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समस्तीपुर के डा. दीपक ने रचा इतिहास, लगातार तीन साल दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों में बनाई जगह

Published: Mon, 12 Oct 2026 08:53 PM (IST)

समस्तीपुर के राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. दीपक कुमार मंडल को लगातार तीन वर्षों तक दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है।

डा. दीपक कुमार मंडल। सौजन्य : स्वयं

डा. दीपक कुमार मंडल। सौजन्य : स्वयं

HighLights

  1. डॉ. दीपक मंडल लगातार तीन साल शीर्ष वैज्ञानिकों में।

  2. मैकेनिकल इंजीनियरिंग में वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई।

  3. समस्तीपुर कॉलेज और जिले के लिए गौरव का क्षण।

संवाद सहयोगी, सरायरंजन (समस्तीपुर)। प्रतिभा जब शोध और नवाचार के साथ आगे बढ़ती है, तो उसकी पहचान देश की सीमाओं तक सिमटकर नहीं रह जाती। समस्तीपुर के एक शिक्षक ने अपनी अकादमिक उपलब्धियों से वैश्विक स्तर पर अलग पहचान बनाई है।

नरघोघी स्थित राजकीय अभियंत्रण महाविद्यालय, समस्तीपुर के प्रभारी प्राचार्य डा. दीपक कुमार मंडल को लगातार तीन वर्षों तक दुनिया के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में जगह मिली है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग के क्षेत्र में उनकी यह उपलब्धि जिले के साथ संस्थान के लिए भी गौरव का विषय है।

तीन वर्षों तक कायम रहा उत्कृष्ट प्रदर्शन

मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डा. मंडल को वर्ष 2024, 2025 और 2026 में लगातार इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल किया गया। लगातार तीन वर्षों तक स्थान बनाए रखना उनके शोध कार्यों और वैज्ञानिक योगदान की निरंतरता को दर्शाता है।

वैश्विक रैंकिंग में बनाई जगह

उपलब्ध प्रोफाइल के अनुसार, डा. मंडल की वैश्विक रैंक 1,68,598 है, जबकि संबंधित उपक्षेत्र में उनकी रैंक 1,608 दर्ज है। उनका एच-इंडेक्स 14 और एचएम-इंडेक्स 6 है। ये सूचकांक शोध प्रकाशनों, उनके उद्धरणों और अकादमिक प्रभाव का आकलन करने में उपयोग किए जाते हैं।

शोध और अकादमिक योगदान का आकलन

विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची एल्सेवियर के डेटा और स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं से जुड़े विश्लेषण पर आधारित है। इसमें वैज्ञानिकों के शोध प्रकाशनों, उद्धरणों और निर्धारित मानकों के आधार पर उनके योगदान का मूल्यांकन किया जाता है।

डा. मंडल की यह उपलब्धि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में शोध और वैज्ञानिक गतिविधियों के महत्व को रेखांकित करती है। उनके लगातार बेहतर प्रदर्शन से संस्थान की अकादमिक पहचान को भी मजबूती मिली है।