलते समय मरीजों के स्वजन विनोद कुमार सिन्हा और लक्ष्मण कुमार ने भी रात के समय चरमराई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए। मामला सामने आने के बाद मुंगेर के सिविल सर्जन डॉ. राजू ने व्यवस्था में खामी को स्वीकार किया।

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"सोमवार की रात डॉक्टरों की कमी के कारण एक ही डॉक्टर को पूरी ड्यूटी पर लगाया गया, जो कि सरासर गलत है। आगे से ड्यूटी रोस्टर में बदलाव किया जा रहा है। अब पीकू (PICU), एसएनसीयू (SNCU), प्रसव वार्ड और इमरजेंसी के लिए अलग-अलग डॉक्टरों की तैनाती रहेगी, ताकि रात में किसी भी मरीज को परेशानी न झेलनी पड़े।"

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— डॉ. राजू, सिविल सर्जन, मुंगेर