दो में से तुम्हें क्या चाहिए कलम या कि तलवार... बिहार की दीपशिखा ने कहा- मुझे दोनों चाहिए, फिर तो चारों तरफ जय-जयकार
Laxmi Meri Lado Deepshikha Choudhary munger: जमालपुर की दीपशिखा चौधरी ने तलवारबाजी में राष्ट्रीय स्तर पर कई गोल्ड और सिल्वर ...और पढ़ें

Laxmi Meri Lado Deepshikha Choudhary munger: तलवारबाजी में जमालपुर की दीपशिखा ने रचा इतिहास; गुवाहाटी, केरल और दिल्ली में जीते गोल्ड व सिल्वर मेडल, बेटियों के सम्मान में जले 51 दीप
HighLights
दीपशिखा चौधरी ने तलवारबाजी में राष्ट्रीय मेडल जीते।
जमालपुर की बेटी ने बिहार का नाम रोशन किया।
माता-पिता और कोच को सफलता का श्रेय दिया।
संवाद सूत्र, जमालपुर (मुंगेर)। Laxmi Meri Lado Deepshikha Choudhary munger: बेटियां अब सिर्फ कलम से अपनी तकदीर नहीं संवार रहीं, बल्कि खेल के मैदान में तलवार की धार पर भी सफलता की नई इबारत गढ़ रही हैं। इसकी जीवंत मिसाल बनी हैं जमालपुर के रेलकर्मी विकास चौधरी की बेटी दीपशिखा चौधरी।
तलवारबाजी (फेंसिंग) में अपनी असाधारण प्रतिभा, कड़े अनुशासन और नियमित अभ्यास के दम पर दीपशिखा ने राष्ट्रीय स्तर पर जमालपुर और पूरे बिहार का परचम लहराया है। गुवाहाटी, केरल और राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में आयोजित विभिन्न राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कई गोल्ड और सिल्वर मेडल अपने नाम किए हैं।
दीपशिखा ने अपनी प्रारंभिक स्कूली शिक्षा नोट्रेडेम एकेडमी से पूरी की। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय विद्यालय जमालपुर से प्लस टू की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वह मुंगेर स्थित आरडी एंड डीजे कॉलेज से वाणिज्य संकाय (बी.कॉम) की छात्रा हैं। पढ़ाई और खेल दोनों को समान प्राथमिकता देकर उनके बीच सटीक संतुलन साधना उनकी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। इसी एकाग्रता और लगन ने उन्हें राष्ट्रीय मंच पर सफलता दिलाई है।
दीपशिखा अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय माता-पिता के निरंतर प्रोत्साहन और अपने तलवारबाजी कोच मनोज कुमार के तकनीकी मार्गदर्शन को देती हैं। उनका कहना है कि यदि बेटियों को परिवार का संबल और सही दिशा मिले, तो वे किसी भी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज करा सकती हैं। उनका अगला लक्ष्य तलवारबाजी में और उत्कृष्ट प्रदर्शन कर देश का प्रतिनिधित्व करना है।
प्रबुद्धजनों व छात्राओं ने रखी अपनी बात
बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं (पिंकी पांडे): पर्यावरण प्रहरी पिंकी पांडे ने कहा कि आज के जागरूक अभिभावक बेटा और बेटी में कोई भेदभाव नहीं कर रहे हैं और दोनों को समान शिक्षा व अवसर दे रहे हैं। बच्चों को स्वतंत्रता के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी, नैतिकता और संस्कारों की सीख देना भी उतना ही जरूरी है, ताकि वे सफल होने के साथ अच्छे इंसान बनें।
संस्कार और उच्च शिक्षा से सशक्तिकरण (पूनम कुमारी): दौलतपुर जमालपुर की सामाजिक कार्यकर्ता पूनम कुमारी ने कहा कि बेटियों को उच्च शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्य और संस्कार देना बेहद आवश्यक है। अभिभावकों को उनके स्वावलंबन और आत्मसम्मान पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
प्रतिभा को पहचानें अभिभावक (आराध्या सुमन): डीएवी जमालपुर की छात्रा आराध्या सुमन का कहना है कि बेटियां किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं हैं। जरूरत केवल इस बात की है कि परिजन उनकी अंतर्निहित रुचि और प्रतिभा को पहचानकर उन्हें अपनी क्षमता साबित करने का खुला अवसर दें।
सकारात्मक माहौल निखारता है हुनर (श्वेता कुमारी): रामपुर कॉलोनी की श्वेता कुमारी ने कहा कि सफलता के लिए पारिवारिक माहौल का सकारात्मक होना जरूरी है। अभिभावक बेटियों के सपनों पर विश्वास करें और उनकी प्रतिभा को दबाने के बजाय उसे उचित मंच प्रदान करें।
बेटियों के सम्मान में जले 51 दीप
बेटियों के सम्मान और सुरक्षा का संदेश देने के उद्देश्य से ईस्ट कॉलोनी क्षेत्र के मुंगरौरा टेढ़ी गली स्थित सार्वजनिक बड़ी काली मंदिर परिसर में विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। वार्ड पार्षद नीतू देवी के नेतृत्व में महिलाओं और छात्राओं ने बेटियों के सम्मान में 51 दीप प्रज्वलित किए।
लिया गया उज्ज्वल भविष्य का संकल्प
इस अवसर पर महिलाओं ने मंदिर प्रांगण में रंगोली सजाई और बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा, स्वास्थ्य तथा आत्मनिर्भर भविष्य का सामूहिक संकल्प लिया। उपस्थित लोगों ने एक स्वर में समाज से बेटियों को समान अवसर व अधिकार देने की अपील की। कार्यक्रम में पूजा देवी, आशा देवी, कल्याणी देवी, मंजू देवी, रंभा देवी, खुशी कुमारी, गुड्डी देवी सहित कैलाश उर्फ काली और कुंदन कुमार प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
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