मां का संस्कार और पिता का हौसला मिला तो मधुबनी की दो बहनों ने रचा इतिहास, एक बनीं डॉक्टर दूसरी कांस्टेबल
Inspiring Sisters Bihar:झंझारपुर, मधुबनी की दो बहनों सुमिति और श्रुति ने अपने माता-पिता के सहयोग से चिकित्सा और पुलिस सेवा ...और पढ़ें

एक बेटी चिकित्सा के क्षेत्र में भविष्य संवार रही हैं तो दूसरी ने पुलिस सेवा में परिवार और समाज का गौरव बढ़ाया है। (AI Generated Image)
HighLights
सुमिति कुमारी नालंदा मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस छात्रा बनीं।
श्रुति कुमारी कटिहार महिला थाना में कांस्टेबल के पद पर।
माता-पिता के प्रोत्साहन से बेटियों ने हासिल की बड़ी सफलता।
देवकांत मुन्ना, झंझारपुर (मधुबनी)। Medical And Police Career: बेटियां अगर ठान लें तो सफलता की राह में कोई बाधा उन्हें रोक नहीं सकती। जरूरत होती है परिवार के विश्वास, प्रोत्साहन और बेटियों को आगे बढ़ने का अवसर देने की।
झंझारपुर नगर परिषद के वार्ड संख्या आठ निवासी सदन चन्द्र बरनवाल और किरण बरनवाल की दो बेटियों ने अपनी मेहनत, मेधा और लगन से इसी विश्वास को साकार कर दिखाया है।

श्रुति कुमारी (सौ. स्वजन)
समाज का गौरव बढ़ाया
एक बेटी चिकित्सा के क्षेत्र में अपना भविष्य संवार रही हैं तो दूसरी ने पुलिस सेवा में कदम रखकर परिवार और समाज का गौरव बढ़ाया है। दोनों बहनों की उपलब्धि आज बरनवाल समाज की ही नहीं, बल्कि क्षेत्र की उन तमाम बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है जो बड़े सपने देखती हैं और उन्हें पूरा करने का हौसला रखती हैं।
सुमिति कुमारी ने चिकित्सा के प्रतिष्ठित क्षेत्र में अपनी जगह बनाई है। वह नालंदा मेडिकल कॉलेज, पटना में एमबीबीएस (बैच 2024-29) की छात्रा हैं। उनकी प्रारंभिक शैक्षणिक यात्रा भी झंझारपुर से ही शुरू हुई।
उन्होंने वर्ष 2020 में बीएन झा डॉन वास्को कॉन्वेंट स्कूल, कन्हौली से 10वीं और वर्ष 2022 में पार्वती लक्ष्मी कन्या उच्च विद्यालय से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की।

सुमिति कुमारी (सौ. स्वजन)
मेहनत से अर्जित की सफलता
मेधावी छात्रा रहीं सुमिति ने लगातार मेहनत के दम पर मेडिकल की पढ़ाई तक का सफर तय किया। वहीं, उनकी बड़ी बहन श्रुति कुमारी ने पुलिस सेवा में अपना स्थान बनाया है। वह कटिहार महिला थाना में कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं।
श्रुति ने वर्ष 2018 में बीएन झा डॉन वास्को कॉन्वेंट स्कूल, कन्हौली से दसवीं और वर्ष 2020 में पार्वती लक्ष्मी कन्या उच्च विद्यालय से बारहवीं की परीक्षा पास की थी। पढ़ाई के दौरान वह भी अपनी कक्षा की मेधावी छात्राओं में शामिल रही हैं।
माता-पिता की समान भूमिका
इन दोनों बेटियों की सफलता के पीछे माता-पिता का समान रूप से महत्वपूर्ण योगदान रहा है। मां किरण बरनवाल पूर्व में झंझारपुर नगर पंचायत की मुख्य पार्षद रह चुकी हैं। राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी रहने के बावजूद उन्होंने बेटियों की शिक्षा और भविष्य को हमेशा प्राथमिकता दी।
वहीं, पिता सदन चन्द्र बरनवाल ने बेटियों के सपनों को पंख देने में कोई कसर नहीं छोड़ी। माता-पिता के सहयोग, विश्वास और प्रोत्साहन ने दोनों बहनों को अपने लक्ष्य तक पहुंचने का संबल दिया।

पिता सदनचंद्र एवं मां किरण बरनवाल (सौ स्वजन)
बेटी परिवार की ताकत
दो बेटियां, दो अलग-अलग कार्यक्षेत्र और सफलता का एक साझा संदेश यह है कि बेटियों को अवसर और भरोसा मिले तो वे परिवार ही नहीं पूरे समाज का नाम रोशन कर सकती हैं।
सुमिति और श्रुति की उपलब्धि उन अभिभावकों के लिए भी प्रेरक संदेश है जो आज भी बेटियों की शिक्षा और करियर को लेकर सीमित सोच रखते हैं।
इन दोनों बहनों ने साबित किया है कि बेटी किसी परिवार की जिम्मेदारी भर नहीं बल्कि उसकी सबसे बड़ी ताकत और पहचान भी बन सकती है।
संसाधनों की नहीं, सोच की कमी
मुखिया वीणा देवी और दिलीप कुमार झा का मानना है कि गांव की बेटियों में प्रतिभा की कोई कमी नहीं होती। जरूरत केवल परिवार के सहयोग और समाज की सकारात्मक सोच की है, ताकि अभावों को पीछे छोड़कर बेटियां नई ऊंचाइयां छू सकें।
सपनों को पंख
मुखिया रूद्रकांत झा और उषा देवी ने कहा कि महंगे संसाधनों से ज्यादा जरूरी परिवार का भरोसा और प्रोत्साहन है। सही मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण बेटियां भी हर क्षेत्र में इतिहास रच सकती हैं।
बदलाव की बयार
एचआर मैनेजर संदीप कुमार झा और विद्यालय निदेशक प्रबिंद कुमार ने कहा कि जब ग्रामीण बेटियां आगे बढ़ती हैं, तो वह केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं होती, बल्कि पूरे समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए उम्मीद की एक नई रोशनी बनती है।
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