दीपावली से पहले लौटी ठंड, बारिश से धान-पटसन पर आफत! मधेपुरा में चक्रवात अर्णब का असर, 36 घंटे से नहीं निकली धूप
Cyclone Arnab Impact Madhepura: चक्रवाती तूफान 'अर्णब' के प्रभाव से मधेपुरा सहित कोसी क्षेत्र में समय से पहले कड़ाके की ...और पढ़ें

Cyclone Arnab Impact Madhepura: चक्रवात अर्णव के असर से मधेपुरा में बढ़ी ठंड
HighLights
चक्रवात अर्णव से मधेपुरा में समय से पहले कड़ाके की ठंड।
लगातार बारिश से धान और पटसन की फसलें प्रभावित।
बाजारों में सन्नाटा, स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति घटी।
संवाद सूत्र, उदाकिशुनगंज (मधेपुरा)। Cyclone Arnab Impact Madhepura: चक्रवाती तूफान 'अर्णव' के प्रभाव से मधेपुरा सहित सीमांचल और कोसी के इलाकों में मौसम ने अचानक करवट ले ली है। उदाकिशुनगंज अनुमंडल क्षेत्र में पिछले तीन दिनों से लगातार रुक-रुक कर हो रही बूंदाबांदी और बर्फीली पछुआ हवाओं के कारण समय से पहले ही कड़ाके की ठंड ने दस्तक दे दी है।
शुक्रवार को लगातार तीसरे दिन भी आसमान में काले बादलों का डेरा रहा और सूर्यदेव के दर्शन नहीं हुए। 36 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बाद भी मौसम साफ न होने से जहां आम जनजीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है, वहीं खेतों में तैयार खड़ी धान और पटसन की फसल पर आफत आ गई है।
आमतौर पर इलाके में छठ और दीपावली के बाद ठंड का एहसास होता था, लेकिन इस बार चक्रवात के असर ने अक्टूबर के अंत में ही लोगों को गर्म कपड़े और चादर ओढ़ने पर मजबूर कर दिया है।
बाजारों में सन्नाटा, स्कूलों में घटी बच्चों की उपस्थिति
लगातार हो रही हल्की बारिश और ठंडी हवाओं का व्यापक असर बाजार, स्कूल और सरकारी दफ्तरों में देखने को मिला। शुक्रवार को मुख्य सड़कों पर सामान्य दिनों की तुलना में वाहनों की आवाजाही काफी कम रही। दुकानों में ग्राहकों का टोटा रहा और बाजारों में सन्नाटा पसरा दिखा।
ठंड और बारिश के चलते सरकारी व निजी स्कूलों में छात्र-छात्राओं की उपस्थिति में भारी गिरावट दर्ज की गई। वहीं, दिहाड़ी मजदूरों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया, क्योंकि लगातार पानी बरसने के कारण निर्माण और मजदूरी से जुड़े अधिकांश कार्य पूरी तरह ठप रहे।
धान और पटसन पर संकट, पानी में सड़ने लगी फसल
इस बेमौसम बारिश ने अन्नदाताओं की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ा दी है। प्रखंड क्षेत्र में इस वर्ष करीब 8,742 हेक्टेयर में धान की बुआई हुई थी। कई किसानों ने हाल ही में फसल काटकर खेतों में सुखाने के लिए रखी थी, जो लगातार हो रही बूंदाबांदी से भीग गई है। इसके अलावा आधे से अधिक खेतों में अभी धान की फसल खड़ी है, जिसकी कटाई बारिश के कारण रुक गई है।
दूसरी ओर, पटसन (पटुआ) की खेती करने वाले किसान सबसे अधिक मुश्किल में हैं। छिलाई के लिए जलस्रोतों और पोखरों में दबाकर रखी गई तैयार पटसन खराब मौसम और ठंड के चलते वहीं फंसी है। मजदूर ठंड और पानी के कारण छिलाई के लिए आगे नहीं आ रहे हैं, जिससे लंबे समय तक डूबे रहने के कारण पटसन के सड़ने और रेशा काला पड़ने की गंभीर आशंका बन गई है।
साफ मौसम का इंतजार, कृषि पदाधिकारी ने दी सलाह
प्रखंड कृषि पदाधिकारी राजेश कुमार ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है। उन्होंने बताया कि चूंकि अभी तक भारी मूसलाधार बारिश नहीं हुई है, इसलिए फसलों को बेहद बड़ा संरचनात्मक नुकसान नहीं पहुंचा है।
हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि यदि मौसम अगले 24 से 48 घंटे में नहीं खुला, तो खेतों में कटी धान में अंकुरण होने और पटसन की गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ जाएगा। कृषि विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि वे खेतों में पानी जमा न होने दें और मौसम साफ होते ही फसलों को सुरक्षित स्थानों पर सुखाने की व्यवस्था करें।
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