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मुंगेर में अंचल का कारनामा, साढ़े चार एकड़ सरकारी जमीन की कर दी जमाबंदी, विश्वविद्यालय के लिए अधिग्रहण में खुली पोल

Published: Thu, 29 Oct 2026 08:08 PM (IST)

Munger Government Land Jamabandi Scam: मुंगेर सदर अंचल कार्यालय में साढ़े चार एकड़ सरकारी और पहाड़ी जमीन की अवैध जमाबंदी ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर 

HighLights

  1. साढ़े चार एकड़ सरकारी जमीन की अवैध जमाबंदी।

  2. विश्वविद्यालय भूअर्जन के दौरान फर्जीवाड़े का खुलासा।

  3. अंचल कार्यालय से जमाबंदी पंजी गायब मिली।

संवाद सहयोगी, मुंगेर। Munger Government Land Jamabandi Scam: मुंगेर सदर अंचल कार्यालय की कार्यशैली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। सदर अंचल क्षेत्र के नौवागढ़ी मौजा में साढ़े चार एकड़ सरकारी और पहाड़ी जमीन की अवैध जमाबंदी कर उसकी रसीद काटने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है।

यह पूरा फर्जीवाड़ा वर्षों पुराना है, जिसका खुलासा तब हुआ जब विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए भूअर्जन कार्यालय द्वारा नौवागढ़ी मौजा में बड़े पैमाने पर जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा था।

रामनगर थाना और पहाड़ के बीच का मामला

प्राप्त जानकारी के अनुसार, नौवागढ़ी मौजा में रामनगर थाना और पहाड़ के बीच स्थित साढ़े चार एकड़ सरकारी परती एवं पहाड़ी जमीन की जमाबंदी तत्कालीन अंचलाधिकारी के कार्यकाल में कर्मियों की मिलीभगत से कर दी गई थी।

इतना ही नहीं, उस जमीन के नाम पर बाकायदा रसीद भी काट दी गई। जब इस जमीन के एवज में कागजात और अद्यतन रसीद लेकर लोग मुआवजा भुगतान के लिए भूअर्जन कार्यालय पहुंचे, तो पता चला कि वह जमीन सरकारी है। इसके बाद भूअर्जन कार्यालय ने ऐसे सभी रैयतों को मुआवजा देने से साफ इंकार करते हुए उनके कागजात वापस लौटा दिए हैं।

सरकारी खतियान से मिलान के दौरान हुआ पर्दाफाश

जिला भूअर्जन पदाधिकारी पंकज गुप्ता ने बताया कि विश्वविद्यालय के लिए नौवागढ़ी मौजा में कुल 17 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। भूअर्जन कार्यालय द्वारा जब रैयतों से जमा कराए गए कागजातों की जांच सरकारी खतियान से कराई गई, तब यह चौंकाने वाला सच सामने आया।

जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जिन 20 रैयतों के कागजात जमा किए गए हैं, उनमें से साढ़े चार एकड़ जमीन पूरी तरह सरकारी है। भूअर्जन पदाधिकारी इस गंभीर मामले को जिलाधिकारी की बैठक में भी उठा चुके हैं, हालांकि प्रशासनिक स्तर पर अब तक ठोस कार्रवाई को लेकर सन्नाटा पसरा हुआ है।

अंचल कार्यालय से जमाबंदी और बासगीत पंजी गायब

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकारी जमीन की जमाबंदी हुई है, तो इसके पीछे की परिस्थिति क्या थी? जब इस संबंध में सदर अंचलाधिकारी से जानकारी चाही गई, तो वे खुद को पूरी तरह असहज महसूस करती नजर आईं।

अंचल प्रशासन के पास इसका कोई जवाब नहीं है क्योंकि कार्यालय से जमाबंदी पंजी और बंदोवस्ती पंजी दोनों ही गायब बताई जा रही हैं। जानकारों का कहना है कि बासगीत पर्चाधारियों को मिलने वाली जमीन की जमाबंदी अंचल स्तर पर ही की जाती है, लेकिन जब बासगीत पंजी ही दफ्तर से गायब हो, तो यह पता लगाना असंभव सा हो गया है कि आखिर किस परिस्थिति में और किसकी शह पर सरकारी जमीन की निजी जमाबंदी तैयार कर दी गई।

अधिकारियों का पक्ष

इस पूरे प्रकरण पर सदर अंचलाधिकारी अंजलि कुमारी का कहना है कि नौवागढ़ी मौजा में साढ़े चार एकड़ सरकारी जमीन की जमाबंदी का मामला उनके संज्ञान में आया है। यह जमाबंदी काफी पुरानी है।

अभिलेखों और कागजातों की गहराई से जांच की जा रही है, जिसके बाद जमाबंदी रद्दीकरण (रद्द करने) का प्रस्ताव विधिवत रूप से आगे भेजा जाएगा। बहरहाल, बड़ा सवाल यह बना हुआ है कि इस बहुचर्चित मामले में जमाबंदी रद्दीकरण का प्रस्ताव आखिर कौन लाएगा और सरकारी जमीन हड़पने की इस साजिश में शामिल असली चेहरों पर गाज कब गिरेगी।

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