मुंगेर में गोलियां बरसीं, हथियार गायब, मुफस्सिल इलाके में बदमाशों तक कैसे पहुंच रहे कारतूस और कट्टा
मुंगेर के मुफस्सिल इलाके में गोलीबारी और अवैध हथियारों का नेटवर्क पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। मिनी ...और पढ़ें

20 अक्टूबर को गोली चलाता युवक. सौ. इंटरनेट मीडिया
HighLights
मुंगेर में गोलीबारी और अवैध हथियारों का बढ़ता खतरा।
मिनी गन फैक्ट्री के बावजूद हथियार सप्लाई जारी।
आपराधिक नेटवर्क और हथियारों के स्रोत पर सवाल।
संवाद सहयोगी, मुंगेर। मुंगेर जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में गोलीबारी की घटनाएं और अपराधियों के हौसले पुलिस प्रशासन के सामने लगातार कड़ी चुनौती बनते जा रहे हैं।
मिर्जापुर बरदह में हाल ही में मिनी गन फैक्ट्री का उद्भेदन और भारी मात्रा में अवैध हथियारों की बरामदगी के बावजूद टीकारामपुर और शंकरपुर जैसे इलाकों में वर्चस्व की लड़ाई थमने का नाम नहीं ले रही है।
सवाल सिर्फ ताबड़तोड़ गोलीबारी करने वालों की गिरफ्तारी का नहीं है, बल्कि उस गहरे आपराधिक नेटवर्क का भी है जो बेखौफ होकर बदमाशों तक अत्याधुनिक हथियार और कारतूस पहुंचा रहा है।
आखिर ये हथियार कहां बन रहे हैं, कारतूसों की आपूर्ति कौन कर रहा है और वारदात को अंजाम देने के बाद हथियार कहां गायब हो जाते हैं, यह बड़े सवाल बने हुए हैं।
प्राथमिकी के बाद भी धीमी रफ्तार, हथियार बरामदगी बड़ी चुनौती
बीती 20 अक्टूबर को आदर्श ग्राम टीकारामपुर में दो पक्षों के बीच वर्चस्व को लेकर हिंसक झड़प और गोलीबारी हुई थी। इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई है, जिसमें कुल दस लोगों को नामजद किया गया है। हालांकि, घटना के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस अब तक केवल एक ही आरोपी को गिरफ्तार कर पाई है।
सबसे बड़ी चिंता का विषय यह है कि जिन हथियारों से सरेआम फायरिंग की गई, उनका अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। जब तक हथियार बरामद नहीं होते, तब तक यह आशंका बनी रहेगी कि वे हथियार कहां छिपाए गए हैं और दोबारा किसी बड़ी आपराधिक वारदात में उनका इस्तेमाल कैसे रोका जाएगा।
हथियारों के स्रोत और सप्लाई नेटवर्क पर प्रहार जरूरी
मिर्जापुर बरदह में मिनी गन फैक्ट्री का पर्दाफाश यह बताने के लिए काफी है कि इलाके में अवैध हथियार निर्माण का काला कारोबार किस हद तक फैला हुआ है।
हालांकि पुलिस समय-समय पर छापेमारी कर कार्रवाई करती रही है, लेकिन टीकारामपुर और शंकरपुर में घटित घटनाएं यह साबित करती हैं कि केवल हथियार बनाने वाले ठिकानों पर धड़ल्ले से छापेमारी करना ही काफी नहीं है।
हथियारों की खरीद-बिक्री, उनकी सप्लाई चेन और कारतूसों के मुख्य स्रोतों की गहराई से जांच बेहद जरूरी है। इसके अलावा, हाल के दिनों में इंटरनेट मीडिया पर लगातार गोली चलाने की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने की चर्चाएं भी आम हैं, हालांकि इसकी पुष्टि नहीं होती, लेकिन यह पुलिसिया अनुसंधान का मुख्य बिंदु जरूर है।
"हाल के दिनों में हुई आपराधिक घटनाओं को जिला पुलिस ने बेहद गंभीरता से लिया है। टीकारामपुर गोलीबारी की इस घटना में इस्तेमाल किए गए हथियारों की बरामदगी और फरार चल रहे अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीम का गठन किया गया है। बहुत जल्द घर-घर तलाशी अभियान चलाकर हथियार और कारतूस बरामद किए जाएंगे और सभी नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा।"
— सैयद इमरान मसूद, पुलिस अधीक्षक (SP), मुंगेर
