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भारतीय रेल के कारखानों की ताकत है जमालपुर जैक, अब डबल बीम और इंटरलाकिंग सिस्टम से बढ़ेगी मजबूती

Published: Wed, 28 Oct 2026 05:55 PM (IST)

जमालपुर रेल कारखाने का प्रसिद्ध 'जमालपुर जैक' अब डबल बीम संरचना और इंटरलॉकिंग प्रणाली के साथ अधिक मजबूत व सुरक्षित ...और पढ़ें

कारखाना में बना रहे जमालपुर जैक,जानकारी देते डिप्टी क्रेन अभिनय, जागरण।

कारखाना में बना रहे जमालपुर जैक,जानकारी देते डिप्टी क्रेन अभिनय, जागरण।

HighLights

  1. जमालपुर जैक को डबल बीम संरचना से बनाया गया मजबूत।

  2. इंटरलाकिंग प्रणाली से सुरक्षा और स्थिरता कई गुना बढ़ी।

  3. भारतीय रेल व अन्य बड़े उद्योगों में जैक की मांग।

संवाद सहयोगी, जमालपुर (मुंगेर)। एशिया के पहले रेल इंजन कारखाने के रूप में ऐतिहासिक पहचान रखने वाला जमालपुर रेल कारखाना अपनी उन्नत तकनीकी दक्षता और विशिष्ट उत्पादों के दम पर एक बार फिर वैश्विक पटल पर नई पहचान गढ़ रहा है। यहां तैयार होने वाले प्रसिद्ध 'जमालपुर जैक' को पहले से अधिक मजबूत, सुरक्षित और बहुउपयोगी बनाया गया है।

बदलती आधुनिक तकनीकी जरूरतों के अनुरूप अब जैक का निर्माण डबल बीम संरचना (Double Beam Structure) और इंटरलॉकिंग प्रणाली के साथ किया जा रहा है।

मुख्य कारखाना प्रबंधक (CWM) विनय प्रसाद वर्णवाल के कुशल नेतृत्व में अधिकारियों व रेल कर्मचारियों की टीम द्वारा नए मॉडल के जमालपुर जैक का उत्पादन किया जा रहा है। भारतीय रेल के साथ-साथ अन्य बड़े औद्योगिक संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

सिंगल बीम से डबल बीम तक का तकनीकी सफर

इससे पहले जमालपुर कारखाने में 20 और 25 टन क्षमता वाले जैक का निर्माण सिंगल बीम संरचना पर किया जाता था। अब इसे डबल बीम तकनीक में तैयार किया जा रहा है। नई बनावट से जैक की मजबूती और स्थिरता (Stability) कई गुना बढ़ गई है।

आधुनिक इंटरलाकिंग प्रणाली के कारण वैगन, भारी रेल इंजन और टावर कार जैसे संवेदनशील और वजनी उपकरणों को उठाने के दौरान दुर्घटना का जोखिम पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।

1962 में शुरू हुआ था निर्माण, अब तक बने 4,500 जैक

जमालपुर जैक का निर्माण पहली बार वर्ष 1962 में शुरू हुआ था और 1964 में इसका वास्तविक रेलवे परिचालन कार्यों में इस्तेमाल आरंभ हुआ। कारखाने में अब तक लगभग 4,500 जैक तैयार किए जा चुके हैं।

एक जमालपुर जैक की निर्धारित कार्य-आयु (Service Life) 36 वर्ष होती है और कारखाना प्रशासन द्वारा निर्मित जैक पर एक वर्ष की आधिकारिक वारंटी भी दी जाती है।

25 टन की कीमत 42 लाख तो 35 टन जैक 53 लाख का

जमालपुर कारखाने में उत्पादित 25 टन क्षमता वाले जैक की कीमत लगभग 42 लाख रुपये, जबकि 35 टन क्षमता वाले जैक की कीमत करीब 53 लाख रुपये है। भारतीय रेल के अलावा इन अत्याधुनिक जैक की आपूर्ति देश की दिग्गज सार्वजनिक कंपनियों जैसे एनटीपीसी (NTPC), सेल (SAIL), डीआरएन (DRN) और विभिन्न निजी औद्योगिक एजेंसियों को भी की जा रही है।

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"कारखाने में निर्मित होने वाले जमालपुर जैक को सुरक्षा के दृष्टिकोण से पहले से अधिक मजबूत और टिकाऊ बनाया गया है। डबल बीम और इंटरलाकिंग प्रणाली से लैस यह नई संरचना भारी उपकरणों को उठाने की प्रक्रिया को बहुत अधिक सुविधाजनक और सुरक्षित बनाएगी। यह बदलाव जमालपुर कारखाने की तकनीकी क्षमता और औद्योगिक उपयोगिता को और अधिक सुदृढ़ करने की दिशा में मील का पत्थर है।"

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— अभिनय कुमार, डिप्टी क्रेन (रेल कारखाना, जमालपुर)