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मुंगेर मरीन ड्राइव पर 'कागजी' ब्रेक: न खतियान मिल रहा, न नक्शा; कैसे पूरा होगा CM का ड्रीम प्रोजेक्ट?

Published: Fri, 16 Oct 2026 05:11 PM (IST)

मुंगेर में गंगा किनारे मरीन ड्राइव परियोजना के भूमि अधिग्रहण में पुरानी जमीन के कागजात (खतियान, नक्शे) न मिलने से बड़ी बाधा आ रही है।

मुंगेर मरीन ड्राइव पर 'कागजी' ब्रेक (AI Generated Image)

मुंगेर मरीन ड्राइव पर 'कागजी' ब्रेक (AI Generated Image)

HighLights

  1. मुंगेर गंगा पथवे परियोजना में भूमि अधिग्रहण बाधित।

  2. पुरानी जमीन के खतियान और नक्शे गायब।

  3. विकास और कनेक्टिविटी पर पड़ रहा असर।

मनोज कुमार, मुंगेर। गंगा किनारे मरीन ड्राइव बनने से मुंगेर की सूरत बदलने और विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है, लेकिन इस महत्वाकांक्षी परियोजना की राह में जमीन के पुराने कागजात बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं।

कहीं खतियान नहीं मिल रहा तो कहीं जमीन का नक्शा गायब है। ऐसे में सरकारी और रैयती जमीन की पहचान से लेकर भू-स्वामियों के सत्यापन तक की प्रक्रिया उलझ गई है।

मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल मुंगेर-सबौर गंगा पथवे के पहले फेज का काम मुंगेर-घोरघट के बीच नवंबर माह से शुरू करने की तैयारी है, लेकिन इससे पहले भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी करना प्रशासन के लिए चुनौती होगी।

83 किलोमीटर लंबे मुंगेर-सबौर गंगा पथवे के पहले चरण में मुंगेर के हेरू दियारा से घोरघट तक 42 किलोमीटर सड़क का निर्माण प्रस्तावित है। पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 4849 हजार करोड़ खर्च होगा।

मुंगेर जिले में हेरूदियारा से घोरघट तक गंगा किनारे 38 मौजा में कुल 223.1021 एकड़ यानी 90.264 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है।

निर्माण एजेंसी बिहार रोड कंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बीआरसीडी) ने भूमि अधिग्रहण के लिए भू-अर्जन कार्यालय को अधियाचना भेजी है। अब जमीन के दस्तावेज जुटाने और रैयतों की पहचान करने की कवायद चल रही है।

खोज रहे खतियान, नहीं मिल रहा कागजात

पुराने अभिलेखों की कमी का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि भू-अर्जन कार्यालय के कर्मियों ने नगर निगम के रिकार्ड रूम प्रभारी और अमीन के साथ लगातार दो दिन तक जमीन के खतियान और नक्शे की तलाश की। इसके बावजूद कई जमीनों के पुराने दस्तावेज नहीं मिल सके।

सदर अंचल के तारापुर दियारा और बरियारपुर अंचल के बिन्दा दियारा का नक्शा भी नहीं मिल पा रहा है। अभिलेख उपलब्ध नहीं होने से यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि अधिग्रहण के दायरे में आने वाली जमीन सरकारी है या निजी।

जमीन की प्रकृति और स्वामित्व स्पष्ट नहीं होने पर रैयतों का सत्यापन भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है। ऐसे में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में देरी की आशंका बढ़ गई है।

14 किलोमीटर में रैयती जमीन का अधिग्रहण

मुंगेर नगर निगम क्षेत्र में हेरूदियारा से लाल दरवाजा तक गंगा किनारे लगभग 14 किलोमीटर क्षेत्र में दो हिस्सों में जमीन का अधिग्रहण प्रस्तावित है।

उपलब्ध विवरण के अनुसार, पहले हिस्से में 0.7164 हेक्टेयर और दूसरे हिस्से में 0.4399 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की जानी है। इस क्षेत्र में गैरमजरूआ जमीन का हिस्सा महज 0.8 प्रतिशत बताया गया है।

शेष जमीन रैयती है, जिसके अधिग्रहण के बदले संबंधित भू-स्वामियों को मुआवजा दिया जाना है, लेकिन पुराने खतियान और नक्शे के अभाव में जमीन के वास्तविक मालिकों की पहचान करना आसान नहीं है।

मुआवजा भुगतान से पहले दस्तावेजों के आधार पर स्वामित्व की जांच और रैयतों से संबंधित विवरण जुटाना अनिवार्य है।

कागजात से तय होगी मुआवजे की राह

भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण चरण रैयतों की पहचान और जमीन के स्वामित्व का सत्यापन है। इसके बाद मुआवजे का अंतिम आकलन तैयार कर बीआरसीडी को भेजा जाएगा।

राशि आवंटित होने पर भू-स्वामियों को भुगतान किया जाएगा। ऐसे में पुराने अभिलेखों की खोज और जमीन का सत्यापन परियोजना की समय-सीमा के लिहाज से अहम हो गया है।

मरीन ड्राइव से बदलेगी मुंगेर की सूरत

गंगा किनारे प्रस्तावित मरीन ड्राइव केवल सड़क परियोजना नहीं, बल्कि मुंगेर के लिए विकास का नया गलियारा साबित हो सकता है। बेहतर सड़क संपर्क से मुंगेर और भागलपुर के बीच आवागमन सुगम होने की उम्मीद है। यात्रा समय घटने से व्यापार, पर्यटन और रोजगार की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है।

गंगा किनारे बसे गांवों और शहरों के बीच संपर्क मजबूत होगा। सड़क के आसपास बाजार, होटल और अन्य व्यावसायिक गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं भी बनेंगी।

हालांकि, इन संभावनाओं को हकीकत में बदलने के लिए पहले जमीन के दस्तावेजों की उलझन सुलझानी होगी। अब निगाहें इस पर हैं कि प्रशासन समय रहते खतियान और नक्शे जुटाकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया कितनी तेजी से पूरी कर पाता है।

मरीन ड्राइव के लिए हेरूदियारा से घोरघट तक 42 किलोमीटर में गंगा किनारे 38 मौजा में 223.1021 एकड़ यानी यानी 90.264 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया जाना है। बीआरसीडी द्वारा उपलब्ध कराई गई अधियाचना और जिलाधिकारी के निर्देश भूअर्जन की प्रक्रिया आरंभ करते हुए जमीन के दस्तावेजों की जांच कराई जा रही है, लेकिन बहुत जमीन का पुराना खतियान और नक्शा नहीं मिल रहा है। पुरानी जमीन का खतियान और नक्शा उपलब्ध हो सके इसके लिए अंचल प्रशासन और नगर निगम से सहयोग लिया जा रहा है। नहीं मिलने की स्थिति में निदेशालय से मार्गदर्शन मांगा जाएगा। - पंकज गुप्ता, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी

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