मुंगेर में दुर्गा प्रतिमा विसर्जन के बाद बिगड़ी आबोहवा; AQI 217 पहुंचा, मुंबई से भी ज्यादा प्रदूषित हुई शहर की हवा
Munger Air Pollution AQI: प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा के बाद मुंगेर की हवा बेहद खराब हो गई है, जहां वायु गुणवत्ता ...और पढ़ें

Munger Air Pollution AQI: गुरुवार को मुंगेर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) अधिकतम 217 तक दर्ज किया गया, जो पिछले दिनों 100 से 110 के आसपास था।
जागरण संवाददाता, मुंगेर। Munger Air Pollution AQI: ऐतिहासिक प्रतिमा विसर्जन शोभायात्रा के दौरान सड़कों पर उमड़े जनसैलाब, वाहनों के भारी दबाव और जगह-जगह फैली गंदगी व धूल के गुबार ने मुंगेर शहर की आबोहवा बिगाड़ कर रख दी है।
गुरुवार को शहर का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) उछलकर 217 तक जा पहुंचा, जिसके चलते मुंगेर की हवा सामान्य से सीधे 'अस्वस्थ' (Unhealthy) श्रेणी में दर्ज की गई। हैरान करने वाली बात यह रही कि वायु प्रदूषण के मामले में मुंगेर ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को भी पीछे छोड़ दिया, जहां गुरुवार को एक्यूआई 161 से 183 के बीच दर्ज किया गया था।
100 से सीधे 217 पर पहुंचा पारा, विसर्जन की धूल ने बढ़ाई मुसीबत
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा मुंगेर के टाउन हॉल के समीप स्थापित वायु निगरानी केंद्र के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को विभिन्न अंतरालों में एक्यूआई 188 से लेकर 217 के बीच रिकॉर्ड किया गया। आमतौर पर पिछले कुछ हफ्तों से शहर की हवा का स्तर 100 से 110 के आसपास स्थिर बना हुआ था।
मुंगेर वायु गुणवत्ता: तुलनात्मक आंकड़े एक नजर में
सामान्य/अच्छा स्तर: 0 से 50 AQI
मुंगेर का पिछला स्तर: 100 से 110 AQI (मध्यम)
गुरुवार को मुंगेर का स्तर: 188 से 217 AQI (अस्वस्थ / Unhealthy)
मुंबई का स्तर (गुरुवार): 161 से 183 AQI
निगरानी केंद्र: टाउन हॉल के समीप (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड)
प्रमुख प्रदूषक कारक: विसर्जन के दौरान सड़कों पर वाहनों का भारी दबाव, उड़ती धूल और सड़कों पर फैली गंदगी।
पर्यावरण विशेषज्ञों और स्थानीय जानकारों के मुताबिक, विसर्जन यात्रा के दौरान शहर के मुख्य मार्गों पर लगातार घंटों तक चली भारी वाहनों की आवाजाही, लाखों श्रद्धालुओं के आवागमन और सड़कों पर उड़ती सूखी धूल ने हवा में धूल कणों (पार्टिकुलेट मैटर) की मात्रा को अचानक कई गुना बढ़ा दिया। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि एक दिन के आंकड़े से प्रदूषण के सभी स्थायी कारणों का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता, लेकिन तात्कालिक तौर पर हवा की गुणवत्ता खतरनाक स्तर तक जरूर पहुंच गई है।
200 पार एक्यूआई सेहत के लिए खतरनाक, फेफड़ों को नुकसान
पर्यावरण मानकों के अनुसार, 0 से 50 के बीच का एक्यूआई स्वास्थ्य के लिए सबसे उत्तम माना जाता है, जबकि 100 से ऊपर जाते ही संवेदनशील लोगों के लिए परेशानी शुरू हो जाती है। 200 से अधिक का स्तर सीधे तौर पर मानव स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक और अस्वस्थ श्रेणी में आता है।
हवा में घुले पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे सूक्ष्म धूल कण सांस के जरिए सीधे फेफड़ों की गहराई तक पहुंच जाते हैं। इसके सीधे संपर्क में आने से सामान्य नागरिकों में भी आंखों में तेज जलन, पानी आना, गले में खराश और बार-बार छींकें आने की समस्या पैदा होने लगती है।
डॉक्टर की चेतावनी: सांस के मरीज और बुजुर्ग बरतें विशेष सावधानी
सदर अस्पताल मुंगेर के चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. कुमार रंजन ने बताया कि हवा में मौजूद बारीक और जहरीले कण सांस नली और फेफड़ों में पहुंचकर आंतरिक सूजन (इन्फ्लेमेशन) पैदा करते हैं। इसके कारण सांस फूलने, छाती में भारी जकड़न, आंखों में चुभन और लगातार सूखी खांसी की शिकायत हो सकती है।
डॉ. रंजन ने सचेत किया कि लंबे समय तक ऐसी प्रदूषित हवा में रहने से हृदय रोगियों और हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) के मरीजों पर भी प्रतिकूल असर पड़ता है। उन्होंने बुजुर्गों, बच्चों, अस्थमा व ब्रोंकाइटिस से पीड़ित मरीजों को फिलहाल सुबह और शाम के वक्त अनावश्यक रूप से धूल भरी सड़कों पर निकलने से बचने और बाहर निकलते समय मास्क का प्रयोग करने की सलाह दी है।
