राजधानी में शुद्ध मिठाई की चिंता, मुंगेर में मिलावट रोकने वाला ही गायब, त्योहार में खाद्य सुरक्षा पर बड़ा सवाल
मुंगेर में दीपावली के दौरान मिलावटी खाद्य पदार्थों की जांच अधर में है क्योंकि जिले के एकमात्र खाद्य निरीक्षक को पटना प्रतिनियुक्त कर दिया गया है।

मुंगेर बाजार में मिठाई और खाद्य पदार्थों की दुकान
HighLights
मुंगेर के एकमात्र खाद्य निरीक्षक पटना में प्रतिनियुक्त।
त्योहारों में मिलावटी मिठाइयों की जांच करना चुनौती।
जांच रिपोर्ट आने में डेढ़ से दो महीने का समय।
संवाददाता, मुंगेर। दीपावली और त्योहारी सीजन में आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ किस तरह खिलवाड़ किया जाता है, इसकी बानगी मुंगेर जिले में साफ तौर पर देखने को मिल रही है।
पर्व-त्योहारों के दौरान मिलावटखोरों पर लगाम कसने वाली प्रशासनिक व्यवस्था पूरी तरह कमजोर और लाचार नजर आ रही है। स्थिति यह है कि जिले के एकमात्र खाद्य निरीक्षक मु. अली गौहर को स्वास्थ्य सचिव के विशेष आदेश पर पिछले 8 अक्टूबर से ही पटना में प्रतिनियुक्त कर दिया गया है।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि त्योहार के इस संवेदनशील समय में मुंगेर के बाजारों में बिकने वाली मिलावटी मिठाइयों, खोवा, घी और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की जाँच कौन करेगा?
खाद्य निरीक्षक के अनुसार, उनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त होने के बाद ही जिले में विशेष अभियान चलाकर नमूने एकत्र किए जा सकेंगे। हालांकि, इससे पहले तारापुर और जमालपुर क्षेत्र से कुल 30 नमूने जाँच के लिए पटना भेजे जरूर गए है।
लेकिन सरकारी प्रयोगशालाओं से जाँच रिपोर्ट आने में आमतौर पर डेढ़ से दो महीने का वक्त लग जाता है। ऐसे में दीपावली के ऐन मौके पर धड़ल्ले से बिकने वाले मिलावटी सामानों की समय पर जाँच कर पाना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है।
एक अधिकारी के जिम्मे दो-दो प्रमंडल, वीआईपी दौरों तक सीमित जाँच
मुंगेर में प्रशासनिक उदासीनता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ तैनात प्रमंडल स्तरीय खाद्य सुरक्षा अधिकारी (DO) के पास मुंगेर और भागलपुर— दोनों बड़े प्रमंडलों के सभी जिलों का अतिरिक्त प्रभार है।
स्थानीय लोगों और जानकारों का कहना है कि ये अधिकारी अमूमन केवल मुख्यमंत्री या किसी वीआईपी के दौरे के समय ही मुंगेर में खाद्य पदार्थों की जाँच के लिए सक्रिय होते हैं।
दूसरी ओर, पटना में बिकने वाले मिलावटी खाद्य पदार्थों की जाँच के लिए मुंगेर के फूड इंस्पेक्टर को वहां बुला लिया गया है, लेकिन मुंगेर की जनता को मिलावट के जहर से बचाने के लिए स्थानीय स्तर पर कोई पुख्ता मैकेनिज्म नजर नहीं आ रहा है। इस गंभीर प्रशासनिक चूक और सवाल का जवाब देने में सिविल सर्जन कार्यालय भी असमर्थ दिखा।
तारापुर और जमालपुर से भेजे गए 30 सैंपल
खाद्य निरीक्षक ने बताया कि 8 अक्टूबर से पहले तारापुर और जमालपुर की किराना और मिठाई दुकानों से मैदा, आटा, मसाला, तेल, घी और खोवा समेत 30 प्रकार के खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर अगमकुआं (पटना) स्थित खाद्य प्रसंस्करण प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
नियमों के मुताबिक, लैब की जाँच रिपोर्ट में यदि खाद्य पदार्थ 'सब स्टैंडर्ड' (अकनक) पाया जाता है, तो संबंधित दुकानदार पर अधिकतम 5 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
वहीं, यदि मिलावट जानलेवा साबित होती है, तो जुर्माने के साथ-साथ जेल भेजने का भी कानूनी प्रावधान है, लेकिन समय पर रिपोर्ट न आना और जाँच अधिकारियों की कमी इस पूरी प्रक्रिया को कमजोर कर देती है।
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"खाद्य सुरक्षा के दो अधिकारी मुंगेर में प्रतिनियुक्त हैं। तत्काल प्रभाव से प्रमंडल स्तरीय जाँच अधिकारी से दुकानों में बिक रहे खाद्य पदार्थों की मिलावट की जाँच कराई जाएगी। इसके अलावा, पटना में प्रतिनियुक्त खाद्य निरीक्षक को जल्द वापस मुंगेर भेजने के लिए स्वास्थ्य सचिव को पत्र लिखा जा रहा है।"
— निखिल धनराज निप्पाणीकर, जिलाधिकारी (DM), मुंगेर
