बीएनएमयू में 2 असिस्टेंट प्रोफेसरों की चयन अनुशंसा रद; नेट की जगह लगाया एनसीएल, समाजशास्त्र में डिग्री निकली अलग
BNMU Assistant Professor Selection Cancelled BSUSC: बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग ने बीएनएमयू में दो संविदा सहायक प्राध्यापकों का चयन ...और पढ़ें

BNMU Assistant Professor Selection Cancelled BSUSC: बीएनएमयू में 2 असिस्टेंट प्रोफेसरों की चयन अनुशंसा रद
HighLights
बीएनएमयू में दो सहायक प्राध्यापकों की अनुशंसा रद्द।
नेट की जगह एनसीएल प्रमाणपत्र जमा किया गया।
समाजशास्त्र पद पर शिक्षा शास्त्र की डिग्री पाई गई।
संवाद सहयोगी, मधेपुरा। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (बीएसयूएससी), पटना ने भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (बीएनएमयू) अंतर्गत प्रखंड स्तरीय राजकीय डिग्री महाविद्यालयों के लिए चयनित दो संविदा सहायक प्राध्यापकों के चयन एवं नियुक्ति की अनुशंसा को आधिकारिक रूप से रद्द कर दिया है।
इतिहास विषय के लिए अनुशंसित आरती कुमारी राज एवं समाजशास्त्र विषय के लिए चयनित सुशील कुमार राय के आवेदन और शैक्षणिक दस्तावेजों में गंभीर विसंगतियां सामने आने के बाद यह सख्त कदम उठाया गया है। आयोग द्वारा जारी आवश्यक सूचना के अनुसार, बीएनएमयू कुलसचिव की ओर से 9 अगस्त को भेजे गए आपत्ति पत्र के आलोक में दोनों अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की गहन समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया।
नेट की जगह लगा दिया एनसीएल सर्टिफिकेट
दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन में विश्वविद्यालय प्रशासन ने पाया कि इतिहास विषय के लिए चयनित अभ्यर्थी आरती कुमारी राज संविदा असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवश्यक यूजीसी नेट (UGC NET) की न्यूनतम अर्हता पूरी नहीं करती थीं।
उन्होंने ऑनलाइन आवेदन भरते समय नेट से संबंधित कॉलम में नेट प्रमाणपत्र के स्थान पर एनसीएल (नॉन-क्रीमी लेयर) प्रमाणपत्र संलग्न कर दिया था। हद तो तब हो गई जब काउंसलिंग और भौतिक सत्यापन के समय भी वे नेट से जुड़ा कोई वैध प्रमाणपत्र प्रस्तुत नहीं कर सकीं। इसके बावजूद आयोग स्तर से उनकी नियुक्ति की अनुशंसा कर दी गई थी।
समाजशास्त्र के पद पर शिक्षा शास्त्र की डिग्री, संकाय भिन्न होने पर फंसा पेंच
वहीं, दूसरे मामले में सुशील कुमार राय ने समाजशास्त्र विषय के संविदा सहायक प्राध्यापक पद के लिए आवेदन किया था। लेकिन प्रमाणपत्रों की पड़ताल में पता चला कि उन्होंने समाजशास्त्र के बजाय शिक्षा शास्त्र संकाय (एजुकेशन) में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने स्पष्ट किया कि शिक्षा शास्त्र संकाय की उपाधि सामाजिक विज्ञान संकाय के अंतर्गत आने वाले समाजशास्त्र विषय की अपेक्षित पात्रता से पूरी तरह अलग और अमान्य है।
कुलसचिव के पत्र के बाद आयोग का एक्शन
बीएनएमयू में योगदान और दस्तावेज मिलान के दौरान जब यह फर्जीवाड़ा उजागर हुआ, तो कुलसचिव ने तत्काल प्रभाव से दोनों अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर रोक लगाते हुए 9 अगस्त को आयोग को पत्र लिखा। पत्र में दोनों की अनुशंसा रद्द या वापस लेने का औपचारिक अनुरोध किया गया था। कुलसचिव की तथ्यात्मक रिपोर्ट पर विचार करते हुए आयोग ने दोनों की चयन अनुशंसा निरस्त कर दी है।
सत्यापन में भी नहीं दिखा सकीं प्रमाण
हालांकि, बीएनएमयू प्रशासन की सतर्कता से अपात्र अभ्यर्थियों की नियुक्ति टल गई है, लेकिन इस पूरे प्रकरण ने प्रखंड स्तरीय डिग्री महाविद्यालयों के लिए हुई संविदा भर्ती में आयोग स्तर पर हुई स्क्रूटनी और दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा जगत में यह चर्चा जोरों पर है कि प्रारंभिक जांच के दौरान इतनी बड़ी चूक कैसे अनदेखी रह गई।
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