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हाथी और मुर्गे ने दिया बड़ा संकेत! दुर्गा पूजा 2026 में राजनीतिक उठापटक के आसार, 11 से 20 अक्टूबर तक रखें ध्यान

Published: Thu, 01 Oct 2026 04:03 PM (GMT+05:30)

Shardiya Navratri 2026 : शारदीय नवरात्र 2026 की तैयारियां मधेपुरा में जोर-शोर से चल रही हैं, जो 11 अक्टूबर से ...और पढ़ें

Shardiya Navratri 2026 : दुर्गा पूजा की तैयारी प्रारंभ हो गई है।

Shardiya Navratri 2026 : दुर्गा पूजा की तैयारी प्रारंभ हो गई है।

HighLights

  1. शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से 20 अक्टूबर तक मनाया जाएगा।

  2. मां दुर्गा का आगमन हाथी पर, समृद्धि और अच्छी वर्षा का संकेत।

  3. मुर्गे पर विदाई से राजनीतिक अस्थिरता और रोग बढ़ने की संभावना।

संवाद सूत्र, बिहारीगंज (मधेपुरा)। Shardiya Navratri 2026 : आस्था और शक्ति की उपासना के महापर्व शारदीय नवरात्र को लेकर तैयारियां जोर-शोर से प्रारंभ हो गई हैं। विभिन्न पूजा समितियों द्वारा पंडालों के निर्माण, मंदिर परिसरों की भव्य साज-सज्जा और प्रकाश व्यवस्था को लेकर बैठकों का दौर जारी है।

इस वर्ष शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 11 अक्टूबर से होने जा रहा है। इसी दिन शुभ मुहूर्त में घटस्थापना (कलश स्थापना) के साथ मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप शैलपुत्री की विधिवत आराधना की जाएगी। वहीं, 20 अक्टूबर को विजयादशमी (दशहरा) का पर्व श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाया जाएगा।

किसानों की चमकेगी किस्मत

धार्मिक मान्यताओं और पंचांगीय गणना के अनुसार, इस वर्ष जगतजननी मां दुर्गा का भूलोक पर आगमन गज यानी हाथी पर हो रहा है, जबकि माता की विदाई मुर्गे (चरणायुध) पर होगी। ज्योतिषशास्त्र में माता के अलग-अलग वाहनों पर आगमन और प्रस्थान का देश-दुनिया, राजा और प्रजा पर गहरा प्रभाव माना गया है।

हाथी पर आगमन लाएगा खुशहाली

पंचांग के जानकारों के मुताबिक, जब मां दुर्गा का आगमन हाथी पर होता है, तो वह वर्ष आर्थिक और प्राकृतिक दृष्टिकोण से अत्यंत मंगलकारी माना जाता है। हाथी ज्ञान, वैभव, शांति और वर्षा का प्रतीक है।

गज पर देवी के आगमन से देश में पर्याप्त मानसूनी बारिश, कृषि पैदावार में वृद्धि और खाद्यान्न के भंडार भरने के संकेत मिलते हैं। इससे विशेषकर अन्नदाता किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बड़ा संबल मिलेगा तथा जन-जीवन में सुख-शांति का संचार होगा।

शारदीय नवरात्र 2026: मुख्य तिथियां व सवारी का फल

  • कलश स्थापना व प्रतिपदा: 11 अक्टूबर (मां शैलपुत्री की पूजा)

  • महाअष्टमी: मिथिला पंचांग के अनुसार दो दिन मान्य

  • विजयादशमी / दशहरा: 20 अक्टूबर (नवरात्र समापन)

  • माता का आगमन: हाथी (गज), फल: अच्छी वर्षा, बंपर पैदावार, किसानों को लाभ व आर्थिक समृद्धि।

  • माता का गमन (विदाई): मुर्गा (चरणायुध), फल: जनमानस में व्याधि/रोग, शोक, सामाजिक तनाव और भारी राजनीतिक उठा-पटक की संभावना।

मुर्गा पर विदाई से सियासी उथल-पुथल और रोग की आशंका

वहीं दूसरी ओर, माता की विदाई मुर्गे पर होना ज्योतिषीय दृष्टि से शुभ संकेत नहीं माना जाता है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, जब देवी मुर्गे पर प्रस्थान करती हैं, तो राष्ट्र और समाज में अशांति, रोग, शोक और प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ जाता है। विशेष रूप से यह स्थिति शासन-प्रशासन और सत्ता तंत्र में अस्थिरता का कारक बनती है।

इसके प्रभाव से देश और राज्यों में अप्रत्याशित राजनीतिक उठा-पटक, आपसी खींचतान और नीतिगत टकराव की स्थितियां उत्पन्न होने की आशंका बनी रहती है।

मंदिरों में मूर्तिकार व्यस्त

मधेपुरा बिहारीगंज के सार्वजनिक दुर्गा मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित मुरारी झा ने बताया कि इस वर्ष मिथिला पंचांग के अनुसार अष्टमी तिथि दो दिन मान्य रहेगी। उन्होंने बताया कि माता का गज पर आगमन जहां प्रजा व राजा दोनों के लिए लाभकारी है, वहीं मुर्गे पर विदाई आम जनता के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव और राजनीतिक हलचल को जन्म दे सकती है। नवरात्र का विधिवत समापन 20 अक्टूबर को होगा।

अष्टमी तिथि दो दिन मान्य

इधर, बिहारीगंज नगर पंचायत स्थित ऐतिहासिक सार्वजनिक दुर्गा मंदिर, रेलवे दुर्गा मंदिर और बभनगामा दुर्गा मंदिर सहित ग्रामीण इलाकों में मूर्तिकार माता की भव्य प्रतिमाओं को गढ़ने में दिन-रात जुटे हुए हैं। पूजा कमेटियों द्वारा श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और सांस्कृतिक आयोजनों की रूपरेखा तय की जा रही है।

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