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तानों से एशियन मेडल तक! मधेपुरा की सोनी राज ने 20 हजार बेटियों को बनाया निडर, अब छात्राएं जीत रहीं मेडल

Published: Sun, 11 Oct 2026 11:07 AM (GMT+05:30)

मधेपुरा की शारीरिक शिक्षा शिक्षिका सोनी राज ने सामाजिक बाधाओं को पार कर एशियन सेम्बो चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता ...और पढ़ें

मधेपुरा में बेटियों को कराटे और आत्मरक्षा के गुर सिखातीं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एवं शिक्षिका सोनी राज हैं।

मधेपुरा में बेटियों को कराटे और आत्मरक्षा के गुर सिखातीं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एवं शिक्षिका सोनी राज हैं।

HighLights

  1. सोनी राज ने एशियन सेम्बो चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।

  2. 20 हजार से अधिक बेटियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दिया।

  3. 'राज एकेडमी' की छात्राएं अब राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत रही हैं।

संवाद सहयोगी, मधेपुरा। दुर्गा पूजा के पावन अवसर पर जहां एक ओर मां दुर्गा की आराधना और नारी शक्ति के सम्मान की बात होती है, वहीं दूसरी ओर इसका वास्तविक अर्थ हर बेटी को आगे बढ़ने, अपने सपनों को पंख देने और अपनी छिपी हुई क्षमता को पहचानने का अवसर देना है।

मधेपुरा की रहने वाली सोनी राज इसी जुझारू सोच और महिला सशक्तिकरण की एक जीवंत मिसाल हैं। समाज के दबी-छिपी तानों, रूढ़िवादी सोच और तमाम कठिनाइयों का डटकर मुकाबला करते हुए उन्होंने अपने सपनों का पीछा किया और आज वे हजारों बेटियों के लिए स्वावलंबन व सुरक्षा का पर्याय बन चुकी हैं।

एक समय था जब लड़कियों के खेलकूद में हिस्सा लेने पर तरह-तरह के सवाल उठाए जाते थे। ऐसे विपरीत माहौल में सोनी ने घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर अपने दम पर कुछ कर दिखाने का संकल्प लिया।

  • मधेपुरा जिले की शारीरिक शिक्षा शिक्षिका सोनी राज ने कठिन संघर्ष और सामाजिक बाधाओं को पार कर बनाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

  • एशियन सेम्बो चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के साथ श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसी अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में किया भारत का प्रतिनिधित्व

  • महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित एचवीपीएम (अमरावती) से फिजिकल एजुकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त कर अबी सरकारी विद्यालय में दे रही हैं सेवाएं

  • मधेपुरा में 'राज एकेडमी ऑफ मार्शल आर्ट्स' की स्थापना कर अब तक 20 हजार से अधिक बेटियों और महिला सिपाहियों को दे चुकी हैं आत्मरक्षा का प्रशिक्षण

बचपन में उन्होंने बार-बार यह सुना कि लड़कियों को पढ़कर क्या करना है, उन्हें तो सिर्फ घर संभालना है। इन बातों ने उन्हें अंदर से झकझोर जरूर दिया, लेकिन यही कसक उनके भीतर एक मजबूत हौसला और जिद बन गई।

कराटे से मिला अटूट आत्मविश्वास; एशियन सेम्बो चैंपियनशिप में जीता कांस्य पदक

सोनी के लिए कराटे केवल एक खेल नहीं, बल्कि अपने आत्मसम्मान, रक्षा और आत्मविश्वास को हासिल करने का सबसे बड़ा जरिया साबित हुआ। अपनी कड़ी मेहनत, अटूट अनुशासन और नियमित अभ्यास के बल पर उन्होंने राष्ट्रीय फलक को पार करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया।

उन्होंने 'एशियन सेम्बो चैंपियनशिप' में देश के लिए कांस्य पदक जीतकर अपनी असाधारण प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके अलावा उन्होंने श्रीलंका और इंडोनेशिया में आयोजित कई प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भी अपनी शानदार मौजूदगी दर्ज कराई।

शारीरिक शिक्षा के क्षेत्र में उच्च दक्षता हासिल करने के लिए उन्होंने महाराष्ट्र के प्रतिष्ठित 'श्री हनुमान व्यायाम प्रसारक मंडल, अमरावती' (HVPM) से मास्टर डिग्री पूरी की। वर्तमान में वह बिहार सरकार के अंतर्गत राम हंस उच्च माध्यमिक विद्यालय, चतरा (ग्वालपाड़ा, मधेपुरा) में शारीरिक शिक्षा शिक्षिका के पद पर कार्यरत हैं।

20 हजार से अधिक बेटियों को दिया प्रशिक्षण; 'राज एकेडमी' की छात्राएं जीत रहीं मेडल

सोनी यह अच्छी तरह जानती थीं कि एक अकेली महिला की सफलता तभी सार्थक है जब वह समाज की अन्य बहनों और बेटियों को भी अपने पैरों पर खड़ा होने का मौका दे। इसी उद्देश्य से उन्होंने बालिकाओं और महिलाओं को आत्मरक्षा (Self-Defense) का निःशुल्क और विशेष प्रशिक्षण देना शुरू किया।

वह अब तक 20 हजार से अधिक स्कूली बेटियों और महिला पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षित कर चुकी हैं। उनका दृढ़ विश्वास है कि आज के समय में हर लड़की को अपनी सुरक्षा के लिए शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत होना बेहद आवश्यक है। इस मुहिम को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने मधेपुरा में आधुनिक सुविधाओं से लैस 'राज एकेडमी ऑफ मार्शल आर्ट्स' की स्थापना की है।

इस अकादमी से प्रशिक्षित होने वाली सानवी राय, काव्या भारती, चित्रा झा, सात वर्षीय अद्विका, अपर्णा भारती और संध्या कुमारी जैसी नन्हीं और युवा होनहार बेटियां जिला, राज्य, प्रमंडल तथा राष्ट्रीय स्तर की कराटे व खेल प्रतियोगिताओं में स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक जीतकर मधेपुरा और पूरे बिहार का मान बढ़ा रही हैं।

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"बेटियों को केवल सुरक्षा की नहीं, बल्कि उन्हें खुद इतना सक्षम बनाने की जरूरत है कि वे हर परिस्थिति का डटकर मुकाबला कर सकें। मेरा लक्ष्य मधेपुरा और पूरे बिहार की हर बेटी को आत्मरक्षा के हुनर से लैस कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।"

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— सोनी राज, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी एवं शारीरिक शिक्षा शिक्षिका (मधेपुरा)