मुंगेर दियारा में थ्री नॉट थ्री राइफल के साथ 3 गिरफ्तार, 15 साल पुराने खूनी माओवादी कांड से जुड़ रहे तार
मुंगेर के हरिनमार दियारा में पुलिस ने 15 साल पुराने माओवादी संघर्ष से जुड़े एक मामले में राइफल के साथ तीन लोगों को गिरफ्तार किया है।

एआई द्वारा जनरेट की गई सांकेतिक तस्वीर है।
HighLights
.303 राइफल के साथ मुंगेर दियारा से तीन गिरफ्तार
15 साल पुराने माओवादी संघर्ष से जुड़े मामले के तार
पुलिस राइफल के स्रोत और मालिकाना हक की कर रही जांच
संवाद सहयोगी, मुंगेर। मुंगेर जिले के हरिनमार दियारा क्षेत्र में करीब 15 वर्ष पूर्व हुए भीषण व खूनी माओवादी संघर्ष की खौफनाक यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर रैयता दियारा के तहसीलदार टोला स्थित एक मकान में छापेमारी कर (थ्री नॉट थ्री) राइफल का बट (मुठिया) ठीक कराने के दौरान तीन लोगों को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान विजय सिंह, भरत सिंह और हथियार की मरम्मत कर रहे स्थानीय कारीगर विशो मंडल के रूप में की गई है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बरामद यह प्रतिबंधित राइफल वर्ष 2011 में माओवादी-अपराधी मुठभेड़ के दौरान लूटे गए असलहों में से एक हो सकती है। हालांकि, आधिकारिक पुष्टि के लिए पुलिस हर पहलू की गहन जांच कर रही है।
मिटे हुए नंबर ने बढ़ाई पुलिस की चुनौती
हथियार बरामदगी के बाद पुलिस अब इसके असली मालिकाना हक और स्रोत की पड़ताल में जुट गई है। राइफल की बॉडी पर अंकित सीरियल नंबर को साजिशन मिटा या घिस दिया गया है, जिससे इसके आधिकारिक इतिहास को खंगालने में परेशानी आ रही है।
मुंगेर एसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि राइफल के ओरिजिनल नंबर को रिकवर करने और इसकी वैज्ञानिक पहचान सुनिश्चित करने के लिए फोरेंसिक साइंस लैब (FSL) की विशेषज्ञों की टीम की मदद ली जा रही है।
वर्ष 2011 का जलकर विवाद और खूनी संघर्ष
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2011 में हरिनमार दियारा इलाके में गंगा नदी में मछली पकड़ने के अधिकार (जलकर) को लेकर दो स्थानीय बाहुबली गुटों के बीच भीषण रंजिश शुरू हुई थी। इस वर्चस्व की लड़ाई में एक गुट ने अपनी बढ़त बनाने के लिए भाकपा माओवादियों की मदद ली थी।
इसके बाद आपराधिक गिरोह और माओवादियों के बीच दियारा में आमने-सामने का खूनी संघर्ष हुआ था। उस वक्त आठ से दस माओवादियों और दो स्थानीय ग्रामीणों की हत्या कर दी गई थी, और माओवादियों के शवों को गंगा की तेज धारा में बहा दिया गया था।
उस ऐतिहासिक घटना के दौरान माओवादियों के कई अत्याधुनिक हथियार भी गायब हुए थे, जिन्हें अब इस बरामदगी से जोड़कर देखा जा रहा है।
पुरानी कड़ियों को जोड़ने में जुटी पुलिस
इस अवैध हथियार की बरामदगी ने पुलिस प्रशासन के सामने उस 15 साल पुराने बहुचर्चित कांड की कड़ियों को दोबारा जोड़ने की उम्मीद जगा दी है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि क्या गिरफ्तार तीनों आरोपियों का संबंध उस दौर के आपराधिक सिंडिकेट से था या उन्होंने इसे किसी अन्य गिरोह से खरीदा था।
