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मुंगेर में 'अर्नब' तूफान की आहट से किसानों की बढ़ी चिंता, धरहरा में पककर तैयार धान पर बारिश और तेज हवा का खतरा

Published: Thu, 29 Oct 2026 04:44 PM (IST)

बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के संभावित असर से मुंगेर के धरहरा प्रखंड के किसान चिंतित हैं। ...और पढ़ें

मुंगेर के धरहरा में बदलते मौसम और आसमान में छाए बादलों के बीच खेतों में खड़ी धान की पकी फसल

मुंगेर के धरहरा में बदलते मौसम और आसमान में छाए बादलों के बीच खेतों में खड़ी धान की पकी फसल

HighLights

  1. चक्रवाती तूफान 'अर्नब' से किसानों में चिंता।

  2. तैयार धान की फसल को नुकसान का डर।

  3. रबी फसलों की बुवाई में देरी की आशंका।

संवाद सहयोगी, धरहरा (मुंगेर)। बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'अर्नब' के संभावित असर की आशंका ने मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड के किसानों की नींद उड़ा दी है। खेतों में धान की फसल कटने के लिए बिल्कुल तैयार खड़ी है, लेकिन मौसम के लगातार बदलते मिजाज और अनिश्चितता के कारण किसान चाहकर भी कटाई का काम तेजी से नहीं कर पा रहे हैं।

अन्नदाताओं के मन में इस बात का डर सता रहा है कि यदि तेज हवा चली या बारिश हुई, तो उनकी महीनों की कठिन मेहनत पर पानी फेर सकता है। गुरुवार की सुबह से ही क्षेत्र में आसमान पर घने बादल छाए रहे और हल्की बूंदाबांदी भी दर्ज की गई। हालांकि दिन के वक्त तूफान का प्रत्यक्ष असर अपेक्षाकृत कुछ कम दिखा, लेकिन हवा की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ने से किसानों की बेचैनी लगातार बढ़ती जा रही है।

फसल गिरने और गुणवत्ता प्रभावित होने का डर

किसान वर्ग का कहना है कि जब फसल पूरी तरह पककर कटाई के चरण में होती है, ठीक उसी समय मौसम का बिगड़ना उनके लिए सबसे बड़ी मुसीबत बन जाता है। यदि तेज हवा के साथ भारी बारिश होती है, तो खेतों में लहलहाती खड़ी फसल जमीन पर बिछ सकती है।

इससे न केवल धान की बालियों को भारी नुकसान पहुंचेगा, बल्कि दाना काला पड़ने से कुल उत्पादन और बाजार में मिलने वाली गुणवत्ता दोनों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। इसके अलावा, यदि कटी हुई फसल भी बारिश की चपेट में आ गई, तो उसे सुरक्षित रखना बहुत बड़ी चुनौती साबित होगा।

रबी फसल की बुआई पर भी पड़ सकता है असर

वर्तमान में प्रखंड के सभी किसान मौसम के साफ होने और हवा की गति थमने का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि वे जल्द से जल्द अपने अनाज को काटकर सुरक्षित ठिकानों तक पहुंचा सकें।

किसानों ने आशंका जताई है कि यदि मौसम ने जल्द साथ नहीं दिया, तो धान की उपज तो प्रभावित होगी ही, साथ ही इसके चलते आगामी रबी फसलों की समय पर बुआई में भी काफी विलंब हो सकता है, जिससे उन्हें दोहरा आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

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