तीसरी-चौथी रेल लाइन बनेगी पूर्व बिहार की इकोनॉमी चेंजर, 200 ट्रेनों के दबाव से मिलेगी राहत
पूर्व बिहार की आर्थिक प्रगति के लिए किऊल से भागलपुर तक तीसरी और किऊल से जमालपुर तक चौथी रेल लाइन की योजना महत्वपूर्ण है।

पूर्व बिहार में तीसरी-चौथी रेल लाइन से आएगी आर्थिक क्रांति
HighLights
किऊल-भागलपुर तीसरी, किऊल-जमालपुर चौथी रेल लाइन प्रस्तावित
जमालपुर-भागलपुर तीसरी लाइन पर ₹1094.53 करोड़ खर्च होंगे
ट्रेनों का दबाव घटेगा, व्यापार-रोजगार के अवसर बढ़ेंगे
संवाद सहयोगी, जमालपुर (मुंगेर)। पूर्व बिहार की आर्थिक प्रगति को नई रफ्तार देने की दिशा में रेलवे की तीसरी और चौथी रेल लाइन की योजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। किऊल से लेकर भागलपुर तक दोनों रेल लाइन के समानांतर तीसरी रेल लाइन प्रस्तावित है।
वहीं, किऊल से जमालपुर तक चौथी रेल लाइन बिछाने का सर्वे हो चुका है। पहले चरण में अभी जमालपुर-भागलपुर रेलखंड पर तीसरी लाइन बिछाई जानी है। लगभग 1094.53 करोड़ रुपये की लागत से 52.81 किलोमीटर लंबी तीसरी लाइन बिछाई जाएगी।
प्रस्तावित नई लाइन न केवल ट्रेनों के परिचालन का दबाव कम करेगी, बल्कि माल ढुलाई को गति देकर व्यापार, उद्योग और रोजगार के नए अवसरों का रास्ता भी खोलेगी।
दरअसल, जमालपुर-किऊल रेलखंड पर तीसरी लाइन के लिए करीब 45 किलोमीटर के हिस्से का सर्वे पूरा हो चुका है। रिपोर्ट तकनीकी जांच के लिए भेजी गई है। इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की जाएगी।
वहीं, जमालपुर-भागलपुर के बीच पर तीसरी लाइन की परियोजना को रेलवे बोर्ड से विशेष परियोजना के रूप में मंजूरी मिल चुकी है। रेलवे ने राइट्स के सहयोग से सर्वेक्षण कराया है। अब भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ निर्माण की राह आसान होने की उम्मीद है।
जमालपुर-भागलपुर रेलखंड की तीसरी लाइन के लिए कुल करीब 155.5984 एकड़ जमीन की आवश्यकता है। इसमें मुंगेर जिले में लगभग 60.32 एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।
प्रस्तावित लाइन वर्तमान रेल लाइन के दक्षिण दिशा में ट्रैक सेंटर से करीब 6.1 मीटर की दूरी पर तीसरी लाइन बिछाई जाएगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद निर्माण कार्य को गति मिलने की उम्मीद है।
रेलवे नेटवर्क मजबूत होने से बढ़ेंगे अवसर
मालदा मंडल के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता ने बताया कि तीसरी-चौथी रेल लाइन और एक और रेल सुरंग निर्माण जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है।
जमालपुर-किऊल सेक्शन में तीसरी और चौथी लाइन तथा जमालपुर-भागलपुर के बीच तीसरी लाइन योजना पर काम चल रहा है।
2029 तक योजना पूरा करने और तीसरे सुरंग से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं को 2030 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
रेलवे की अतिरिक्त क्षमता से पूर्व बिहार के औद्योगिक विकास, बाजारों तक माल की तेज पहुंच और स्थानीय रोजगार की संभावनाओं को मजबूती मिल सकती है।
200 ट्रेनों के दबाव से मिलेगी राहत
वर्तमान में भागलपुर, जमालपुर और किऊल के बीच दोहरी रेल लाइन पर प्रतिदिन लगभग पैसेंजर, एक्सप्रेस, सुपरफास्ट और मालगाड़ी मिलाकर 200 ट्रेनों का संचालन होता है।
सीमित रेल लाइन पर यात्री ट्रेनों और मालगाड़ियों का परिचालन होने से कई बार एक ट्रेन को दूसरी के लिए रोकना पड़ता है। इसका असर अन्य ट्रेनों की आवाजाही पर भी पड़ता है।
तीसरी और चौथी लाइन बनने से ट्रेनों के परिचालन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होगी। इससे समयपालन में सुधार, प्रतीक्षा में कमी और मालगाड़ियों की आवाजाही सुगम होने की संभावना है। ट्रेनों की अधिकतम गति 110 से बढ़ाकर 130 किलोमीटर प्रति घंटे किया जाएगा।
