मोकामा-मुंगेर हाईवे: जमीन अधिग्रहण पर किसानों का हल्लाबोल, कहा- विकास से बैर नहीं, पर नाइंसाफी मंजूर नहीं
लखीसराय में मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण के बीच किसानों ने उचित मुआवजे की मांग तेज कर दी है।

ग्रीनफील्ड हाईवे मुआवजा: लखीसराय के किसानों ने उठाई आवाज, कहा- नाइंसाफी बर्दाश्त नहीं (AI Generated Image)
HighLights
किसानों ने मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड हाईवे मुआवजे की मांग की।
जिलाधिकारी को आवेदन सौंपकर पुनः सर्वेक्षण की अपील की।
आवासीय दर पर भूमि मूल्यांकन की मांग, नाइंसाफी अस्वीकार्य।
संवाद सहयोगी, लखीसराय। मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण के बीच मुआवजे को लेकर किसानों ने अपनी मांग तेज कर दी है। जिले के नौ मौजों के प्रभावित किसानों ने जमीन का पुनः सर्वेक्षण कराकर आवासीय दर के आधार पर मुआवजा निर्धारित करने की मांग की है।
शुक्रवार को करीब 160 किसानों के हस्ताक्षरयुक्त संयुक्त आवेदन जिलाधिकारी को सौंपकर उन्होंने भूमि के मूल्यांकन में वास्तविक स्थिति और विकास की संभावनाओं को ध्यान में रखने की मांग की।
किसानों ने स्पष्ट किया कि वे सड़क परियोजना के विरोध में नहीं हैं, लेकिन जमीन के मूल्यांकन और मुआवजे में किसी तरह की नाइंसाफी स्वीकार नहीं करेंगे।
किसानों का कहना है कि भूमि के मूल्यांकन में केवल पुराने दरों को आधार बनाने के बजाय उसकी वर्तमान प्रकृति, आसपास की आबादी, सड़क से जुड़ाव और क्षेत्र में हुए विकास को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
इसके लिए प्रभावित जमीन का वास्तविक स्थिति के आधार पर दोबारा सर्वेक्षण कराने और उपलब्ध तुलनीय साक्ष्यों के अनुसार मुआवजे का निष्पक्ष निर्धारण करने की मांग की गई है।
किसानों के प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, जिलाधिकारी ने आवेदन प्राप्त करने के बाद इस मामले में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) से बात करने का आश्वासन दिया।
मुआवजे के साथ खेतों तक पहुंच का भी सवाल
किसानों की आपत्तियां केवल मुआवजे तक सीमित नहीं हैं। ग्रीनफील्ड सड़क निर्माण के बाद खेतों तक पहुंच, सर्विस रोड और अंडरपास की व्यवस्था तथा अधिग्रहण के बाद बचने वाली जमीन की उपयोगिता को लेकर भी उन्होंने चिंता जताई है।
किसानों का कहना है कि सड़क निर्माण के कारण यदि खेतों तक पहुंच बाधित होती है या शेष जमीन का कृषि उपयोग प्रभावित होता है, तो इन समस्याओं का समाधान भी योजना के स्तर पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
संयुक्त आवेदन के साथ प्रगतिशील किसान मोर्चा की ओर से पहले सौंपा गया आवेदन भी संलग्न किया गया है। उस आवेदन पर 102 किसानों के हस्ताक्षर थे।
इसमें उचित मुआवजे के अलावा किसानों की जनसुनवाई, कृषि और पर्यावरण से जुड़ी समस्याओं तथा अधिग्रहण के प्रभावों पर विचार करने की मांग की गई थी। किसानों ने प्रशासन से सभी आपत्तियों पर बिंदुवार विचार कर समाधान की पहल करने का आग्रह किया है।
नौ मौजों के किसान एकजुट, आयुक्त से भी मिलेंगे
संयुक्त आवेदन नौ मौजों के प्रभावित किसानों की ओर से दिया गया है। इनमें बिशुनपुर (थाना संख्या 86), राजपुर (83), लोशघानी (69), घोसैठ (72), महेशपुर (64), बिशुनपुर (73), कस्बा (63), महा (61) और मसूदन (58) शामिल हैं।
प्रतिनिधिमंडल में श्याम सुंदर सिंह, विभाकर सिंह, जयंत, रवीश कुमार रंजन, सुनील सिंह, जवाहर सिंह, रौशन, सावन, राकेश और राजकमल राकेश सहित अन्य किसान मौजूद थे।
प्रगतिशील किसान मोर्चा की ओर से कौशिक सिंह, रामस्वार्थ सिंह सहित अन्य लोग उपस्थित रहे। किसानों ने बताया कि वे अपनी मांगों को लेकर शीघ्र ही मुंगेर के आयुक्त को भी आवेदन सौंपेंगे।
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