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मोकामा-मुंगेर फोरलेन पर किसानों का हल्लाबोल! घोसैठ में मुआवजे की दर पर सवाल, आवासीय जमीन का मुआवजा देने की मांग

Published: Fri, 09 Oct 2026 08:45 PM (GMT+05:30)

सूर्यगढ़ा के घोसैठ गांव में मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना के भूमि अधिग्रहण पर किसानों ने मुआवजा दरों पर असंतोष व्यक्त ...और पढ़ें

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।

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HighLights

  1. किसानों ने मोकामा-मुंगेर फोरलेन मुआवजा दरों पर असंतोष जताया।

  2. घोसैठ गांव में आवासीय भूमि दर से मुआवजे की मांग की।

  3. प्रभावित किसानों ने सामूहिक आंदोलन की रणनीति बनाई।

संसू., सूर्यगढ़ा (लखीसराय)। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू होते ही मुआवजा दरों को लेकर भू-स्वामियों (रैयतों) का असंतोष और नाराजगी खुलकर सामने आने लगी है।

सूर्यगढ़ा प्रखंड अंतर्गत घोसैठ गांव में गुरुवार को आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में प्रभावित किसानों ने सरकार द्वारा तय की जा रही मुआवजा दरों पर कड़ा ऐतराज जताया। ग्रामीणों का कहना है।

  • सूर्यगढ़ा (लखीसराय) के घोसैठ गांव में मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना के भूमि अधिग्रहण और मुआवजे की दरों पर ग्रामीणों ने जताया विरोध

  • किसानों की मांग: केवल राजस्व वर्गीकरण के बजाय आसपास की स्थिति व बाजार दर को देखते हुए आवासीय भूमि की दर से मिले मुआवजा

  • प्रशासनिक समीक्षा की मांग; अकेले नहीं बल्कि महेशपुर, लोशघानी, शिवनगर समेत आसपास के प्रभावित मौजों के किसानों को एकजुट करने की पहल

  • आगामी रविवार को प्रभावित भू-स्वामियों की बुलाई गई बड़ी बैठक; गुरुवार को हुई बैठक में श्याम सुंदर सिंह, दिवाकर व संजीव सिंह समेत कई किसान रहे मौजूद

फोरलेन जैसी बड़ी और दीर्घकालिक विकास परियोजना के लिए अधिग्रहित की जा रही उनकी कीमती जमीन के बदले मिलने वाली राशि उसकी वास्तविक बाजार दर (Market Value) के अनुरूप होनी चाहिए।

ग्रामीणों ने एक स्वर में जिला प्रशासन से अधिग्रहित की जाने वाली भूमि के लिए कृषि के बजाय 'आवासीय भूमि' की दर से मुआवजा देने की पुरजोर मांग उठाई है।

केवल राजस्व रिकॉर्ड न बने आधार, वास्तविक प्रकृति और बाजार मूल्य देखकर तय हो मुआवजा

घोसैठ गांव में आयोजित बैठक के दौरान भू-स्वामियों ने तर्क दिया कि जमीन की कीमत निर्धारित करते समय जिला प्रशासन को केवल वर्षों पुराने राजस्व वर्गीकरण (सरकारी रिकॉर्ड) को आधार नहीं बनाना चाहिए, बल्कि सड़क के आसपास हो रहे विकास, क्षेत्र की वर्तमान व्यावसायिक स्थिति और जमीनों के असली बाजार मूल्य का निष्पक्ष आकलन किया जाना चाहिए।

किसानों ने कहा कि फोरलेन के निर्माण से उनकी पैतृक जमीनों पर से स्थायी स्वामित्व खत्म हो जाएगा, जिससे उनकी आजीविका प्रभावित होगी। ऐसे में मुआवजा दरों की तुरंत समीक्षा कर रैयतों को न्यायसंगत और उचित आर्थिक भरपाई दी जानी चाहिए।

रविवार को होगी महेशपुर, लोशघानी व शिवनगर के किसानों की बड़ी बैठक; सामूहिक आंदोलन की तैयारी

मुआवजे के इस महत्वपूर्ण सवाल पर प्रशासनिक अधिकारियों तक अपनी आवाज प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए घोसैठ के ग्रामीणों ने अब अकेले नहीं, बल्कि पूरे इलाके के प्रभावित मौजों के साथ सामूहिक रणनीति बनाने की तैयारी शुरू कर दी है।

इसी उद्देश्य को लेकर आगामी रविवार को एक वृहद बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें महेशपुर, लोशघानी, शिवनगर सहित आसपास के अन्य प्रभावित मौजों के भू-स्वामियों और किसानों को आमंत्रित किया गया है। गुरुवार की बैठक में श्याम सुंदर सिंह, दिवाकर सिंह, संजीव सिंह, सुनील सिंह, मंटू सिंह सहित कई प्रमुख ग्रामीण व किसान मौजूद रहे।