हाइड्रोजन ट्रेन से अमृत भारत तक... AI से पकड़ी जाएगी ट्रेनों में खराबी! जमालपुर इरिमी में तैयार हुआ अगले दशक का खाका
Jamalpur IRIMEE Rolling Stock Seminar: भारतीय रेलवे अगले दशक में पर्यावरण-अनुकूल और ऊर्जा-कुशल ट्रेनों की ओर बढ़ रहा है, जिसमें ...और पढ़ें

Jamalpur IRIMEE Rolling Stock Seminar: इरिमी जमालपुर में हाइड्रोजन ट्रेनसेट और अमृत भारत पर बड़ा तकनीकी मंथन
HighLights
एआई और सेंसर से ट्रेनों में खराबी का पूर्व अनुमान।
हाइड्रोजन ट्रेनसेट और अमृत भारत पर केंद्रित तकनीकी विमर्श।
जमालपुर इरिमी में रेलवे के अगले दशक का रोडमैप।
संवाद सहयोगी, जमालपुर (मुंगेर)। Jamalpur IRIMEE Rolling Stock Seminar: आने वाले दशक में भारतीय पटरियों पर दौड़ने वाली ट्रेनों का स्वरूप पूरी तरह बदलने जा रहा है। ट्रेनें न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा दक्ष होंगी, बल्कि उनमें किसी भी यांत्रिक खराबी का पता इंसानी जांच से पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटल सेंसर लगा लेंगे।
इस आधुनिक बदलाव को अमलीजामा पहनाने के लिए जमालपुर स्थित 'भारतीय रेल यांत्रिक एवं विद्युत अभियंत्रण संस्थान' (इरिमी) में शुक्रवार को 'इंजीनियरिंग रोलिंग स्टाक टेक्नोलाजी' विषय पर उच्चस्तरीय तकनीकी मंथन शुरू हुआ। महानिदेशक अनिमेष कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में आयोजित इस सेमिनार में विभिन्न रेल जोनों के तकनीकी प्रमुखों ने भविष्य की रोलिंग स्टाक प्रणालियों, नई वैगन नीति और यात्री ट्रेनों के नए प्रारूपों का खाका प्रस्तुत किया।
हाइड्रोजन ट्रेनसेट और अमृत भारत पर केंद्रित रहा विमर्श
सेमिनार में पहुंचे विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि भारतीय रेल का लक्ष्य अब केवल ट्रेनों की रफ्तार और संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि शून्य कार्बन उत्सर्जन और उच्च ऊर्जा दक्षता हासिल करना है। इस दिशा में हाइड्रोजन आधारित ट्रेनसेट रेलवे के बदलाव का सबसे बड़ा आधार बनने जा रही है।
तकनीकी सत्रों में हाइड्रोजन ट्रेनों की ईंधन क्षमता, सुरक्षा मानकों और उनके संचालन तंत्र पर गहन विचार हुआ। इसके साथ ही आम जनता के लिए किफायती व तीव्र गति वाली 'अमृत भारत' ट्रेनों की कपलिंग, पुश-पुल तकनीक, उन्नत प्रोपल्शन प्रणाली और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर तकनीकी विशेषज्ञों ने अपने सुझाव साझा किए।
एआई और IoT से होगा 'प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस', रुकेगी अचानक विफलता
तकनीकी विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि भविष्य के रेल तंत्र में एआई (AI), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) और आधुनिक डेटा एनालिसिस की भूमिका रीढ़ की तरह होगी। अब ट्रेनों के कोच, पहियों, एक्सल और इंजनों में ऐसे डिजिटल सेंसर जोड़े जा रहे हैं, जो रनिंग कंडीशन में ही संभावित खराबी को भांप लेंगे।
इस 'प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस' तकनीक से यात्रा के दौरान अचानक ट्रेन के बीच रास्ते में खराब (En-route Failure) होने की समस्या खत्म होगी। इससे न केवल ट्रेनों की पंक्चुअलिटी सुधरेगी, बल्कि डिपो में होने वाले मरम्मत खर्च और समय में भारी कमी आएगी। नई वैगन नीति के तहत अधिक भार वहन करने वाले हल्के और आधुनिक मालगाड़ी वैगनों के निर्माण पर भी विस्तार से चर्चा की गई।
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कई जोनों के तकनीकी प्रमुखों ने साझा किए अनुभव
इस तकनीकी सत्र में विशिष्ट अतिथि के रूप में दक्षिण पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक पी. अनंत और दक्षिण रेलवे के महाप्रबंधक जी. सुब्बाराव ने अपने व्यावहारिक अनुभव साझा किए। वहीं तकनीकी सत्रों में मेट्रो रेलवे कोलकाता के प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर (पीसीएमई) सुब्रतो सरकार, पूर्व मध्य रेलवे के पीसीएमई अतुल प्रियदर्शनी और मालदा रेल मंडल के डीआरएम मनीष कुमार गुप्ता ने अपने-अपने अधिकार क्षेत्रों में चल रहे नवाचारों की जानकारी दी।
इस दौरान इरिमी के डीन प्रेम प्रकाश, वरिष्ठ प्रोफेसर राजीव कुमार और जमालपुर रेल कारखाना के मुख्य कारखाना प्रबंधक (सीडब्ल्यूएम) विनय प्रसाद वर्णवाल ने कार्यशालाओं में बनने वाले उपकरणों की गुणवत्ता और आधुनिकीकरण की चुनौतियों पर अपनी बात रखी।
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