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श्रीलंका में बिहार के कलाकार रेमंत मिश्र करेंगे भारतीय कला का प्रदर्शन, 7 देशों में दिखा चुके हैं हुनर

Published: Thu, 15 Oct 2026 09:47 PM (GMT+05:30)

मधुबनी के हस्तशिल्प कलाकार रेमंत कुमार मिश्र को श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प व्यापार मेले 'सीलोन ...और पढ़ें

Madhubani Artist International Recognition : रेमंत कुमार मिश्रा : सौ. स्वयं।

Madhubani Artist International Recognition : रेमंत कुमार मिश्रा : सौ. स्वयं। 

जागरण संवाददाता, मधुबनी। Indian Artist in Sri Lanka : बिहार में मधुबनी जिले के जितवारपुर निवासी हस्तशिल्प कलाकार रेमंत कुमार मिश्र को श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय हस्तशिल्प व्यापार मेले ‘सीलोन क्राफ्ट वीक 2026’ में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।

29 अक्टूबर से एक नवंबर तक आयोजित होने वाले इस मेले में वह भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा परंपरा का प्रतिनिधित्व करेंगे।

भारतीय उच्चायोग, कोलंबो स्थित स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र ने 30 सितंबर को जारी आमंत्रण पत्र में उनकी भागीदारी की पुष्टि की है।

मेले का संयुक्त आयोजन श्रीलंका सरकार के उद्योग एवं उद्यमिता विकास मंत्रालय के अंतर्गत राष्ट्रीय शिल्प परिषद और भारतीय उच्चायोग का स्वामी विवेकानंद सांस्कृतिक केंद्र कर रहे हैं।

इसमें हस्तनिर्मित शिल्प एवं हथकरघा उत्पादों का प्रदर्शन होगा। आयोजन का उद्देश्य भारत और श्रीलंका की पारंपरिक कला एवं सांस्कृतिक विरासत के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है। वह श्रीलंका के लिए 28 अक्टूबर को नई दिल्ली से उड़ान भरेंगे।

आवास व परिवहन की मुफ्त व्यवस्था रहेगी

आयोजकों की ओर से प्रतिभागियों को साझा आवास, प्रदर्शनी स्थल, निर्धारित तिथियों पर हवाई अड्डे से आने-जाने की सुविधा तथा सुबह का नाश्ता और रात का भोजन उपलब्ध कराया जाएगा। प्रतिभागियों को 28 अक्टूबर की दोपहर कोलंबो पहुंचना और दो नवंबर की दोपहर लौटना है। अतिरिक्त ठहराव का खर्च स्वयं वहन करना होगा।

सात देशों में कर चुके हैं कला प्रदर्शन

रेमंत कुमार मिश्र इटली, मॉरीशस, सिंगापुर, श्रीलंका, चीन, संयुक्त अरब अमीरात और मलेशिया में कला प्रदर्शनियों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों एवं कला परियोजनाओं में भाग ले चुके हैं।

वर्ष 2019 में इटली के बारी अंतरराष्ट्रीय कला महोत्सव और वर्ष 2018 में मॉरीशस के सरकारी कला आदान-प्रदान कार्यक्रम तथा सिंगापुर के अंतरराष्ट्रीय लोककला मेले में उनकी सहभागिता रही।

श्रीलंका और चीन में वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी कला परियोजनाओं के अलावा उन्होंने संयुक्त अरब अमीरात और मलेशिया में मिथिला लोककला की प्रदर्शनियों में भी योगदान दिया है।

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