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अस्पताल के बाहर ई-रिक्शा ही बन गया लेबर रूम! मुंगेर में डॉक्टर ने कराई डिलीवरी, एक महीने में 3 बार हुआ अजूबा

Published: Sun, 20 Sep 2026 11:16 AM (IST)

Munger Sadar Hospital Delivery in E-Rickshaw: मुंगेर सदर अस्पताल के बाहर एक गर्भवती महिला ने ई-रिक्शा में बच्चे को जन्म ...और पढ़ें

Munger Sadar Hospital Delivery in E-Rickshaw: मुंगेर सदर अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर ई-रिक्शा में प्रसव; एक माह में तीसरी बार वाहन बना प्रसव कक्ष, व्यवस्था पर उठे सवाल

Munger Sadar Hospital Delivery in E-Rickshaw: मुंगेर सदर अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर ई-रिक्शा में प्रसव; एक माह में तीसरी बार वाहन बना प्रसव कक्ष, व्यवस्था पर उठे सवाल

HighLights

  1. गर्भवती महिला ने मुंगेर सदर अस्पताल के बाहर ई-रिक्शा में दिया जन्म।

  2. स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना ने विपरीत परिस्थितियों में सुरक्षित प्रसव कराया।

  3. सितंबर में तीसरी घटना, प्रसव वार्ड भूतल पर लाने की मांग।

संवाद सहयोगी, मुंगेर। Munger Sadar Hospital Delivery in E-Rickshaw: मुंगेर जिले की सबसे बड़ी स्वास्थ्य संस्था सदर अस्पताल की व्यवस्था और आपातकालीन सुविधाओं पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक गर्भवती महिला प्रसव पीड़ा से कराहते हुए अस्पताल पहुंची, लेकिन इससे पहले कि उसे स्ट्रेचर के जरिए प्रसव कक्ष (लेबर रूम) तक पहुंचाया जाता, अस्पताल परिसर में खड़ा इलेक्ट्रिक ऑटो (ई-रिक्शा) ही उसका प्रसव कक्ष बन गया। शनिवार देर रात नया रामनगर थाना क्षेत्र के गढ़ी रामपुर निवासी सुशील ठाकुर की पत्नी मोनी देवी ने इमरजेंसी के ठीक बाहर ई-रिक्शा की सीट पर ही अपने पांचवें बच्चे को जन्म दिया।

गनीमत रही कि घटना की तत्काल सूचना मिलते ही अस्पताल में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना त्वरित रूप से मौके पर पहुंचीं। उन्होंने विपरीत परिस्थितियों के बीच ई-रिक्शा में ही तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित प्रसव कराया। इसके बाद स्वास्थ्यकर्मियों की मदद से जच्चा और नवजात शिशु को तत्काल अस्पताल के प्रसव वार्ड में शिफ्ट किया गया। चिकित्सकों के अनुसार वर्तमान में जच्चा और बच्चा दोनों पूरी तरह खतरे से बाहर और स्वस्थ हैं।

संतान के जन्म से घर में खुशी, पर व्यवस्था पर आक्रोश

मोनी देवी के पहले से तीन बेटियां और एक बेटा है। परिवार में दूसरे बेटे के रूप में नए सदस्य के आगमन से स्वजनों में खुशी का माहौल है, लेकिन अस्पताल पहुंचने के बाद झेलनी पड़ी अव्यवस्था को लेकर परिजनों में गहरा रोष भी है।

  • मुंगेर सदर अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर शनिवार देर रात ई-रिक्शा में प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला ने दिया बच्चे को जन्म

  • स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अर्चना ने वाहन में ही कराया सुरक्षित प्रसव; जच्चा और नवजात दोनों पूरी तरह स्वस्थ, वार्ड में भर्ती

  • सितंबर माह में वाहन के अंदर प्रसव होने की यह तीसरी घटना; सदर अस्पताल की आपातकालीन कार्यप्रणाली पर खड़े हुए गंभीर सवाल

  • पहली मंजिल पर प्रसव वार्ड होने के कारण गर्भवती महिलाओं की बढ़ती है परेशानी; ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट करने की उठी मांग

परिजनों ने बताया कि अस्पताल का प्रसव वार्ड पहली मंजिल पर स्थित है। प्रसव पीड़ा से बेहाल महिला को इमरजेंसी से पहली मंजिल तक ले जाने में काफी समय और भारी मशक्कत करनी पड़ती है। परिजनों और स्थानीय लोगों ने मांग की है कि आपातकालीन स्थिति को देखते हुए प्रसव वार्ड को तत्काल भूतल (ग्राउंड फ्लोर) पर स्थानांतरित किया जाना चाहिए, ताकि किसी भी गंभीर प्रसूता को समय रहते तत्काल डॉक्टरी निगरानी मिल सके।

सितंबर माह में तीसरी बार वाहन बना प्रसव कक्ष

सदर अस्पताल की इमरजेंसी के बाहर किसी वाहन में प्रसव होने की यह महज कोई इकलौती घटना नहीं है, बल्कि अकेले सितंबर माह में यह तीसरी घटना सामने आई है। इससे पहले भी दो अलग-अलग मामलों में सुदूर ग्रामीण इलाकों से पहुंची गर्भवती महिलाएं लेबर रूम के अंदर पहुंचने से पहले ही अस्पताल परिसर में वाहनों में बच्चों को जन्म दे चुकी हैं।

बार-बार दोहराई जा रही ये घटनाएं अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य महकमे की तैयारियों की पोल खोल रही हैं। बड़ा सवाल यह है कि जब सदर अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों और संसाधनों की मौजूदगी का दावा किया जाता है, तो फिर आखिर ऐसी आपात स्थिति में गर्भवती महिलाओं को इमरजेंसी के बाहर खुले वाहनों में प्रसव के लिए क्यों मजबूर होना पड़ रहा है।