दरभंगा के डा. संतोष का दुनिया में डंका, लगातार तीसरी बार विश्व के शीर्ष वैज्ञानिकों में बनाई जगह
World Top 2 Percentage Scientists : दरभंगा के पैगंबरपुर गांव के डॉ. संतोष कुमार को लगातार तीसरी बार विश्व के ...और पढ़ें

Dr Santosh Kumar : दरभंगा जिले के केवटी निवासी डा. संतोष कुमार।
HighLights
डॉ. संतोष कुमार तीसरी बार विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों में शामिल।
खाद्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी में 652वीं वैश्विक रैंक प्राप्त की।
खाद्य संरक्षण और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग पर शोध के लिए पहचान।
संवाद सहयोगी, केवटी (दरभंगा)। Stanford University and Elsevier : दुनिया भर के विज्ञानियों के बीच अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाना आसान नहीं, लेकिन दरभंगा के केवटी स्थित पैगंबरपुर गांव के डा. संतोष कुमार ने लगातार तीसरी बार यह उपलब्धि हासिल कर सबका ध्यान खींचा है।
खाद्य पदार्थों को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और पर्यावरण अनुकूल पैकेजिंग तकनीक विकसित करने पर शोध कर रहे डा. संतोष को विश्व के शीर्ष दो प्रतिशत विज्ञानियों की सूची में जगह मिली है।
फूड साइंस एंड टेक्नोलाजी के क्षेत्र में 652वीं वैश्विक रैंक हासिल कर उन्होंने अपनी शोध प्रतिभा की अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है।
केंद्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कोकराझार (असम) के खाद्य अभियांत्रिकी एवं प्रौद्योगिकी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डा. संतोष कुमार ने अपनी शैक्षणिक एवं शोध यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है।
उन्हें लगातार तीसरी बार विश्व के शीर्ष 2% वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किया गया है। इस सूची में उन्होंने फूड साइंस एंड टेक्नोलाजी के क्षेत्र में विश्व स्तर पर 652 वीं रैंक प्राप्त की है।
डा. कुमार का शोध मुख्य रूप से टिकाऊ खाद्य पैकेजिंग, जैव-अपघटनीय सामग्री, खाद्य-योग्य फिल्मों एवं कोटिंग्स, सक्रिय एवं स्मार्ट पैकेजिंग प्रणालियों व खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, सुरक्षा और भंडारण अवधि बढ़ाने वाली नवीन तकनीकों पर केंद्रित है।
उनका कार्य खाद्य उद्योग की उभरती चुनौतियों के समाधान के लिए पर्यावरण -अनुकूल पैकेजिंग सामग्री और टिकाऊ खाद्य संरक्षण तकनीकों के विकास पर विशेष जोर देता है।
उन्होंने बायोपालिमर-आधारित पैकेजिंग, खाद्य पदार्थों की ताजगी की निगरानी के लिए प्राकृतिक वर्णकों के उपयोग, रोगाणुरोधी एवं एंटीआक्सीडेंट पैकेजिंग प्रणालियों, प्राकृतिक संसाधनों और खाद्य प्रसंस्करण से प्राप्त उप-उत्पादों के उपयोग द्वारा मूल्यवर्धित सामग्री के विकास पर केंद्रित है।
यह खाद्य हानि एवं अपव्यय को कम करने व पर्यावरण के प्रति उत्तरदायी खाद्य पैकेजिंग तकनीकों को बढ़ावा देने जैसे व्यापक सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप है। उनका शोध कार्य अंतरराष्ट्रीय पहचान और खाद्य विज्ञान व प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में विज्ञानी उत्कृष्टता, नवाचार एवं सतत विकास के प्रति प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है।
इससे शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण व प्रभावशाली शोध के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास में योगदान देने के लिए प्रेरणा मिलेगी।
मूलरूप से केवटी प्रखंड के पैगंबरपुर गांव निवासी जमादार साह के पुत्र संतोष ने बताया कि वर्ष 2011 के मई से सेंट्रल इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाजी कोकराझार, असम में कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय माता-पिता, परिवार के सदस्यों गुरुजनों, साथी शोधकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को दिया है।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर के सहयोग से तैयार की है सूची
बताते हैं कि विश्व के सर्वाधिक प्रभावशाली विज्ञानियों की यह सूची अमेरिका की स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी और एल्सेवियर के सहयोग से तैयार की जाती है।
इसमें मानकीकृत उद्धरण संकेतकों तथा वैज्ञानिक शोध के प्रभाव को दर्शाने वाले बिब्लियोमीट्रिक आंकड़ों के आधार पर विज्ञानियों के योगदान का आकलन किया जाता है। इस सूची में डा. कुमार का लगातार तीसरी बार शामिल किए गए हैं।
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