1400 रैयत मुआवजा सिर्फ 35 को, मोकामा-मुंगेर फोरलेन पर जमीन का पेच, 300 मकानों पर मंडरा रहा बुलडोजर का खतरा
मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना भूमि अधिग्रहण और मुआवजे के पेंच में फंस गई है, जिससे 1400 रैयतों में से केवल ...और पढ़ें

बनने के बाद कुछ इस तरह होगा ग्रीनफील्ड फोरलेन. सौ. इंटरनेट मीडिया
HighLights
1400 रैयतों में से केवल 35 को मिला मुआवजा।
अमीन हड़ताल और बाढ़ से भूमि अधिग्रहण बाधित।
सफियासराय में 300 मकानों पर बुलडोजर का खतरा।
मनोज कुमार, मुंगेर। Mokama Munger Greenfield Fourlane Land Acquisition: बिहार में इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास की रफ्तार को लेकर बड़े-बड़े प्रशासनिक दावे किए जा रहे हैं, लेकिन धरातल पर योजनाएं जमीन अधिग्रहण के पेंच में उलझकर रह गई हैं।
मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन निर्माण के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) द्वारा संवेदक एजेंसी (मेसर्स जीआर इंफ्रा) का चयन 23 मार्च 2026 को ही किया जा चुका है, परंतु जिन भूस्वामियों की जमीन पर इस महत्वकांक्षी सड़क का निर्माण होना है, उनमें से 97 प्रतिशत से अधिक रैयत अब तक अपने मुआवजे की बाट जोह रहे हैं।
NHAI की देखरेख में 4,447 करोड़ रुपये से बनने वाले 82.2 किलोमीटर लंबे मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन के निर्माण पर मुंगेर में लगा ब्रेक
मुंगेर में 17.2 किलोमीटर सड़क हेतु 1,400 रैयतों की जमीन अधिग्रहित होनी है; 542 करोड़ आवंटन के बावजूद अब तक महज 35 रैयतों को मिला ₹11.75 करोड़
सफियासराय में फोरलेन एलायमेंट के रास्ते में आने वाले करीब 300 पक्के-कच्चे मकानों और चारदीवारी को हटाने का बनाया गया है खाका
6 अक्टूबर से अमीनों की जारी हड़ताल और दियारा क्षेत्रों में जमा बाढ़ के पानी के कारण भूमि पैमाइश और एलपीसी कागजात सत्यापन का काम प्रभावित
मुंगेर जिले में 17.2 किलोमीटर लंबी सड़क के लिए करीब 1,400 रैयतों से जमीन का अधिग्रहण किया जाना है, लेकिन इसके एवज में अब तक महज 35 रैयतों के बीच 11.75 करोड़ रुपये का ही भुगतान हो सका है।
एक तरफ जहां राज्य मुख्यालय और पटना के वरीय अधिकारी हर सप्ताह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर भू-अर्जन प्रक्रिया में तेजी लाने का निर्देश दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर क्षेत्र में बाढ़ के जलग्रहण और 6 अक्टूबर से जारी राज्यस्तरीय अमीनों की हड़ताल ने प्रशासनिक गति को पूरी तरह थाम दिया है।
542 करोड़ का बजटीय आवंटन फिर भी धीमी रफ्तार; सफियासराय में 300 मकानों पर मंडराया संकट
ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना के लिए सरकार की ओर से जिला भू-अर्जन कार्यालय को 542 करोड़ रुपये की राशि आवंटित कर दी गई है। इसके बावजूद मुआवजा वितरण की गति बेहद सुस्त है। विभाग ने सफियासराय, इंद्रुख और चौरदीगर जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तीन दिवसीय विशेष शिविर लगाकर रैयतों से भू-स्वामित्व प्रमाण पत्र (LPC) और दावों से जुड़े दस्तावेज जमा करने की अपील की थी, लेकिन अधिकांश रैयत शिविरों में नहीं पहुंचे।
इस बीच फोरलेन के एलायमेंट के कारण अकेले सफियासराय क्षेत्र में करीब 300 ढांचागत संरचनाएं (मकान, दुकानें और चारदीवारी) हटाई जानी हैं, जिससे प्रभावित परिवारों की चिंताएं और मुआवजा निपटारे को लेकर असमंजस बढ़ता जा रहा है।
4 जिलों से गुजरेगा 4,447 करोड़ का प्रोजेक्ट; एनएचएआई और जिला प्रशासन के सामने समय-सीमा की चुनौती
एनएचएआई की निगरानी में निर्मित होने वाली यह 82.2 किलोमीटर लंबी ग्रीनफील्ड फोरलेन सड़क कुल 4,447 करोड़ रुपये की लागत से चार प्रमुख जिलों से होकर गुजरेगी। इसमें लखीसराय में सर्वाधिक 54.1 किमी, मुंगेर में 17.2 किमी, पटना में 8.5 किमी और शेखपुरा में 2.6 किमी सड़क का निर्माण प्रस्तावित है।
मामले की गंभीरता पर जिला भू-अर्जन पदाधिकारी पंकज गुप्ता ने स्पष्ट किया कि दियारा और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी जमा रहने तथा अमीन संघ के अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले जाने से पैमाइश (मापी) में तकनीकी दिक्कतें आई हैं।
पानी उतरने के साथ ही रैयतवार अधिसूचना जारी कर आपत्तियों का तीव्र गति से निष्पादन किया जा रहा है, ताकि मुआवजा राशि हस्तांतरित कर जमीन का भौतिक कब्जा निर्माण एजेंसी को सौंपा जा सके।
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"मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन योजना स्थल पर बाढ़ का पानी जमा रहने और 6 अक्टूबर से अमीनों के हड़ताल पर रहने से भू-अर्जन के जमीनी सत्यापन में थोड़ी कठिनाई आई है। पानी पूरी तरह निकलने और मापी कार्य बहाल होते ही मुआवजा भुगतान प्रक्रिया में तेजी लाई जाएगी। रैयतों की आपत्तियों का पारदर्शी ढंग से निपटारा हो रहा है।"
