पति का साया उठा, फिर भी नहीं टूटीं शोभा, मुंगेर की इस नर्स ने अनगिनत माताओं की गोद खुशियों से भरी
मुंगेर सदर अस्पताल की जीएनएम नर्स शोभा शरण सिन्हा ने व्यक्तिगत दुख के बावजूद अनगिनत माताओं को खुशियां दी हैं। ...और पढ़ें

मुंगेर सदर अस्पताल की जीएनएम स्टाफ नर्स शोभा शरण सिन्हा।
HighLights
शोभा शरण सिन्हा मुंगेर सदर अस्पताल में समर्पित जीएनएम नर्स।
व्यक्तिगत त्रासदी के बावजूद अनगिनत माताओं को खुशियां दीं।
स्वास्थ्य मंत्री द्वारा सम्मानित, बच्चों को भी सफल बनाया।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। जिंदगी ने जब कभी कड़े इम्तिहान लिए, तो कुछ लोग टूट जाते हैं, लेकिन कुछ लोग उन मुश्किलों को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेते हैं।
मुंगेर सदर अस्पताल के मातृ-शिशु विभाग में जीएनएम स्टाफ नर्स के पद पर कार्यरत शोभा शरण सिन्हा ऐसी ही एक प्रेरणादायक शख्सियत हैं, जिन्होंने अपना संसार उजड़ने के बावजूद अनगिनत परिवारों में किलकारी गूंजने की वजह बनकर एक मिसाल कायम की है।
मूल रूप से बरियारपुर प्रखंड के बस्ती गांव की रहने वाली शोभा देवी आज प्रसव पीड़ा से गुजरने वाली हर गर्भवती महिला के लिए केवल एक स्वास्थ्यकर्मी नहीं, बल्कि भरोसे और संवेदना का दूसरा नाम बन चुकी हैं।
वर्ष 2008 से शुरू हुआ सेवा का सफर
शोभा की स्वास्थ्य सेवा की यह लंबी यात्रा वर्ष 2008 में पहाड़पुर उप स्वास्थ्य केंद्र से शुरू हुई थी। इसके बाद वर्ष 2015 में उनकी तैनाती मुंगेर सदर अस्पताल के प्रसव वार्ड में कर दी गई।
उस शुरुआती दौर में कई गर्भवती महिलाओं को सिजेरियन प्रसव के लिए अन्य बड़े अस्पतालों में रेफर करना पड़ता था, लेकिन समय के साथ चिकित्सकों और आधुनिक सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ने से स्थानीय स्तर पर ही सिजेरियन प्रसव की सुविधा शुरू हुई, जिससे क्षेत्र की महिलाओं को भारी राहत मिली।
वर्तमान में सदर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 25 से 30 प्रसव होते हैं, और हर प्रसव के साथ जुड़ी मां की उम्मीदों को पूरा करने में शोभा पूरी निष्ठा से जुटी रहती हैं।
उनके इस समर्पण और जननी बाल सुरक्षा योजना के तहत किए गए बेहतरीन कार्यों को देखते हुए वर्ष 2025 में पटना में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य मंत्री द्वारा उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
दुखों को बनाया ताकत, बच्चों को दिलाया मुकाम
वर्ष 2019 में रेलवे में ट्रैकमैन के पद पर कार्यरत उनके पति प्रदीप कुमार के अचानक निधन ने शोभा को भीतर से झकझोर कर रख दिया था। परिवार की पूरी आर्थिक और सामाजिक जिम्मेदारी अचानक उनके अकेले कंधों पर आ गई। हालांकि, उन्होंने इस बड़े दुख को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
अपने बच्चों के भविष्य को संवारने के लिए उन्होंने दिन-रात मेहनत की। आज उनकी उसी कड़ी मेहनत का परिणाम है कि उनका बेटा एक प्रतिष्ठित पद पर तकनीशियन के रूप में कार्यरत है, जबकि बेटी को उन्होंने जीएनएम (GNM) की उच्च शिक्षा दिलाई है।
शोभा शरण सिन्हा की यह जीवन यात्रा साबित करती है कि नारी की सच्ची शक्ति केवल अपने दुखों को सहने में नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों के बीच भी दूसरों के जीवन में उम्मीद और रोशनी जगाने में निहित है।
संक्षिप्त विवरण
| विवरण | तथ्यात्मक जानकारी |
| कर्मी का नाम | शोभा शरण सिन्हा (जीएनएम स्टाफ नर्स) |
| कार्यक्षेत्र | मातृ-शिशु प्रसव विभाग, सदर अस्पताल, मुंगेर |
| मूल निवास | बस्ती गांव, बरियारपुर प्रखंड, मुंगेर |
| सेवा की शुरुआत | वर्ष 2008 (पहाड़पुर उप स्वास्थ्य केंद्र) |
| प्रमुख सम्मान | वर्ष 2025 में पटना में स्वास्थ्य मंत्री द्वारा प्रशस्ति पत्र से सम्मानित |
| पारिवारिक पृष्ठभूमि | पति स्वर्गीय प्रदीप कुमार (रेलवे ट्रैकमैन); एक पुत्र (तकनीशियन) व एक पुत्री (जीएनएम प्रशिक्षित) |
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