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शारदीय नवरात्रि 2026 : हाथी पर आगमन और मंगलवार को गमन अति शुभ; महाअष्टमी, महानवमी और विसर्जन की तिथियों का रखें ध्‍यान

Published: Tue, 29 Sep 2026 02:34 PM (IST)

Shardiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि 2026 को लेकर धार्मिक उत्साह चरम पर है, जहां मां दुर्गा का आगमन गज पर ...और पढ़ें

Shardiya Navratri 2026: 11 अक्टूबर से होगी मां दुर्गा की आराधना।

Shardiya Navratri 2026: 11 अक्टूबर से होगी मां दुर्गा की आराधना।

HighLights

  1. मां दुर्गा का गज पर आगमन, सुख-समृद्धि का मंगलकारी संदेश।

  2. कलश स्थापना 11 अक्टूबर, महासप्तमी 17 अक्टूबर को होगी।

  3. महाअष्टमी 18, महानवमी 19 अक्टूबर; विजयादशमी तिथि पर मतभेद।

संवाद सूत्र, नवहट्टा (सहरसा)। Shardiya Navratri 2026: आश्विन मास की शारदीय नवरात्रि को लेकर सहरसा सहित कोसी अंचल के शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में धार्मिक उत्साह चरम पर है। मंदिरों और पूजा पंडालों में भव्य तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इस वर्ष जगतजननी मां दुर्गा का आगमन गज (हाथी) पर हो रहा है।

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार जब माता का वाहन हाथी होता है, तो वह देश-समाज में प्रचुर वर्षा, कृषि उपज में वृद्धि, सुख-समृद्धि और धन-धान्य की परिपूर्णता का मंगलकारी संदेश लेकर आता है। रविवार को देवी का आगमन और मंगलवार को प्रस्थान दोनों ही श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत फलदायी माना गया है।

शारदीय नवरात्रि का महापर्व 11 अक्टूबर, रविवार से प्रारंभ होगा। इसी दिन विधि-विधान से कलश स्थापना के साथ प्रथम स्वरूपा मां शैलपुत्री की उपासना की जाएगी।

कलश स्थापना के शुभ मुहूर्त

आचार्य बमबम झा के अनुसार, 11 अक्टूबर को कलश स्थापना के लिए सुबह 07:03 बजे से लेकर सूर्यास्त तक का समय अत्यंत प्रशस्त है।

  • प्रथम प्रातःकालीन मुहूर्त: सुबह 06:31 बजे से 11:00 बजे तक।

  • अभिजीत मुहूर्त (सर्वश्रेष्ठ): पूर्वाह्न 11:35 बजे से दोपहर 12:23 बजे तक।

बिल्वाभिमंत्रण से लेकर पट खुलने और महानिशा पूजा तक का क्रम

  • 16 अक्टूबर (शुक्रवार): दोपहर 02:00 बजे से शाम 06:00 बजे तक मां दुर्गा के आह्वान हेतु बिल्वाभिमंत्रण पूजन संपन्न होगा।

  • 17 अक्टूबर (शनिवार): महासप्तमी के दिन मां कालरात्रि की पूजा, डोली यात्रा, नवपत्रिका प्रवेश एवं प्रतिमाओं में प्राण-प्रतिष्ठा के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ देवी के पट खोल दिए जाएंगे।

  • 18 अक्टूबर (रविवार): महाअष्टमी का व्रत रखा जाएगा। इस दिन मां महागौरी का पूजन, कन्या (कुमारिका) पूजन और मध्य रात्रि 11:00 बजे से देर रात 01:30 बजे तक तंत्र-साधना का केंद्र महानिशा पूजन होगा।

  • 19 अक्टूबर (सोमवार): महानवमी व्रत एवं नवरात्रि का विशेष हवन अनुष्ठान संपन्न किया जाएगा।

विजयादशमी व विसर्जन को लेकर पंचांग मतभेद

नवरात्र हवन की पूर्णाहुति 20 अक्टूबर की सुबह 09:40 बजे की जाएगी। विजयादशमी और प्रतिमा विसर्जन की तिथि को लेकर पंचांगों में थोड़ा मतभेद है। आचार्य बमबम झा ने बताया कि मिथिला पंचांग के अनुसार उदया तिथि की मान्यता के चलते 21 अक्टूबर (बुधवार) को विजयादशमी मनाई जाएगी तथा इसी दिन कलश व मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन होगा।

वहीं, काशी पंचांग को मानने वाले स्थानों पर श्रवण नक्षत्र के संयोग के आधार पर 20 अक्टूबर (मंगलवार) को ही विजयादशमी का पर्व मनाया जाएगा।