बिहार में बाढ़ के स्थाई समाधान की बड़ी पहल, डिप्टी सीएम विजय चौधरी से मिले डॉ. प्रिंस, सौंपी विस्तृत रिसर्च रिपोर्ट
प्रो. डॉ. प्रिंस फिरोज अहमद ने बिहार में बाढ़ के दीर्घकालिक समाधान हेतु गंगा नदी की जलवैज्ञानिक और भू-आकृतिक गतिशीलता पर एक विस्तृत शोध-पांडुलिपि उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को सौंपी।

उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी को गंगा नदी पर तैयार शोध-पांडुलिपि सौंपते डा. प्रिंस फिरोज अहमद।
HighLights
डॉ. प्रिंस ने बाढ़ समाधान पर उपमुख्यमंत्री को शोध रिपोर्ट सौंपी।
गंगा नदी की जलवैज्ञानिक और भू-आकृतिक गतिशीलता पर केंद्रित अध्ययन।
बक्सर-फरक्का गंगा कॉरिडोर का समेकित अध्ययन प्रस्तावित किया गया।
संवाद सहयोगी, मधेपुरा। बिहार में हर साल तबाही मचाने वाली बाढ़ के दीर्घकालिक और वैज्ञानिक समाधान के साथ-साथ गंगा नदी के बदलते स्वरूप को समझने के लिए एक बड़ी अकादमिक पहल की गई है।
डिजास्टर मैनेजमेंट स्टडीज एंड रिसर्च सेंटर, पटना के निदेशक और भूपेंद्र नारायण मंडल विश्वविद्यालय (मधेपुरा) के सहायक प्राध्यापक प्रो. डा. प्रिंस फिरोज अहमद ने बक्सर से फरक्का तक गंगा की जलवैज्ञानिक और भू-आकृतिक गतिशीलता तथा बिहार में बाढ़ के जोखिम पर एक विस्तृत शोध-पांडुलिपि तैयार की है।
इसी सिलसिले में डा. प्रिंस फिरोज अहमद ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सह जल संसाधन मंत्री विजय कुमार चौधरी से औपचारिक मुलाकात कर अपनी यह महत्वपूर्ण शोध-पांडुलिपि प्रस्तुत की।
उपमुख्यमंत्री ने शोध के विषय और उसके वैज्ञानिक दृष्टिकोण की काफी सराहना की और इस विषय पर आगे की रणनीति तय करने के लिए आगामी 30 अक्टूबर को पटना के चाणक्य होटल में आयोजित प्रस्तावित विशेष बैठक में उन्हें आमंत्रित किया है।
580 किलोमीटर लंबे बक्सर–फरक्का गंगा कॉरिडोर का समेकित अध्ययन
प्रो. डा. प्रिंस फिरोज अहमद के अनुसार, इस शोध में लगभग 580 किलोमीटर लंबे बक्सर–फरक्का गंगा गलियारे को मुख्य केंद्र में रखा गया है। इसमें नदी के जलप्रवाह, अवसाद (गाद) संचय, नदी तल में आ रहे बदलाव, और घाघरा, गंडक, कोसी तथा सोन जैसी प्रमुख सहायक नदियों के योगदान के साथ गंगा की बदलती भू-आकृति का समेकित अध्ययन प्रस्तावित किया गया है।
शोध का मुख्य दृष्टिकोण यह है कि बिहार में बाढ़ की समस्या को केवल भारी बारिश, जलस्तर या तटबंधों के पारंपरिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। इसके लिए प्राकृतिक प्रक्रियाओं, नदी प्रबंधन और बाढ़-मैदान की संवेदनशीलता का वैज्ञानिक अध्ययन बेहद जरूरी है।
फरक्का बैराज की भूमिका को भी किसी पूर्वनिर्धारित निष्कर्ष के बजाय वास्तविक जलवैज्ञानिक आंकड़ों, नदी तल के सर्वेक्षण और वैज्ञानिक मॉडलिंग के आधार पर परखने की सिफारिश की गई है।
एकीकृत नदी निगरानी प्रणाली विकसित करने की जरूरत
डा. प्रिंस फिरोज अहमद ने बक्सर से फरक्का तक एक एकीकृत नदी निगरानी एवं अनुसंधान प्रणाली विकसित करने पर जोर दिया है। उन्होंने प्रस्तावित 'बक्सर–फरक्का गंगा बाढ़ जोखिम मॉडल' के जरिए नदी के व्यवहार, सटीक बाढ़ पूर्वानुमान और जोखिम न्यूनीकरण के अध्ययन को आगे बढ़ाने की परिकल्पना पेश की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक अनुसंधान, सरकारी नीतियों और स्थानीय स्तर पर बाढ़ प्रबंधन के बीच बेहतर तालमेल बिठाकर ही बिहार को बाढ़ के स्थायी दंश से मुक्ति दिलाई जा सकती है।
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