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इंडो-नेपाल बॉर्डर के स्टेशनों पर सुरक्षा राम भरोसे, मधुबनी में 2 साल बाद भी GRP को नहीं हुआ हैंडओवर

Published: Sat, 31 Oct 2026 03:23 PM (IST)

झंझारपुर-लौकहा बाजार रेलखंड पर ट्रेनों के परिचालन के दो साल बाद भी खुटौना और लौकहा बाजार स्टेशनों को जीआरपी को ...और पढ़ें

स्टेशनों पर सुरक्षा राम भरोसे (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

स्टेशनों पर सुरक्षा राम भरोसे (एआई जेनरेटेड तस्वीर)

HighLights

  1. खुटौना-लौकहा बाजार स्टेशनों पर दो साल से जीआरपी हैंडओवर नहीं।

  2. नेपाल सीमा से सटे स्टेशनों पर सुरक्षा और सुविधाओं का अभाव।

  3. हाल ही में ट्रेन पलटाने की साजिश से यात्रियों में दहशत।

संवाद सहयोगी, खुटौना। झंझारपुर-लौकहा बाजार रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन शुरू हुए करीब दो वर्ष बीत चुका है। इस रूट पर पैसेंजर के साथ-साथ लंबी दूरी की ट्रेनें भी दौड़ रही हैं, लेकिन अब तक नेपाल सीमा से सटे खुटौना और लौकहा बाजार रेलवे स्टेशन का चार्ज जीआरपी को नहीं सौंपा गया है।

लौकहा बाजार स्टेशन तो बिल्कुल नेपाल की सीमा से लगा आखिरी स्टेशन है। नेपाल के यात्री भी इस स्टेशन का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में यहां की सुरक्षा को लेकर अनदेखी हैरान करने वाली है और यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

हाल में ट्रेन पलटाने की साजिश

हाल में महरैल स्टेशन के पास रेलवे पटरी पर सीमेंट का टुकड़ा रखकर ट्रेन पलटाने की साजिश की घटना सामने आई थी। इस घटना के बाद से यात्रियों में दहशत है। ऐसे में प्रमुख स्टेशनों पर सुरक्षा और निगरानी की जरूरत और बढ़ गई है, लेकिन जिम्मेदारी को लेकर असमंजस बना हुआ है।

इस संबंध में खुटौना थानाध्यक्ष राकेश कुमार पासवान ने बताया कि रेलवे क्षेत्र में स्थानीय पुलिस की जिम्मेदारी केवल ब्लॉक एरिया तक सीमित है। मतलब स्टेशन की बाहरी सीमा, प्लेटफार्म से बाहर, यार्ड, रेलवे क्रॉसिंग और सड़क वाला हिस्सा ही स्थानीय थाना के अधीन है। जबकि सर्कुलेटिंग एरिया यानी स्टेशन परिसर, प्लेटफॉर्म, टिकट काउंटर, वेटिंग हॉल, रेलवे ट्रैक और ट्रेन के अंदर की सुरक्षा जीआरपी और आरपीएफ की होती है। 

लौकहा थानाध्यक्ष धीरज कुमार ने भी यही बात दोहराई। उन्होंने बताया कि पुलिस की ओर से लगातार गश्ती की जाती है, लेकिन रेलवे परिसर की सुरक्षा की मुख्य जिम्मेदारी जीआरपी की होती है। जब तक चार्ज हैंडओवर नहीं होता, तब तक सुरक्षा व्यवस्था अधूरी ही रहेगी।

बुनियादी सुविधा भी बदहाल

सुरक्षा के साथ-साथ दोनों स्टेशनों पर सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। खुटौना रेलवे स्टेशन पर एक तरफ का हाईमास्ट लाइट लंबे समय से खराब पड़ा है। रात होते ही स्टेशन परिसर के एक बड़े हिस्से में अंधेरा पसर जाता है। इसका फायदा असामाजिक तत्व उठा सकते हैं।

स्टेशन के अंडरपास में जलजमाव की समस्या स्थायी बन गई है। बरसात के दिनों में वहां घुटने भर पानी जमा हो जाता है, और रोशनी की भी व्यवस्था नहीं है। महिलाओं और बुजुर्ग यात्रियों को इससे सबसे ज्यादा परेशानी होती है। कमोबेश यही हाल लौकहा बाजार रेलवे स्टेशन का भी है।

स्थानीय लोगों ने रेल प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द दोनों स्टेशनों का चार्ज जीआरपी को सौंपा जाए और खराब लाइट व जलजमाव की समस्या दूर की जाए।

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