विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

25 साल बाद मुंगेर के ऐतिहासिक किले की खाई की बदलेगी सूरत, बोटिंग-वाकिंग ट्रैक की योजना, अब DM की NOC का इंतजार

Published: Tue, 27 Oct 2026 06:46 PM (IST)

Munger Fort Moat Development: मुंगेर किले की ऐतिहासिक खाई के विकास और सौंदर्यीकरण की उम्मीद 25 साल बाद फिर जगी ...और पढ़ें

Munger Fort Moat Development: मुंगेर के ऐतिहासिक किला का मुख्य प्रवेश द्वार।

Munger Fort Moat Development: मुंगेर के ऐतिहासिक किला का मुख्य प्रवेश द्वार।

HighLights

  1. मुंगेर किले की खाई के विकास की योजना फिर शुरू।

  2. वाकिंग ट्रैक, हरियाली और बोटिंग सुविधा का प्रस्ताव।

  3. डीएम से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) का इंतजार।

संवाद सूत्र, मुंगेर। Munger Fort Moat Development: मुंगेर के ऐतिहासिक किले की खाई के विकास और सुंदरीकरण की उम्मीद एक बार फिर से जाग उठी है। करीब 25 साल पहले भी इसके विकास की पहल शुरू की गई थी, लेकिन किन्हीं कारणों से काम अधूरा रह गया था।

अब नगर निगम ने शहरी चुनौती निधि (UCF) के तहत इस ऐतिहासिक खाई को विकसित करने की रूपरेखा तैयार की है। प्रस्तावित योजना के तहत खाई की सफाई कराने, इसके किनारे पक्का वाकिंग ट्रैक बनाने, हरियाली विकसित करने के साथ-साथ पर्यटकों के लिए बोटिंग (नौकायन) की सुविधा शुरू करने की संभावना तलाशी जा रही है। इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए जिला प्रशासन से अनुमति लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

सफाई से लेकर बोटिंग तक की है योजना

प्रस्तावित योजना के अनुसार, खाई के दोनों किनारों पर सुंदर वाकिंग ट्रैक का निर्माण किया जाएगा और आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए फूल-पौधे लगाए जाएंगे ताकि क्षेत्र का सौंदर्य बढ़ सके।

इसके अलावा खाई में बोटिंग की सुविधा शुरू करने पर भी विचार चल रहा है। चूंकि यह खाई गंगा नदी से जुड़ी हुई है और बाढ़ के दौरान इसमें गंगा का पानी पहुंचता है, इसलिए नौकायन शुरू करने से पहले जलस्तर, पानी के प्रवाह और सुरक्षा से जुड़े सभी तकनीकी पहलुओं का बारीकी से आकलन किया जाएगा।

डीएम से एनओसी के बाद तैयार होगा डीपीआर

इस संबंध में महापौर कुमकुम देवी ने जानकारी दी कि खाई के विकास को लेकर नगर आयुक्त के साथ महत्वपूर्ण चर्चा हुई है। यूसीएफ के तहत एक नंबर ट्रैफिक स्थित राजाबाजार और पूर्वी किला क्षेत्र की खाई का विकास प्रस्तावित है। इसके लिए जिला दंडाधिकारी (DM) निखिल धनराज निप्पाणीकर से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) प्राप्त करने के लिए प्रस्ताव भेजा जा रहा है।

अनुमति मिलने के बाद विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। डीपीआर के फाइनल होने के बाद ही योजना की कुल लागत, बजट आवंटन और निर्माण से जुड़े अन्य तकनीकी विवरण स्पष्ट हो सकेंगे। योजना अभी शुरुआती चरण में है और इसे अंतिम स्वीकृति मिलना बाकी है।

दो दशक पहले भी शुरू हुई थी कोशिश

गौरतलब है कि करीब 25 वर्ष पूर्व भी इस खाई के विकास का कार्य आरंभ हुआ था, लेकिन कुछ बुनियादी कार्य होने के बाद योजना बीच में ही ठप हो गई थी।

अब जबकि नगर निगम ने नए सिरे से कमान संभाली है, तो स्थानीय नागरिकों में एक बार फिर पुराने इतिहास को संवारने की उम्मीद बंध गई है। एनओसी, डीपीआर और अन्य प्रशासनिक स्वीकृतियां मिलने के बाद ही जमीनी स्तर पर विकास कार्य शुरू होने की स्थिति साफ हो पाएगी।

यह भी पढ़ें- Well done सच‍िन! 10 साल साइकिल की दुकान पर बनाता रहा पंक्चर, अब Indian Railway में ट्रेन दौड़ाएगा मुंगेर का लाल