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एक हावड़ा में तो दूसरी पटना में कर रहीं MBBS; मधेपुरा की दो बहनों ने क्रैक किया NEET, बोलीं मां- मेरी प्‍यारी लाडो

Published: Mon, 02 Nov 2026 06:59 AM (IST)

Success Story Madhepura: मधेपुरा की दो सगी बहनों, कुमारी मुस्कान और अनुष्का आनंद ने एक साथ नीट परीक्षा पास कर ...और पढ़ें

Success Story Madhepura: कुमारी मुस्कान और अनुष्का आनंद।

Success Story Madhepura: कुमारी मुस्कान और अनुष्का आनंद।

HighLights

  1. मधेपुरा की दो बहनों ने एक साथ NEET पास की।

  2. एक हावड़ा, दूसरी पटना में MBBS की पढ़ाई कर रही हैं।

  3. मां के संघर्ष और विश्वास से बेटियों ने सपना पूरा किया।

संवाद सूत्र, बिहारीगंज (मधेपुरा)। Success Story Madhepura:  यदि हौसले बुलंद हों और इरादे फौलादी, तो ग्रामीण परिवेश की चुनौतियां और सीमित संसाधन भी सफलता की राह में रुकावट नहीं बन सकते। मधेपुरा जिले के बिहारीगंज नगर पंचायत अंतर्गत कुश्थन गांव की दो सगी बहनों ने अपनी अटूट मेहनत से इसे सच कर दिखाया है।

शिक्षक प्रभाष चन्द्र भास्कर और शिक्षिका वीणा भारती की होनहार बेटियों—कुमारी मुस्कान और अनुष्का आनंद ने एक साथ नीट (NEET) परीक्षा पास कर न केवल अपने परिवार, बल्कि पूरे कोसी क्षेत्र का नाम रोशन किया है। आज दोनों बहनें चिकित्सा सेवा को अपना जीवन संकल्प बनाकर डॉक्टर बनने की राह पर अग्रसर हैं।

दोनों बहनों ने वर्ष 2022 की नीट परीक्षा में एक साथ सफलता हासिल कर यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन और दृढ़ संकल्प से किसी भी बड़े लक्ष्य को भेदा जा सकता है।

एक हावड़ा तो दूसरी पटना में कर रही हैं MBBS की पढ़ाई

शैक्षणिक पृष्ठभूमि की बात करें तो बड़ी बहन कुमारी मुस्कान ने वर्ष 2017 में मैट्रिक और 2019 में इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्कृष्ट अंकों के साथ उत्तीर्ण की थी। वहीं छोटी बहन अनुष्का आनंद ने वर्ष 2019 में मैट्रिक और 2021 में इंटरमीडिएट पास किया।

वर्ष 2022 में नीट में शानदार रैंक हासिल करने के बाद मुस्कान का चयन पश्चिम बंगाल के हावड़ा स्थित उलुबेरिया मेडिकल कॉलेज में हुआ, जहां वे एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं। वहीं छोटी बहन अनुष्का आनंद बिहार की राजधानी पटना के बिहटा स्थित प्रतिष्ठित ईएसआईसी (ESIC) मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एमबीबीएस के फाइनल वर्ष की छात्रा हैं। दोनों बहनें अपने-अपने संस्थानों में अकादमिक रूप से उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं।

'बेटियों को बाहर भेजने की हिचक तोड़ी'

दोनों बहनों की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनकी मां वीणा भारती का अटूट विश्वास और संघर्ष रहा है। शिक्षिका वीणा भारती बताती हैं कि ग्रामीण समाज में आज भी बेटियों को उच्च व तकनीकी शिक्षा के लिए घर से दूर बड़े शहरों में भेजने को लेकर एक सामाजिक हिचक और संकोच का माहौल रहता है।

लेकिन उन्होंने समाज की इस सोच की परवाह किए बिना अपनी दोनों बेटियों की प्रतिभा पर पूरा भरोसा जताया। बेटियों के डॉक्टर बनने के सपने को साकार करने के लिए उन्होंने दोनों को राजस्थान के कोटा भेजा और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के दौरान हर मोड़ पर एक ढाल की तरह उनके साथ खड़ी रहीं। वे कहती हैं कि गांव की इन दोनों बेटियों ने यह सिद्ध कर दिया है कि बेटियां मान और स्वाभिमान का प्रतीक हैं और वे साक्षात लक्ष्मी का रूप हैं।

गरीबों की सेवा और स्वास्थ्य जागरूकता फैलाना मुख्य प्राथमिकता

मुस्कान और अनुष्का दोनों का स्पष्ट कहना है कि डॉक्टर की डिग्री उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति उनका दायित्व है। वे बताती हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और सही चिकित्सकीय परामर्श का भारी अभाव है। जानकारी के अभाव में लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं।

डिग्री पूरी करने के बाद समाज में स्वास्थ्य के प्रति व्यापक जागरूकता फैलाना और गरीब, असहाय व वंचित वर्ग के मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी। गांव की इन दो बेटियों की सफलता आज इलाके की अन्य बालिकाओं के लिए उच्च शिक्षा की नई प्रेरणा बन गई है।

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